Real life inspirational story in hindi for students
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हमारे देश में एक ऐसी शख्सियत का जन्म हुआ था जिसने राजनीति और विज्ञान के क्षेत्र में हमें बहुत कुछ दिया है और उनके दिए गए आविष्कारों से आज भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व उन पर गर्व करता है। उस शख्सियत का नाम है Real life ए.पी.जे. अब्दुल कलाम। विज्ञान के क्षेत्र में हमें बहुत कुछ देने वाले इस शख्सियत का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ। अब्दुल कलाम मुस्लिम धर्म से थे। उनके पिता का नाम जैनुलअबिदीन था जो नाव चलाते थे और इनकी माता का नाम अशिअम्मा था।
कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल जगत में स्टीव जॉब्स एक ऐसा नाम जिसने सफलता की हर बुलन्दियो को छुआ अगर स्टीव जॉब्स के खोजो के कारण इन्हें आविष्कारक कहा जाय तो ये गलत नही होगा पढाई के दौरान दोस्त के कमरे पर फर्श पर सोकर जीवन की शुरुआत करने वाले स्टीव जॉब्स का जीवन काफी संघर्षमय रहा तो आईये जानते है
जॉब्स का शुरुआती जीवन बहुत ही संघर्षमय था। वे अपनी पढ़ाई करने के लिए अपने एक अच्छे दोस्त के यहाँ रहते थे और वही जमीन पर वह सोते थे क्योंकि उनके पास कोई हॉस्टल का कमरा तक नहीं था और उनके पास खाना खाने के पैसे भी नहीं होते थे। तब वह कोक की बोतल को वापस करने का काम किया करते थे तथा वह अच्छा भोजन करने के लिए 7 मील चलकर हरे कृष्ण मंदिर जाया करते थे।
एप्पल कंपनी लोगों की पसंद बन गई और लाभ कमाती गयी और इस तरह यह एक साल के अंत में ही पर्सनल कंप्यूटर बनाने वाली एक दूसरी बड़ी कंपनी बन गयी। एप्पल इतनी बड़ी मात्रा में पर्सनल कंप्यूटर का उत्पादन करने वाली पहली सबसे बड़ी कंपनी थी। जॉब्स रातों रात ही सफलता के कदम चूमते गये और एप्पल के कंप्यूटर पुरे विश्व में मशहूर हो गए। उसके बाद उन्होंने एप्पल 2 को प्रस्तुत किया। जो कि कई रंगों को उपयोग करने वाली प्रणाली थी। उस समय एप्पल ने लोगों के दिलों में जगह बना ली थी। inspirational story
कंपनी की सफलता के लिए उन्होंने एक आदमी को कंपनी में रखा बाद में उसके साथ उनके मतभेद हो गये तब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने और सभी ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें उनकी कंपनी से निकाल दिया गया।
उनको एक बार फिर से नया मुकाम पाने में काफी समय लगा पर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अगले 5 साल तक संघर्ष करने के बाद उन्होंने एक नई कंपनी नेक्स्ट और पिक्सर की शुरुआत की। 1955 में पिक्सर ने दुनिया में पहली बार एनिमेटेड फ़िल्म “टॉय स्टोरी” बनाई।inspiration
फिर कुछ दिनों बाद एप्पल ने नेक्स्ट को भी खरीद लिया और जॉब्स स्टीव एक बार फिर से एप्पल में काम करने लगे और एप्पल आज नेक्स्ट की सारी तकनीक उपयोग कर रही है। 1997 में स्टीव ने एक नये विचार के साथ कंप्यूटर का उत्पादन करना शुरू किया जिसे “Think Different” के नाम से जाना गया, बाद में उन्होंने एप्पल के विभिन्न प्रोडक्ट्स जैसे iMac, Apple Stores, iTunes, iTunes Store iPhone, App Store, और iPad आदि का निर्माण किया।
2001 में एप्पल iPod का निर्माण किया गया। सन 2007 में एप्पल कंपनी ने iPhone नाम के मोबाइल फ़ोन का निर्माण किया, जो कि लोगों को बहुत पसंद आये और सफल भी रहे। आज के दुनिया में भी iPhone एक बहुत बड़ा ब्रांड कहलाता है। उनके पास पिक्सर एनिमेशन के शेयर थे। पिक्सर उनकी ही संपत्ति है। जॉब्स 1970 से 1980 के कंप्यूटर क्रांति के जनक कहलाते थे।
जॉब्स संगीतकार दि बीटल्स के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उनसे बहुत ज्यादा प्रेरित भी हुए। स्टीव 7 महीने तक भारत में रहे उन्होंने भारत की यात्रा करके अध्यात्म का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया और बाद में अमेरिका लौट गये। वहां जाकर उन्होंने बोद्ध धर्म को अपनाया और अपना सिर भी मुंडा लिया और वह भारतीयों की तरह कपड़े भी पहनने लगे।
गूगल नें 10 अगस्त,2015 को पूरी दुनिया को अचम्भे मैं डाल दिया जब उसने अपने कंपनी का CEO सुंदर पिचाई को घोषित किया। वैसे तो यह भारत के लोगों के लिए बहुत ही गर्व की बात थी कि एक भारतीय व्यक्ति को दुनिया के सबसे बड़ी कंपनी Google के CEO के रूप में चुना गया है।
यह बात सुनने मैं तो बहुत आसान लगता है कि सुंदर पिचाई Google जैसी बड़ी कंपनी के CEO हैं पर बहुत कम लोग ही हैं जो जानते हैं इस कमियाबी के पीछे कितनी मेहनत और संगर्ष है।
जब सुंदर पिचाई 12 साल के थे तो उनके पिताजी घर में एक लैंड लाइन फोन घर लेकर आये। उनके जीवन में यह पहला टेक्नोलॉजी से जुड़ा चीज था जो सुंदर जो पिचाई के घर में आया था। सुंदर पिचाई में बहुत ही स्पेशल क्वालिटी/असाधारण ज्ञान था। वो आसानी से अपने टेलीफोन में डायल किये गए सभी नुबरों को याद रख लिया करते थे। सिर्फ फ़ोन नंबर ही नहीं उन्हें हर प्रकार के नंबर आसानी से याद रह जाते थे। पढाई के साथ-साथ वे खेल में भी अच्छे थे। वो अपने स्कूल क्रिकेट टीम के कप्तान भी थे।
उसके बाद उन्होंने Stanford University में भौतिक विज्ञान में, MS (Masters in Science) की डिग्री पूरी कर ली और आखिर में वे MBA की पढाई के लिए Wharton School, University of Pennsylvania चले गए।best stories in the world
उन्होंने एप्लाइड मैटेरियल्स में इंजीनियरिंग और उत्पाद प्रबंधन के रूप में भी अपने प्रतिभा का योगदान दिया।
सुंदर पिचाई का गूगल से जुड़ने के बाद का जीवन
सुंदर पिचाई 2004 में Google से जुड़े। शुरू-शुरू में उन्होंने एक छोटे से टीम के साथ Google Search Tool Bar के ऊपर काम किया। इस Toolbar की मदद से आज के दिन में भी लोग Internet Explorer, Firefox में Google Search कर पा रहे हैं।
उन्होंने Google के उत्पाद जैसे Google Gear और Google Pack पर भी काम किया। Google Toolbar के सफल होने के बाद सुंदर पिचाई के मन में एक नया आईडिया आया वो था खुद का इन्टरनेट ब्राउज़र बनाने का। उस समय के Google के CEO एरिक सचमिद्त(Eric Schmidt) नें खुद के इन्टरनेट ब्राउज़र बनाने की बात को बहुत ही महंगा प्रोजेक्ट करार दिया और मना किया।
लेकिन उनक मना करने के बाद भी पिचाई ने इस बात को ठान लिया और गूगल के सह-निर्माताओं लार्री पेज और सेर्गे ब्रिन को इस बात के लिए राज़ी कर लिया। वर्ष 2008 में Google ने सुंदर पिचाई की मदद से खुद का वेब ब्राउज़र लांच किये जिसका नाम दिया गया Chrome। Google Chrome बहुत ही अच्छी तरीके से सफल हुआ क्योंकि इससे Google Search लोग Diectly इस्तेमाल कर सकते हैं। आज के दिन में गूगल क्रोम दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जाने वाला वेब ब्राउज़र हैं।
उसी वर्ष 2008 में सुंदर पिचाई का वाईस प्रेसिडेंट ऑफ़ प्रोडक्ट डेवलपमेंट के रूप में प्रमोशन किया गया। इस पोजीशन पर आते ही सुंदर पिचाई और भी मेहनत करने लगे और 2012 में वो Chrome और Apps के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट बन गए।
दक्षिण अफ्रीका के महात्मा गाँधी कहे जाने वाले नेल्सन मंडेला एक महान राष्ट्र नायक थे। इन्होंने दक्षिण अफ्रीका की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तनों की बागडोर अपने हाथों में ली। राजतंत्र, उपनिवेशवाद और लोकतंत्र के सन्धिकाल वाली इस सदी में अपने देश का परचम थामे इस राजनेता ने विश्व इतिहास की इबारत अपने हाथों से लिखी। दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने मानव सभ्यता के इतिहास में ‘चमड़ी के रंग’ और नस्ल के आधार पर मानव द्वारा मानव पर अत्याचार करने की क़ानून बना रखी थीं।
बिल गेट्स को किसी परिचय कि आवश्यकता नहीं है, वह पूरी दुनिया में अपने कार्यों से जाने जाते हैं। हम सभी यह भली भांति जानते हैं कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ Software Company “Microsoft” की नींव भी बिल गेट्स के द्वारा ही रखी गयी है।
इसके पश्चात उन्हें रोकना नामुमकिन था। मात्र 17 वर्ष कि उम्र में उन्होंने अपने मित्र एलन के साथ मिलकर ट्राफ़- ओ- डाटा नामक एक उपक्रम बनाया जो इंटेल 8008 प्रोसेसर (Intel 8008 Processor) पर आधारित यातायात काउनटर (Traffic Counter) बनाने के लिए प्रयोग में लाया गया। 1973 में वह लेकसाइड स्कूल से पास हुए तथा उसके पश्चात बहु- प्रचलित हारवर्ड कॉलेज में उनका दाखिला हुआ।
परन्तु उन्होंने 1975 में ही बिना स्नातक किए वहाँ से विदा ले ली जिसका कारण था उस समय उनके जीवन में दिशा का अभाव। उसके पश्चात उन्होंने Intel 8080 चिप बनाया तथा यह उस समय का व्यक्तिगत कंप्यूटर के अन्दर चलने वाला सबसे वहनयोग्य चिप था, जिसके पश्चात बिल गेट्स को यह एहसास हुआ कि समय द्वारा दिया गया यह सबसे उत्तम अवसर है जब उन्हें अपनी स्वयं कि कंपनी का आरम्भ करना चाहिए।best stories in the world
26 नवम्बर, 1976 को उन्होंने Microsoft का नाम एक व्यापारिक कंपनी के तौर पर पंजीकृत किया। Microsoft Basic कंप्यूटर के चाहने वालों में सबसे अधिक लोकप्रिय हो गया था। 1976 में ही Microsoft MITS से पूर्णत: स्वतंत्र हो गया तथा Gates और Allen ने मिलकर कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा Software का कार्य जारी रखा।
इनसे बाद Microsoft ने अल्बुकर्क में अपना कार्यालय बंद कर बेलेवुए, वाशिंगटन में अपना नया कार्यालय खोला। Microsoft ने उन्नति की ओर बढ़ते हुए प्रारंभिक वर्षों में बहुत मेहनत व् लगन से कार्य किया। गेट्स भी व्यावसायिक विवरण पर भी ध्यान देते थे, कोड लिखने का कार्य भी करते थे तथा अन्य कर्मचारियों द्वारा लिखे गए व् जारी किये गए कोड कि प्रत्येक पंक्ति कि समीक्षा भी वह स्वयं ही करते थे।
इसके बाद जानी मानी कंपनी IBM ने Microsoft के साथ काम करने में रूचि दिखाई, उन्होंने Microsoft से अपने पर्सनल कंप्यूटर के लिए बेसिक इंटरप्रेटर बनाने का अनुरोध किया। कई कठिनाइयों से निकलने के बाद गेट्स ने Seattle कंप्यूटर प्रोडक्ट्स के साथ एक समझौता किया जिसके बाद एकीकृत लाइसेंसिंग एजेंट और बाद में 86-DOS के वह पूर्ण आधिकारिक बन गए और बाद में उन्होंने इसे आईबीएम को $80,000 के शुल्क पर PC-DOS के नाम से उपलब्ध कराया। इसके पश्चात Microsoft का उद्योग जगत में बहुत नाम हुआ।
1981 में Microsoft को पुनर्गठित कर बिल गेट्स को इसका चेयरमैन व् निदेशक मंडल का अध्यक्ष बनाया गया। जिसके बाद Microsoft ने अपना Microsoft Windows का पहला संस्करण पेश किया। 1975 से लेकर 2006 तक उन्होंने Microsoft के पद पर बहुत ही अदभुत कार्य किया, उन्होंने इस दौरान Microsoft कंपनी के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
अल्बर्ट आइंस्टीन दुनिया के महान वज्ञानिक और थ्योरिटिकल भौतिकवादी थे। आइंस्टीन पूरे विश्व में द्रव्मान और ऊर्जा के समीकरण E= mc2 और सपेक्षता के सिध्दांत के लिये प्रसिद्ध थे। ये समीकरण अल्बर्ट आइंस्टीन के सबसे प्रसिद्ध समीकरणों में से एक था। इन्होने अपने जीवन में बहुत से खोज किये। उनके कुछ अविष्कार पुरे दुनिया में बहुत फेमस हुआ जिनके वजह से अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हो गया। आइंस्टीन एक बुद्धिमान और सफल वज्ञानिक रहे है।best stories in the world
धुनिक समय के भौतिक विज्ञान को सरल बनाने में इनका बहुत बड़ा हाथ रहा है। अल्बर्ट आइंस्टीन को 1921 में प्रकाश विधुत उत्सर्जन की खोज के लिए इनका नोबेल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। आइंस्टीन ने बहुत से खोज में अपना योगदान दिया है जैसे – सापेक्ष ब्राम्हण, क्वांटम सिद्धांत, अणुओ की ब्राउनियन गति, विकिरण का सिद्धांत और अन्य बहुत से खोज में अपना योगदान दिया है।
इन्होने 50 से अधिक शोध पत्र और विज्ञानं की अलग अलग किताबे भी लिखी है जिसकी वजह से 1999 में टाइम्स पत्रिका में इनको शताब्दी पुरुष घोषित किया गया और एक सर्वे के अनुसार ये सार्वकालिक महानतम वज्ञानिक मने गए है। इनकी बौद्धिक उपयोगितो को देखते हुए आइंस्टीन शब्द को बुद्धिमान का पर्याय बना दिया गया है।
इनकी मात्रभाषा जर्मन थी लेकिन बाद में इन्होने अंगेजी और इतालवी भी सीखी। इनका जन्म तो जर्मनी के उल्म शहर में हुआ लेकिन इनका परिवार 1880 में म्यूनिख शहर चला गया। वहीँ पर इन्होने अपनी पढाई शुरू की। आइंस्टीन पिता और उनके चाचा ने म्यूनिख शहर में एक कंपनी खोली जिसका नाम “इलेक्ट्राटेक्निक फ्रैबिक जे आइंस्टीन एंड सी” (Elektrotechnische Fabrik J.Einstein & Cie) था, जोकि बिजली के उपकरण बनती थी।
जहाँ से आइंस्टीन ने अपनी माध्यमिक शिक्षा और उच्च माध्यमिक शिक्षा भी प्राप्त की। सन 1895 में आइंस्टीन ने स्विस फ़ेडरल पोलिटेक्निक की परिक्षा दी, जो बाद में Edigenossische Technische Hochschule (ETH) के नाम से जाना जाने लगा। उस वक़्त इनकी उम्र 16 साल थी। लेकिन गणित और भौतिक के विषय को छोड़ कर बाकि सभी विषयों में फेल हो गये थे। और अंत में वहां से प्रधानाचार्य के सलाह पर वो स्विट्जर्लैंड के आरू में आर्गोवियन कैंटोनल स्कूल में चले गये। यहाँ से आइंस्टीन ने डिप्लोमा किया और उसके बाद इन्होने 1896 में इन्होने फेडरल इंस्टिटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी में दाखिला लिया।
सन 1900 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने फेडरल इंस्टिटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी से ग्रेजुएशन किया। सन 1902 में इन्होने मरिअक से शादी कर ली। मरिअक उनकी साथ में ही पढ़ती थी और प्यार के कारण इन्होने उनसे शादी कर ली। शादी के बाद इनके 2 बेटे हुए। आइंस्टीन ने वहां से ही डाक्टरेट की उपाधि भी ली और अपना पहला विज्ञानं दस्तावेज लिखा।
इनके द्वारा और भी बहुत से खोज की गई है जिनकी वजह से ये पुरे विश्व में प्रसिद्ध हो गये।
ए. स्टीफन हॉकिंग एक अंग्रेजी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी, ब्रह्मविज्ञानी और लेखक थे। वह स्पष्ट रूप से ब्रह्मांड के उद्गम और ब्रह्मांड और भौतिकी के कुछ सबसे जटिल पहलुओं में स्पष्ट रूप से व्याख्या करने के अपने प्रयासों के लिए जाना जाता है। सापेक्षता और क्वांटम यांत्रिकी के सामान्य सिद्धांत के एक संघ द्वारा समझाया गया ब्रह्मांड विज्ञान के एक सिद्धांत की पेशकश करने वाले स्टीफन हॉकिंग पहले वैज्ञानिक थे।
जैक मा अंग्रेजी सिखने के लिए उन लोगों से पहले अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी में बात किया करते थे। चीन में अंग्रेजी भाषा को उतना ज़रूरी नहीं माना जाता था। परन्तु जब जैक मा ने कुछ अच्छी अंग्रेजी बोलना सिख लिया तो उन्होने दुसरे देशों से आपने वाले विदेशी लोगों के लिए एक टूरिस्ट गाइड के रूप में काम किया। ऐसा करते-करते उनका अंग्रेजी बहुत अच्छा हो गया। उन्होंने यह काम लगभग 9 वर्ष तक किया। जैक मा ने Hangzhou Institute of Electronic Engineering में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में भी काम किया था।
टूरिस्ट गाइड का काम करते-करते उनका एक अच्छा विदेशी मित्र बना। जैक मा का असली नाम मा यूँ था पर चीनी भाषा में इसे बोलना बहुत ही मुश्किल था इसलिए उस विदेशी मित्र ने उनका नाम जैक मा रख दिया तब से उनको जैक के नाम से जाना आने लगा। उसके बाद जैक माँ ने नौकरी ढूँढना शुरू किया।great inspiration
जैक मा गए अमरीका Jack Ma’s goes first time to USA in 1995great inspiration
जैक मा ने 1994 में पहली बार इन्टरनेट के विषय में सुना। जैक मा 1995 में अपने दोस्तों की मदद से इन्टरनेट के विषय में जानकारी लेने के लिए अमरीका गए। अमरीका में उन्होंने पहली बार इन्टरनेट देखा और चलाया। उन्होंने इन्टरनेट पर सबसे पहले Bear शब्द को Search किया, वहां उन्हें Bear शब्द के बारे में अन्य-अन्य websites से कई प्रकार की जानकारी मिली। उन्होंने जब अच्छे से ध्यान दिया तो देखा की इन्टरनेट पर चीनी भाषा में इसके विषय में कोई जानकरी नहीं है और इस प्रकार उनके दिमागे में एक आईडिया सुझा।
यहाँ तक की उन्होंने चीन देश के विषय में भी इन्टरनेट पर search किया जिसके विषय में भी internet पर उनको search करने पर ज्यादा कुछ नहीं मिला। अपने देश की जानकारी इन्टरनेट पर न पा कर जैक बहुत दुखी हुए क्योंकि उन्हें लगा की अन्य देशों के मुकाबले टेक्नोलॉजी क्षेत्र में चीन बहुत पीछे है। great inspiration
जैक मा ने चीन की जानकारी की पहली वेबसाइट बने Jack Ma created first about China Website on Internet
जैक मा और उनके अमरीकी मित्र ने मिलकर चीन की जानकारी से भरा हुआ अपना एक पहला वेबसाइट बनाया वेबसाइट। बनाने के कुछ ही घंटों के अन्दर जैक मा को कुछ चीनी लोगों के ईमेल आने लगे। यह देख कर जैक मा को इन्टरनेट की ताकत का पता चला। best person
उसी वर्ष 1995 में जैक मा उनकी पत्नी और क्कुह दोस्तों ने मिलकर कुछ पैसे जमा किये और एक वेबसाइट बनाने की कंपनी शुरू की थी जिसका नाम उन्होंने रखा China Yellow Pages. इस कंपनी को शुरू करने के लिए सभी दोस्तों ने मिल कर लगभग 20000$ जमा किये थे। इस कंपनी का मुख्य काम था दूसरी कंपनियों के लिए वेबसाइट बनाना। 3 साल के अन्दर उसी कंपनी को 3 लाख $ का मुनाफा हुआ और जैक और उनकी टीम ने उसके बाद चीन की कंपनियों के लिए भी वेबसाइट बनाना शुरू किया।
जैक मा का कहना था की जब वे अपने दोस्तों के साथ वेबसाइट का काम करते थे तो उन्हें टीवी और ताश खेलना पड़ता था। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय का इन्टरनेट स्पीड इतना स्लो हुआ करता था की अधा पेज बनाने में 3.5 घंटे लग जाते थे। जैक मा ने अपने 33 वर्ष की आयु में अपना पहला कंप्यूटर ख़रीदा था। 1998-1999 में China International Electronic Commerce Center द्वारा स्थापित एक IT कंपनी में भी काम किया पर उसके बाद वे वहां से काम छोड़ कर अपने 17 दोस्तों की टीम के साथ दोबारा अपने जन्म स्थान Hangzhou लौट आये।
उसके बाद से Alibaba Groups ने पुरे विश्व में अपना नाम बना लिया और 240 देशों से भी ज्यादा देशों में इसका कारोबार शुरू हो गया। सितम्बर 2014 के आंकड़ों के अनुसार Alibaba कंपनी ने New York Stock Exchange के अनुसार 25 Billion $ की कंपनी खड़ी कर दी जो की एक बहुत बड़ी सफलता थी। 10 सितम्बर 2017 Forbes के Report के अनुसार जैक मा 17वें की कुल कमाई 37.6 Billion USD है।2017 के report के अनुसार आज इस कंपनी में 50000+ लोगकाम कर रहे हैं। Alibaba Groups के सभी सहायक कंपनियां – Alibaba.com, Guangzhou Evergrande Taobao F.C., Taobao, Tmall, UCWeb, AliExpress, Juhuasuan.com, 1688.com, Alimama.com, Ant Financial, Cainiao, Lazada, Youku Tudou, Alibaba Cloud
आज वो हम सब को एक प्रेरणा देते हैं और सिखाते हैं की चाहें जीवन में आपके जितनी भी मुश्कलें या असफलताएं आ जाएँ कभी भी हार नहीं मनना चाहिए क्योंकि बार-बार असफलता झेलने वाले व्यक्ति को ही सफकता मिलती।
मुकेश अंबानी को भारत में सबसे धनी व्यक्तियों में से एक माना जाता है – 2014 में उन्हें फोर्ब्स द्वारा भारत के सबसे अमीर व्यक्ति और 2015 तक दुनिया के 39 वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में गिना जाने लगा। 2014 में, वह 40 वें स्थान पर थे। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक के सबसे बड़े शेयर होल्डर भी है जो कि भारत की एक निजी फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनी है। best inspiration
अनुमान है कि कंपनी में उनके 44.7% शेयर हैं। बाजार मूल्य के मामले में रिलायंस अग्रणी भारतीय कंपनियों में से एक है। वह मुंबई इंडियंस के मालिक भी हैं, जो इंडियन प्रीमियर लीग की एक टीम हैं। फोर्ब्स के अनुसार उनकी संपत्ति का मूल्य 22.2 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिससे वे हमारे भारत के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं, हालाँकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी हिस्सेदारी 48 % है।
प्रारंभिक जीवन और उनकी शिक्षा
मुकेश अंबानी की शुरूआती शिक्षा मुंबई के अबाय मोरिस्चा स्कूल में हुयी तथा उन्होंने कैमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री यूडीसीटी से प्राप्त की। बाद में मुकेश अंबानी एम बी ए करने के लिये स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय भी गए किन्तु पहले वर्ष के बाद ही उन्होंने अपनी पढ़ाई को छोड़ दिया। मुकेश अम्बानी का जन्म 19 अप्रैल, 1957 में यमन में स्थित अदेन शहर में हुआ था।inspirational reL life story
उनकी माँ का नाम कोकिलाबेन अंबानी था और पिता का नाम धीरुभाई अंबानी था, जो कि एक प्रसिद्ध उद्योगपति थे। इसके अलावा उनकी दो बहने भी है जिनका नाम दीप्ती सल्गओंकर और नीना कोठारी है। मुकेश अंबानी के एक छोटे भाई है, जिनका नाम अनिल अंबानी हैं। उनके पिता धीरुभाई अंबानी अदेन में ही काम करते थे। 1970 के दशक तक मुकेश अंबानी का परिवार मुंबई के भुलेश्वर में दो कमरों के एक मकान में गुजारा किया करता था पर कुछ सालों बाद धीरुभाई ने मुंबई के कोलाबा में एक 14 मंजिल ईमारत जिसका नाम (सी विंड) था उसको खरीद लिया जहाँ मुकेश अम्बानी परिवार के सभी अन्य सदस्य कई सालों तक वहां रहे।
मुकेश अंबानी 90 किलो के स्वस्थ शरीर के साथ 5 फीट 6.5 इंच लंबे है। उनके बालों का रंग कला है। वह मेष राशि के है और उनका धर्म हिंदू है। व्यवसाय के अलावा, उनके शौक है- फिल्में देखना, पुराने हिंदी गाने सुनना और तैराकी करना। उनके पास कई लक्जरी कारें जैसे बेंटले फ्लाइंग स्पूर, रोल्स रॉयस प्रेत और बी एम डब्ल्यू 760li है । उनका निजी पसंदीदा वाहन लगभग 25 करोड़ रुपये की एक अनुकूलित वैनिटी वैन है। इसके अलावा, वह बोइंग बिजनेस जेट 2 और फाल्कन 900EX के मालिक भी है।inspirational reL life story
एक अरबपति होने के बावजूद, वह एक सादा जीवन जीना पसंद करते है। आम तौर पर, वह एक साधारण शर्ट और एक काला पैंट पहनते है और किसी भी ब्रांड का पालन नहीं करते है। वह एक गुजराती व्यक्ति हैं।उन्हें गुजराती व्यंजन खाने का शौक है। उनके पसंदीदा व्यंजन पानकी, डोसा, चाट और भुनी हुयी मूंगफली हैं।
1981 में मुकेश अंबानी परिवार के कारोबार में शामिल हो गए थे। यह धीरूभाई अंबानी ही थे जिन्होंने रिलायंस शुरू किया था। मुकेश अंबानी ने केवल कपड़ा से लेकर क्षेत्रों तक पॉलिएस्टर फाइबर, पेट्रोलियम परिष्करण और पेट्रोकेमिकल्स के रूप में विविधता से कंपनी की गतिविधियों का विस्तार शुरू किया पर बहुत जल्द, वह तेल और उत्पादन और प्राकृतिक गैस की खोज में भी आगे बढ़ गए। real life
सन 1980 के समय जब इंदिरा गाँधी सरकार ने पी एफ वाई (पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न ) का निर्माण निजी क्षेत्रों के लिए खोला तब रिलायंस ने भी लाइसेंस को पाने के लिये इसमें भाग लिया और टाटा, बिरला तथा 43 और भी बड़ी बड़ी कंपनीयों के मध्य लाइसेंस पाने में उन्होंने कामयाबी भी प्राप्त कर ली। पीएफवाई (पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न) कारखाने का जब निर्माण होने लगा तो धीरुभाई अंबानी ने मुकेश अंबानी को एमबीए की पढ़ाई के बीच में ही बुला लिया और इस तरह मुकेश अंबानी ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और वह भारत वापस आ गए और कारखाने के निर्माण के कार्य में मेहनत से कार्य करने लगे।
मुकेश अम्बानी के मेहनत पूर्ण कार्य से ही रिलायंस ने भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में से एक जो कि ‘रिलायंस इन्फोकॉम लिमिटेड’ ( रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड) की स्थापना की। मुकेश अंबानी ने गुजरात के जामनगर में एक बुनियादी स्तर की विश्व की सबसे बड़ी पेट्रोलियम रिफायनरी की स्थापना करने में महत्त्वपूर्ण योगदान भी दिया। सन 2010 में इस रिफायनरी की क्षमता 660,000 बैरल प्रति दिन हुआ करती थी यानी 3 करोड़ 30 लाख टन प्रति वर्ष थी। लगभग 100000 करोड़ रुपयों के निवेश से बनी इस रिफायनरी में पेट्रोकेमिकल, पावर जेनरेशन, पोर्ट तथा सम्बंधित आधारभूत ढांचा है।Real life inspirational story
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर से ‘रिलायंस जिओ’ के माध्यम से दूरसंचार के क्षेत्र में एक नया कदम रखा। मुकेश अंबानी ने आज 4G सेवाएं प्रारंभ कर दी है। जो कि आज की दुनिया में लोगों को आकर्षित कर रही है। इन्ही जिओ 4G के बेहतरीन ऑफर के कारण ही आज गाँव से लेकर शेहर तक लोग तेज़ इन्टरनेट का उपयोग कम दामों में कर पा रहे हैं।
संदीप माहेश्वरी युवाओं के लिए प्रेरक और आज का सबसे प्रासंगिक नाम है. भारत के शीर्ष उद्यमियों में तेजी से उभरने वाले नामों में एक नाम संदीप महेश्वरी का भी है. संदीप महेश्वरी ने ये सफलता काफी कम समय में हासिल की है. संदीप इमेजबाजार.कॉम के संस्थापक और चीफ एक्सक्यूटिव ऑफिसर हैं. इमेज बाजार भारतीय वस्तुओं और व्यक्तियों का चित्र सहेजने वाली सबसे बड़ी ऑनलाईन साइट है. इसके पोर्टल में एक लाख से भी अधिक नये मॉडलों की तस्वीरें संरक्षित है. इतना ही नहीं कई हजार कैमरामैन इस वेबपेज के साथ काम करते हैं. तीव्र बुद्धि के स्वामी संदीप को इस कार्य के लिए न सिर्फ काफी मेहनत नहीं करनी पड़ी, बल्कि उन्होंने अपने दिमाग का सही उपयोग कर इसे हासिल किया.
संदीप सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि देश विदेश में काफी नाम कमा चुके हैं. संदीप युवाओं को आगे लाने के लिए, उनके भविष्य को लेकर उन्हें निराशा से बाहर निकालने के लिए कई जगह सेमिनार भी आयोजित कराते हैं. उनका ‘फ्री मोटिवेशनल लाइफ चेजिंग सेमिनार्स’ काफी प्रसिद्ध है. 34 वर्षीय संदीप अपने जीवन में कई संकटों का सामना करते हुए इस मुकाम पर पहुँचें है.Real life inspirational story
28 सितम्बर 1980 को सन्दीप महेश्वरी का जन्म दिल्ली में हुआ था. संदीप बचपन से ही बहुत कुछ कर करने के बारे में सोचते थे. वे अपने बचपन के बारे में खुलकर कभी ज्यादा बात नहीं करते हैं. उनके पिता कारोबारी थे. संदीप के पिता का एल्युमीनियम का कारोबार था. लगभग दस साल चलने के बाद ये व्यापार ठप्प हो गया. परिवार की सहायता के लिए उन्होंने मां के साथ मिलकर मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी को ज्वाइन किया, जिसमें घर में ही चीजों को बनाना और बेचना होता था. Real life inspirational story
एमएलएम का काम भी ज्यादा दिन नहीं चला. पिता का कारोबार थम जाने के कारण संदीप का पूरा परिवार आर्थिक संकट से जूझने लगा. सन्दीप के पिता काफी परेशान रहते थे. इस संकट की घड़ी में संदीप के परिवार ने टूटने की अपेक्षा खुद को और ज्यादा संगठित किया. उसी समय से संदीप अपने परिवार के लिए कुछ करना चाहते थे. इस छोटे व्यवसाय के बाद उन्होंने और भी कई काम शुरु किये, जो ज्यादा दिनों तक नहीं चले. अंत में उन्होंने परिवार चलाने के लिए पीसीओ का काम आरंभ किया. चुंकि उस समय मोबाइल उतना नहीं था, तो ये काम कुछ दिनों के लिए अच्छा चला. उनकी मां ये काम संभालती थी.inspirational story
संदीप को परिवारिक और आर्थिक संकट के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी. दिल्ली के करोड़ीमल कॉलेज से वे कामर्स में स्नातक कर रहे थे, और 2000 में उन्होंने फोटोग्राफी करना आरंभ किया था, और आरंभ में कई तरह से उसे पेशे के रूप में अपनाने की कोशिश की. इसी सिलसिले में कुछ मित्रों के साथ एक छोटा सा व्यवसाय भी आरंभ किया, किन्तु वे सभी असफल हो गये. किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही चुना था.
अब सन्दीप ने ठान लिया कि वह 21 साल के लड़के की तरह ही नया उद्यम आरंभ करेंगे, ये आवाज उसके अंर्तमन से आ रही थी. ये विचार आते ही वो अपने कुछ मित्रों को संग लेकर उस लडके की कम्पनी में गये पर वहाँ कुछ हाथ नहीं लगा. किसी को कंपनी ने नहीं रखा, मित्र भी उनकी खिल्ली उड़ाने लगे थे. इस असफलता ने उन्हें थोड़ी सा पीछे कर दिया पर हरा नहीं पाई. संदीप असफलताओं का मूल्यांकन करने लगे. उन्होंने अपनी गलतियों को सुधारने का उपाय सोचा और उन्हें लगा कि शायद साझेदारी पर विश्वास न करके भूल की है. संदीप को लगने लगा कि जब तक आप संघर्ष के कटुत्कित अनुभव से नहीं गुजरते हैं, सफलता आपको नहीं मिलेगी. इसके बाद उन्होने कई और असफल प्रयास किये.
मॉडलिंग के दौरान एक मित्र कुछ तस्वीर लेकर उनके पास आया. उन तस्वीरों को देखकर उन्हें लगा कि उनके अंतरत्मा की आवाजा इसी व्यवसाय के लिए आ रही है. उन्होंने कुछ जानकारी हासिल कर 2 सप्ताह के फोटोग्राफी के प्रशिक्षण कोर्स में दाखिला ले लिया . कोर्स ज्वाइन करने के बाद उन्होंने एक मंहगा कैमरा भी खरीदा और तस्वीर खींचना आरंभ कर दिया. फोटोग्राफी कोर्स पूरा करने के बाद भी उनके लिए रास्ता कठिन ही था. उन्होंने देखा कि देश में लाखों लोग फोटोग्राफर के पेशा के लिए धक्का खा रहे हैं. उन्हें लगने लगा कि ऐसा क्या करना चाहिए जो फोटोग्राफी को दूसरे लेवल पर ले जाकर नया व्यवसाय का रूप दे. उन्होंने हिम्मत जुटाकर एक अखबार में फ्री पोर्ट फोलियो का विज्ञापन दिया, और उस विज्ञापन को पढ़कर कई लोग आये. उन लोगों से ही जिंदगी की पहली कमाई का सिलसिला आरंभ हुआ. फोटोग्राफी का व्यापार आरंभ हो गया. और धीरे धीरे इसका विस्तार करते हुए उन्होंने एक विश्व रेकार्ड 12 घंटे में 100 मॉडल्स के 10000 फोटो खींच कर लिम्का बुक्स में अपना नाम दर्ज कर लिया. इस रेकार्ड के बाद उनके पास काम की तादाद और ज्यादा बढ़ने लगी.inspirational story
लिमका बुक में नाम दर्ज करने के बाद उनको काफी व्यवसाय मिलने लगा. इसी रेकार्ड के कारण उनके पास कई मॉडल्स और विज्ञापन कंपनियां आने लगी, और देखते ही देखते कुछ ही अवधि में उनकी कम्पनी भारत की बड़ी फोटोग्राफी एजेंसी बन गयी. पैसों की कोई कमी नहीं रही. 2006 में संदीप के दिमाग में एक नया ख्याल आया और उसी ख्याल से उपजा ऑनलाइन इमेज बाजार शेयरिंग साईट. ये देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन फोटोग्राफी की कम्पनी है. अभी उनके पास 45 देशों से लगभग 7000 से ज्यादा क्लाईंट है. अब संदीप भी शेयरिंग पर सेमिनार देते हैं और लाखों युवाओं को प्रेरित करते हैं.
संदीप का मानना है कि हर किसी के अंदर उसका गुरू रहता है. सही समय पर आप उस गुरू की अनुभूति कीजिए. संदीप अब युवाओं के लिए गुरू की तरह है. लोग उनके द्वारा कहे गये शब्दों को ध्यान से सुनते है और अपने जीवन में लाने की कोशिश भी करते हैं. संदीप के जीवन का सबसे बड़ा शब्द है ‘आसान’. उनका मानना है जीवन में कुछ भी कठिन नहीं है, सभी कुछ आसान है. सिर्फ पूरी शिद्दत से आप खुद के लक्ष्य के पीछे लगे रहिए.
‘यदि आपके पास चीजों का आधिक्य है तो आप उसे सिर्फ अपने लिए ही संरक्षित ना रखें,उसे जरूरतमंदों के साथ शेयर करें.’inspirational story
सभी से सीखो पर सबका अनुसरण मत करो.
मनुष्य की सबसे संरचनात्मक और विनाशात्मक चीज है उसकी लालसा.
ना भागना है, ना रूकना है, बस चलते जाना है. पैसे की उतनी ही जरूरत है जितना गाड़ी में पेट्रोल
जब भी कठिनाइयों से डरो तो अपने से नीचे के लोगों को देखो.
Top 12 real life persons story
- ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
- स्टीवन पॉल जॉब्स
- सुंदर पिचाई
- नेल्सन मंडेला
- बिल गेट्स
- अल्बर्ट आइंस्टीन
- स्टीफन हॉकिंग
- जैक मा
- ब्रूस ली
- मुकेश अंबानी
- रजनीकांत
- संदीप महेश्वरी
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| 1. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम |
बचपन और शिक्षा
अब्दुल कलाम का बचपन बहुत ही संघर्षों में गुजरा। क्योंकि ये गरीब परिवार से थे और ये बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ काम भी करते थे। जिस प्रकार अखबार बांटने के लिए किसी को काम पर रखा जाता है, उसी तरह अब्दुल कलाम भी बचपन में अखबार बांटने जाया करते थे ताकि वो अपने परिवार का खर्च चला सके। उन्होंने रामेश्वरम, रामनाथपुरम के स्च्वात्र्ज मैट्रिकुलेशन स्कूल से अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। अब्दुल कलाम में बचपन से ही कुछ नया सीखने की जिज्ञासा दृढ़ थी। वो पढ़ाई भी करते तो पूरी लग्न और जिज्ञासा से किया करते थे चाहेे उनके पास कैसा भी समय हो।Real life
काॅलेज और करियर का दौर
अपनी स्कूली शिक्षा के पूर्ण होने के बाद जैसा कि अब्दुल कलाम की रूचि विज्ञान में थी तो उन्हें भौतिक विज्ञान में स्नातक करनी थी। उसके लिए उन्होेंने तिरूचिरापल्ली के सेंट जोसेफ काॅलेज में दाखिला लिया और 1954 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब्दुल कलाम आगे की पढ़ाई पूरी करना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने 1955 में मद्रास की ओर प्रस्थान किया। वहां जाने के बाद उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा ग्रहण की। क्योंकि उनकी रूचि भौतिक विज्ञान में ज्यादा थी। उनके शिक्षा का ये दौर करीब 1958 से 1960 तक चलता रहा।
करियर की ओर बढ़ना
अपनी शिक्षा को पूर्ण करने के बाद अब्दुल कलाम ने एक वैज्ञानिक के रूप में डीआरडीओ यानि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन में काम किया। अब्दुल कलाम का सपना था कि वो भारतीय वायु सेना में एक पायलट बने और देश के लिए कुछ करें। इसके लिए वो काफी प्रयास करते रहे। लेकिन वो इसमें नहीं जा पाए परंतु उन्होंने अपने इसी सपने को सकारात्मक माध्यम से एक नई दिशा दी और उन्होंने शुरूआत में भारतीय सेना के लिए एक छोटे हेलिकाप्टर का मोडल तैयार किया। Real life
डीआरडीओ में काम करने के बाद अब्दुल कलाम की करियर यात्रा इसरो की ओर बढ़ी। सन् 1969 में उनका कदम इसरो यानि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन पर पड़ा। जहां पर वो कई परियोजनाओं के निदेशक के रूप में काम करते रहे और गर्व की बात ये है कि इसी दौरान 1980 में इन्होंने भारत के पहले उपग्रह ‘‘पृथ्वी‘‘ या एसएलवी3 को पृथ्वी के निकट सफलतापूर्वक स्थापित किया। इन्होंने भारत के लिए ये काम इतना बड़ा कर दिया था कि इनके इस काम की वजह से हमारा देश अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बना।Real life story
उपलब्धियां
अब्दुल कलाम निरंतर विज्ञान के लिए नया-नया काम करते रहे जिसमें उन्होंने भारत के पहले परमाणु परीक्षण को भी साकार कराने में में अपना सहयोग दिया। इतना ही नहीं इन्होंने नासा यानि नेशनल ऐरोनोटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन की यात्रा भी की। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को इतनी तरक्की दिलाने से भारत सरकार द्वारा 1981 में इन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया। सन् 1982 में उन्होंने गाइडेड मिसाइल पर कार्य किया। अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतनी लग्न और निष्ठा को देखते हुए भारत सरकार ने 1990 में फिर इन्हें पद्म विभूषण से नवाजा जो कि बहुत ही गर्व की बात है। real life inspiration
अब्दुल कलाम आजाद को रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहाकार के रूप में भी चुना गया। जिस पर वो 1992 से 1999 तक रहे। इतना ही नहीं इस कार्यकाल के मध्य में यानि 1997 में उन्हें भारत रत्न से नवाजा गया। इसी तरह योगदान देते हुए उन्होंने आगे भारत के दूसरे परमाणु परीक्षण को सफल बनाया। सन् 2002 तक भारत को अब्दुल कलाम इस हद तक ले जा चुके थे जहां तक भारत को सोचना भी मुश्किल था और इसी योगदान की सफलता का फल उन्हें भारत का राष्ट्रपति बनके मिला। 2002 में उन्हें भारत का राष्ट्रपति चुना गया था और ये 2007 तक इस कार्यकाल में रहे। उनको उनके काम की वजह से मिसाइल मेन जैसे कई नामों से जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने शिक्षा संस्थाओं के कई पदों पर कार्य किया। 27 जुलाई 2015 को वो शिलोंग के भारतीय प्रबंधन संस्थान में लेक्चर देने गए थे। इसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और अब्दुल कलाम आजाद को इस दुनिया से विदा होना पड़ा। भले ही आज अब्दुल कलाम इस दुनिया में नहीं लेकिन उन्होंने हमारे भारत को इतना कुछ दिया है कि वो हमारे लिए आज भी जिंदा है।
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| 2. स्टीवन पॉल जॉब्स |
कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल जगत में स्टीव जॉब्स एक ऐसा नाम जिसने सफलता की हर बुलन्दियो को छुआ अगर स्टीव जॉब्स के खोजो के कारण इन्हें आविष्कारक कहा जाय तो ये गलत नही होगा पढाई के दौरान दोस्त के कमरे पर फर्श पर सोकर जीवन की शुरुआत करने वाले स्टीव जॉब्स का जीवन काफी संघर्षमय रहा तो आईये जानते है
प्रारंभिक जीवन Early Life
स्टीव जॉब्स का जन्म कैलिफ़ोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में 24 फ़रवरी 1955 में हुआ था। उनकी शुरूआती पढ़ाई कैलिफ़ोर्निया में हुई। उनके पिता का नाम पॉल जॉब्स था, जो कि एक बढ़ई और मैकेनिक थे। माँ का नाम क्लारा था। जो कि एक अकाउंटेंट थी। वह जॉब्स को पढ़ाया करती थी। जॉब्स ने अपने पिता से इलेक्ट्रोनिक का सारा काम सीखा। 1972 में स्टीव ने कैलिफ़ोर्निया के रीड कॉलेज में अपना नाम लिखवाया पर पैसे की कमी के कारण वह अपनी पढ़ाई आगे पूरी नहीं कर पाये इस कारण उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और फिर उन्होंने एक रचनात्मक कक्षा में दाखिला लिया। वहां पर सुलेख सिखाया जाता था। inspirationजॉब्स का शुरुआती जीवन बहुत ही संघर्षमय था। वे अपनी पढ़ाई करने के लिए अपने एक अच्छे दोस्त के यहाँ रहते थे और वही जमीन पर वह सोते थे क्योंकि उनके पास कोई हॉस्टल का कमरा तक नहीं था और उनके पास खाना खाने के पैसे भी नहीं होते थे। तब वह कोक की बोतल को वापस करने का काम किया करते थे तथा वह अच्छा भोजन करने के लिए 7 मील चलकर हरे कृष्ण मंदिर जाया करते थे।
व्यवसाय में सफलता Occupation and Business Success
उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत खुद अपने पिता के गैरेज से की। जिसे हम सब आज एप्पल के नाम से जानते है। स्टीव की कड़ी मेहनत और लगन से उनकी कंपनी 2 बिलियन डॉलर के फायदे के साथ 4000 कर्मचारी की एक कंपनी बन गई और इसत रह एप्पल के पर्सनल कंप्यूटर बाजार में आये। एप्पल कंप्यूटर ने तेज़ी से पूरे बाजार पर कब्ज़ा कर लिया।एप्पल कंपनी लोगों की पसंद बन गई और लाभ कमाती गयी और इस तरह यह एक साल के अंत में ही पर्सनल कंप्यूटर बनाने वाली एक दूसरी बड़ी कंपनी बन गयी। एप्पल इतनी बड़ी मात्रा में पर्सनल कंप्यूटर का उत्पादन करने वाली पहली सबसे बड़ी कंपनी थी। जॉब्स रातों रात ही सफलता के कदम चूमते गये और एप्पल के कंप्यूटर पुरे विश्व में मशहूर हो गए। उसके बाद उन्होंने एप्पल 2 को प्रस्तुत किया। जो कि कई रंगों को उपयोग करने वाली प्रणाली थी। उस समय एप्पल ने लोगों के दिलों में जगह बना ली थी। inspirational story
कंपनी की सफलता के लिए उन्होंने एक आदमी को कंपनी में रखा बाद में उसके साथ उनके मतभेद हो गये तब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने और सभी ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें उनकी कंपनी से निकाल दिया गया।
उनको एक बार फिर से नया मुकाम पाने में काफी समय लगा पर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अगले 5 साल तक संघर्ष करने के बाद उन्होंने एक नई कंपनी नेक्स्ट और पिक्सर की शुरुआत की। 1955 में पिक्सर ने दुनिया में पहली बार एनिमेटेड फ़िल्म “टॉय स्टोरी” बनाई।inspiration
फिर कुछ दिनों बाद एप्पल ने नेक्स्ट को भी खरीद लिया और जॉब्स स्टीव एक बार फिर से एप्पल में काम करने लगे और एप्पल आज नेक्स्ट की सारी तकनीक उपयोग कर रही है। 1997 में स्टीव ने एक नये विचार के साथ कंप्यूटर का उत्पादन करना शुरू किया जिसे “Think Different” के नाम से जाना गया, बाद में उन्होंने एप्पल के विभिन्न प्रोडक्ट्स जैसे iMac, Apple Stores, iTunes, iTunes Store iPhone, App Store, और iPad आदि का निर्माण किया।
2001 में एप्पल iPod का निर्माण किया गया। सन 2007 में एप्पल कंपनी ने iPhone नाम के मोबाइल फ़ोन का निर्माण किया, जो कि लोगों को बहुत पसंद आये और सफल भी रहे। आज के दुनिया में भी iPhone एक बहुत बड़ा ब्रांड कहलाता है। उनके पास पिक्सर एनिमेशन के शेयर थे। पिक्सर उनकी ही संपत्ति है। जॉब्स 1970 से 1980 के कंप्यूटर क्रांति के जनक कहलाते थे।
निजी जीवन Personal Life
सन् 1991 में जॉब्स की शादी हुई उनकी पत्नी का नाम लौरेन पावेल था और उनके 3 बच्चे है। उनके 1978 में उनकी पहली बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम था लीज़ा ब्रेनन जॉब्स है। सन् 1991 में उनके लड़के का जन्म हुआ उसका नाम उन्होंने रीड रखा। सन् 1994 में उनकी बड़ी बेटी का जन्म हुआ बेटी का नाम एरिन है और सन् 1998 में उनकी छोटी बेटी ईव का जन्म हुआ। स्टीव जॉब्स की एक बहन है, उनका नाम मोना सिम्प्सन है।inspirationजॉब्स संगीतकार दि बीटल्स के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उनसे बहुत ज्यादा प्रेरित भी हुए। स्टीव 7 महीने तक भारत में रहे उन्होंने भारत की यात्रा करके अध्यात्म का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया और बाद में अमेरिका लौट गये। वहां जाकर उन्होंने बोद्ध धर्म को अपनाया और अपना सिर भी मुंडा लिया और वह भारतीयों की तरह कपड़े भी पहनने लगे।
पुरुस्कार Awards
- टाइम मैगज़ीन के द्वारा 1982 में उन्हें उनकी कंपनी एप्पल कंप्यूटर के लिए “मशीन ऑफ द इयर” का पुरुस्कार दिया गया।inspiration
- स्टीव को “कैलिफ़ोर्निया हाल ऑफ फेम” से पुरुस्कृत किया गया।
- अमेरिका के राष्ट्रपति के द्वारा उन्हें “नेशनल मैडल ऑफ टेक्नोलॉजी” के पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
- मृत्यु Death
- सन 2003 को उनको पेनक्रियाटिक कैंसर की बिमारी हो गई और अक्टूबर 2011 को उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपने साथ काम करने वाले स्टीव वोज्निक के सहयोग से एप्पल कंपनी की स्थापना की। उनकी मृत्यु के कुछ समय बाद ही लेखक वाल्टर इसाकसन ने उनके बारे में कुछ बातें बताई कि वह एक ‘रचनात्मक उद्योगपति’ थे। वह जुनून के साथ अपने काम को पूरा करते थे और उन्होंने पर्सनल कंप्यूटर, एनिमेटेड मूवी, म्यूजिक, फ़ोन, टेबलेट, कंप्यूटर आदि बनाने में अपना भरषक योगदान दिया।
स्टीव जॉब्स के प्रेरणादायक कथन Few Inspirational Quotes by Steve Jobs in Hindi
- हमें कल की चिंता में अपना आज कभी भी ख़राब नहीं करना चहिये।best stories in the world
- यदि आपकी नजर हमेशा लाभ पर रहेगी तो उत्पाद की गुणवत्ता पर आपका ध्यान नहीं रह पायेगा।
- अगर आप अपना पूरा ध्यान उत्पाद की गुणवत्ता पर लगा देंगें तो सफलता आपके कदमों को चूमेगी।
- अगर आप महान कार्य करना चाहते है तो आप हमेशा अपने काम को प्यार करें।
- मौत ही जिंदगी का सबसे बड़ा आविष्कार है।
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| 3. सुंदर पिचाई |
गूगल नें 10 अगस्त,2015 को पूरी दुनिया को अचम्भे मैं डाल दिया जब उसने अपने कंपनी का CEO सुंदर पिचाई को घोषित किया। वैसे तो यह भारत के लोगों के लिए बहुत ही गर्व की बात थी कि एक भारतीय व्यक्ति को दुनिया के सबसे बड़ी कंपनी Google के CEO के रूप में चुना गया है।
यह बात सुनने मैं तो बहुत आसान लगता है कि सुंदर पिचाई Google जैसी बड़ी कंपनी के CEO हैं पर बहुत कम लोग ही हैं जो जानते हैं इस कमियाबी के पीछे कितनी मेहनत और संगर्ष है।
- क्या आपको सुंदर पिचाई की प्रेरणादायक कहानी के बारे में पता है?
- क्या आपने सुंदर पिचाई की गूगल प्रोडक्ट मेनेजर से सीईओ बनने की कहानी सुनी है?
प्रारंभिक जीवन और बचपन Early Life
सुंदर पिचाई का पूरा नाम पिचाई सुंदरराजन (Pichai Sundararajan) है जिनका जन्म 12जुलाई,1972 को मदुरै, तमिलनाडु (Madurai, Tamil Nadu) में हुआ। उनका जन्म निम्न मध्यम वर्ग के एक परिवार में हुआ था। उनके पिता एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर थे इसलिए वे चेन्नई शहर में अशोक नगर में रहते थे। उनके पिता से वे हमेशा प्रेरित होते थे और इसी लिए उन्हें भी टेक्नोलॉजी से जुड़ने की प्रेरणा मिली। उनकी माँ का नाम लक्ष्मी था। वो एक स्टेनोग्राफर थी। उन्होंने अपना स्टेनोग्राफर का काम सुंदर पिचाई के छोटे भाई के जन्म के बाद छोड़ दिया।जब सुंदर पिचाई 12 साल के थे तो उनके पिताजी घर में एक लैंड लाइन फोन घर लेकर आये। उनके जीवन में यह पहला टेक्नोलॉजी से जुड़ा चीज था जो सुंदर जो पिचाई के घर में आया था। सुंदर पिचाई में बहुत ही स्पेशल क्वालिटी/असाधारण ज्ञान था। वो आसानी से अपने टेलीफोन में डायल किये गए सभी नुबरों को याद रख लिया करते थे। सिर्फ फ़ोन नंबर ही नहीं उन्हें हर प्रकार के नंबर आसानी से याद रह जाते थे। पढाई के साथ-साथ वे खेल में भी अच्छे थे। वो अपने स्कूल क्रिकेट टीम के कप्तान भी थे।
शिक्षा Study
सुंदर पिचाई नें अशोक नगर के जवाहर विद्यालय में अपनी 10वीं कि पढाई पूरी की और चेन्नई के वाना वाणी स्कूल में अपनी 12 वीं की परीक्षा पूरी की। उसके बाद उन्होंने Metallurgical Engineering में IIT खरगपूर में ग्रेजुएशन पूरी की।उसके बाद उन्होंने Stanford University में भौतिक विज्ञान में, MS (Masters in Science) की डिग्री पूरी कर ली और आखिर में वे MBA की पढाई के लिए Wharton School, University of Pennsylvania चले गए।best stories in the world
सुंदर पिचाई का गूगल से जुड़ने से पहले का करियर Google Career
गूगल से जुड़ने से पहले सुंदर पिचाई म्क किन्से एंड कंपनी(McKinsey & Company) में संचालन परामर्श के रूप में काम करते थे।उन्होंने एप्लाइड मैटेरियल्स में इंजीनियरिंग और उत्पाद प्रबंधन के रूप में भी अपने प्रतिभा का योगदान दिया।
सुंदर पिचाई का गूगल से जुड़ने के बाद का जीवन
सुंदर पिचाई 2004 में Google से जुड़े। शुरू-शुरू में उन्होंने एक छोटे से टीम के साथ Google Search Tool Bar के ऊपर काम किया। इस Toolbar की मदद से आज के दिन में भी लोग Internet Explorer, Firefox में Google Search कर पा रहे हैं।
उन्होंने Google के उत्पाद जैसे Google Gear और Google Pack पर भी काम किया। Google Toolbar के सफल होने के बाद सुंदर पिचाई के मन में एक नया आईडिया आया वो था खुद का इन्टरनेट ब्राउज़र बनाने का। उस समय के Google के CEO एरिक सचमिद्त(Eric Schmidt) नें खुद के इन्टरनेट ब्राउज़र बनाने की बात को बहुत ही महंगा प्रोजेक्ट करार दिया और मना किया।
लेकिन उनक मना करने के बाद भी पिचाई ने इस बात को ठान लिया और गूगल के सह-निर्माताओं लार्री पेज और सेर्गे ब्रिन को इस बात के लिए राज़ी कर लिया। वर्ष 2008 में Google ने सुंदर पिचाई की मदद से खुद का वेब ब्राउज़र लांच किये जिसका नाम दिया गया Chrome। Google Chrome बहुत ही अच्छी तरीके से सफल हुआ क्योंकि इससे Google Search लोग Diectly इस्तेमाल कर सकते हैं। आज के दिन में गूगल क्रोम दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जाने वाला वेब ब्राउज़र हैं।
उसी वर्ष 2008 में सुंदर पिचाई का वाईस प्रेसिडेंट ऑफ़ प्रोडक्ट डेवलपमेंट के रूप में प्रमोशन किया गया। इस पोजीशन पर आते ही सुंदर पिचाई और भी मेहनत करने लगे और 2012 में वो Chrome और Apps के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट बन गए।
- एंड्राइड को बनाने वाले, एंडी रुबिन ने 2013 में किसी दुसरे प्रोजेक्ट के कारण Andoid के प्रोजेक्ट को छोड़ दिया। इसके बाद लार्री पेज नें पिचाई को एंड्राइड का इन-चार्ज बना दिया। बाद अक्टूबर 2014 में उन्हें प्रोडक्ट चीफ बना दिया गया।
- 10 अगस्त 20फरवरी 2016 में उन्हें Google कि एक कंपनी Alphabet Inc. के 273,328 शेयर्स डे कर सम्मान दिया गया।
- वे आज भी समय-समय पर Skype के ज़रिये IIT खरगपुर के Students से बातचीत करते हैं
- 15 को सुंदर पिचाई को गूगल के CEO के रूप में घोषित किया गया।
- सुंदर पिचाई का निजी जीवन Personal Life
- सुंदर पिचाई ने अपने लम्बे समय की गर्लफ्रेंड, अंजलि पिचाई से शादी की है। वो दोनों IIT खरगपूर में साथ में पढाई करते थे। उनके दो सुंदर बच्चे भी हैं एक लड़का और एक लड़की।
- उन्होंने Brooklyn, New York में $6.8 मिलियन देकर अपने लिए घर खरीदा।
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| 4. नेल्सन मंडेला |
वह दुनिया की एकमात्र ऐसी सरकार थी, जिसने जातिय पृथक्करण एवं रंगभेद पर आधारित लिखित कानून बना रखी थीं। नेल्सन मंडेला ने खून का घूट पीकर, ड्राइवर, दरबान और भृत्य के रूप में निर्वासित जीवन जीकर, जेल में क्रूर यातनाएँ सहकर भी दक्षिण अफ्रीका को बीसवीं सदी के अंतिम मोड़ पर आजाद करवा ही दिया।
प्रारम्भिक जीवन Early life
दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले महान जननायक नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई सन् 1918 को म्वेज़ो, ईस्टर्न केप, दक्षिण अफ़्रीका संघ में हुआ था। इनके पिता गेडला हेनरी म्फ़ाकेनिस्वा, म्वेजो कस्बे के जनजातीय सरदार थे। हेनरी की तीसरी पत्नी नेक्यूफी नोसकेनी की कोख़ से ही मंडेला का जन्म हुआ। नेल्सन मंडेला, हेनरी के 13वीं सन्तानों में से तीसरे थे। स्थानीय भाषा में सरदार के बेटे को मंडेला कहते थे।
जिससे उन्हें अपना उपनाम मिला। मंडेला के पिता उन्हें ‘रोलिह्लला’ नाम से पुकारते थे, जिसका अर्थ ‘उपद्रवी’ होता हैं। इनकी माता एक मेथोडिस्ट थी। मंडेला ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल से पूरी की। उसके बाद की स्कूली शिक्षा मेथोडिस्ट मिशनरी स्कूल से ली। मंडेला जब 12 वर्ष के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी। इसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। लॉ फर्म में क्लर्क की नौकरी कर उन्होंने अपने परिवार का भरण-पोषण किया।
राजनीतिक जीवन Political life
देश की मौजूदा स्थिति को देखकर नेल्सन मंडेला ने सन् 1941 में जोहान्सबर्ग चले गए। जहाँ इनकी मुलाकात वॉल्टर सिसुलू और वॉल्टर एल्बरटाइन से हुई, जिनसे प्रभावित होकर देश मे होने वाले रंग के आधार पर भेदभाव को दूर करने के लिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा। देशहित की लड़ाई के दौरान ही वे धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय होते चले गए। सन् 1944 में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गए, जो रंगभेद के विरुद्ध आन्दोलन करती थीं। इसी वर्ष उन्होंने एक अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की। बाद में उसी लीग के सचिव चुनें गये। सन् 1961 में मंडेला और उनके कुछ मित्रों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा चला परन्तु उसमें उन्हें निर्दोष माना गया।best stories in the world
5 अगस्त 1962 को गिरफ्तार होने के बाद सन् 1964 में बहुचर्चित ‘रिवोनिया’ मुकदमे में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई। साढ़े सत्ताईस साल का कारावास भी उनके बुलंद इरादों और संकल्पशक्ति को कैद न कर सका बल्कि उनके आत्मबल ने लोहे की सलाखों को भी पिघला दिया। जेल की चहारदीवारी के भीतर जैसे-जैसे मंडेला की उम्र बूढ़ी होती गई, उनके इरादे और दक्षिण अफ्रीका का स्वतंत्रता आंदोलन जवान होता गया।best stories in the world
जीवन के 27 वर्ष कारागार में बिताने के बाद अन्ततः 11 फ़रवरी 1990 को मड़ेला की रिहाई हुई। रिहाई के बाद सन् 1990 में ही श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नये दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। वे दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्व में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गये। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने उनके जन्म दिन को नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसी वर्ष भारत ने उन्हे देश के सर्वोच्च पुरस्कार भारतरत्न से सम्मानित किया। मंडेला, भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी हैं। 10 मई 1994 को मंडेला अपने देश के सर्वप्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बने। नवम्बर 2009 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रंगभेद विरोधी संघर्ष में उनके योगदान के सम्मान में उनके जन्मदिन (18 जुलाई) को ‘मंडेला दिवस’ घोषित किया।
वैवाहिक जीवन Married life
सन् 1944 में अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने अपने मित्र व सहयोगी वॉल्टर सिसुलू की बहन एवलीस मेस से विवाह किया। नेल्सन मंडेला ने तीन शादियाँ की थी। सन् 1958 में अपनी पहली पत्नी को तलाक देने के बाद उन्होंने सन् 1961 मेंनोमजामो विनी मेडीकिजाला से विवाह किया। जिन्होंने मंडेला को देशद्रोह के आरोप में हुई जेल से छुड़ाने में अहम भूमिका अदा की थी। सन् 1998 में अपने 80वें जन्मदिन पर उन्होंने ग्रेस मेकल से विवाह किया। तीनों पत्नियों से मंडेला को 6 सन्ताने प्राप्त हुई। उनके परिवार में 17 पोते-पोती थीं।
मृत्यु Death
दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला की मृत्यु 5 दिसम्बर 2013 को फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण हॉटन, जोहान्सबर्ग में स्थित अपने घर पर हुई। उनकी मृत्यु की घोषणा सर्वप्रथम राष्ट्रपति जेकब ज़ूमा ने की।
पुरस्कार एवं सम्मान Awards
नेल्सन मंडेला को “लोकतन्त्र के प्रथम संस्थापक”, “राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उद्धारकर्ता” के रूप में देखा जाता था। दक्षिण अफ्रीका के लोग महात्मा गाँधी की तरह उन्हें भी “राष्ट्रपिता” का दर्जा देते थे। 2004 में जोहन्सबर्ग में स्थित सैंडटन स्क्वायर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति स्थापित की गयी उसके बाद सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर रख दिया गया। दक्षिण अफ्रीका में प्रायः उन्हें मदीबा कह कर बुलाया जाता था जो बुजुर्गों के लिये एक सम्मान-सूचक शब्द है। 67 साल तक मंडेला का रंगभेद के आन्दोलन से जुड़े होने के उपलक्ष्य में लोगों से दिन के 24 घण्टों में से 67 मिनट दूसरों की मदद करने का आग्रह किया गया।
सन् 1993 में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति फ़्रेडरिक विलेम डी क्लार्क के साथ उन्हें भी संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मंडेला को विश्व के विभिन्न देशों और संस्थाओं द्वारा भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जैसे सन् 1990 में भारत रत्न, 23 जुलाई 2008 को गाँधी शांति पुरस्कार, निशान-ए–पाकिस्तान, ऑर्डर ऑफ़ लेनिन, प्रेसीडेंट मैडल ऑफ़ फ़्रीडम आदि।
विचारधाराएँ Thoughts
नेल्सन मंडेला के कुछ महान विचार –
- मैं जातिवाद से बहुत नफरत करता हूँ, मुझे यह बर्बरता लगती है। फिर चाहे वह अश्वेत व्यक्ति से आ रही हो या श्वेत व्यक्ति से।
- अगर आप एक आदमी से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझता है, तो वह उसके दिमाग में जाती है। वही अगर आप उसकी अपनी भाषा में बात करते हैं तो वह उसके दिल में उतरतीं है।best stories in the world
- विशेष रूप से जब आप जीत का जश्न मनाते हो और जब कभी अच्छी बातें होती है, तब आपको दूसरों को आगे रखकर पीछे से नेतृत्व करना चाहिए और जब भी ख़तरा हो आपको आगे की लाइन में आना चाहिये। तब लोग आपके नेतृत्व की सराहना करेंगे।
- भले ही आपको कोई बीमारी हो तो तब आप बैठकर मूर्ख की तरह उदास मत हो जाओ। जीवन का भरपूर आनंद लें और आपको जो बीमारी लगी है उसे चुनौती दें।
- जब पानी उबलना शुरू होता है, उस समय ताप को बंद करना मूर्खता है।
- अगर आप अपने दुश्मन के साथ शांति बनाना चाहते हैं, तो आपको अपने दुश्मन के साथ काम करना होगा। तब वह आपका साथी बनेगा।
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| 5. बिल गेट्स |
बिल गेट्स का परिवार -
बिल गेट्स का वास्तविक तथा पूर्ण नाम विलियम हेनरी गेट्स है। इनका जन्म 28 अक्टूबर, 1955 को वाशिंगटन के सिएटल में हुआ। इनके परिवार में इनके अतिरिक्त चार और सदस्य थे – इनके पिता विलियम एच गेट्स जो कि एक मशहूर वकील थे, इनकी माता मैरी मैक्सवेल गेट्स जो प्रथम इंटरस्टेट बैंक सिस्टम और यूनाइटेड वे के निदेशक मंडल कि सदस्य थी तथा इनकी दो बहनें जिनका नाम क्रिस्टी और लिब्बी हैं। बिल गेट्स ने अपने बचपन का भी भरपूर आनंद लिया तथा पढ़ाई के साथ वह खेल कूद में भी सक्रिय रूप से भाग लेते रहे।बिल गेट्स को किसी परिचय कि आवश्यकता नहीं है, वह पूरी दुनिया में अपने कार्यों से जाने जाते हैं। हम सभी यह भली भांति जानते हैं कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ Software Company “Microsoft” की नींव भी बिल गेट्स के द्वारा ही रखी गयी है।
बिल गेट्स का बचपन -
उनके माता – पिता उनके लिए क़ानून में करियर बनाने का स्वप्न लेकर बैठे थे परन्तु उन्हें बचपन से ही कंप्यूटर विज्ञान तथा उसकी प्रोग्रामिंग भाषाओं में रूचि थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लेकसाइड स्कूल में हुई। जब वह आठवीं कक्षा के छात्र थे तब उनके विद्यालय ने ऐएसआर – 33 दूरटंकण टर्मिनल तथा जनरल इलेक्ट्रिक (जी।ई।) कंप्यूटर पर एक कंप्यूटर प्रोग्राम खरीदा जिसमें गेट्स ने रूचि दिखाई। तत्पश्चात मात्र तेरह वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला कंप्यूटर प्रोग्राम लिखा जिसका नाम “टिक-टैक-टो” (tic-tac-toe) तथा इसका प्रयोग कंप्यूटर से खेल खेलने हेतु किया जाता था। बिल गेट्स इस मशीन से बहुत अधिक प्रभावित थे तथा जानने को उत्सुक थे कि यह सॉफ्टवेयर कोड्स किस प्रकार कार्य करते हैं।best stories in the world
कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के प्रति बिल गेट्स की लगन -
इसके पश्चात गेट्स डीईसी (DEC), पीडीपी (PDP), मिनी कंप्यूटर नामक सिस्टमों में दिलचस्पी दिखाते रहे, परन्तु उन्हें कंप्यूटर सेंटर कॉरपोरेशन द्वारा ऑपरेटिंग सिस्टम में हो रही खामियों के लिए 1 महीने तक प्रतिबंधित कर दिया गया। इसी समय के दौरान उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर सीसीसी के सॉफ्टवेयर में हो रही कमियों को दूर कर लोगों को प्रभावित किया तथा उसके पश्चात वह सीसीसी के कार्यालय में निरंतर जाकर विभिन्न प्रोग्रामों के लिए सोर्स कोड का अध्ययन करते रहे और यह सिलसिला 1970 तक चलता रहा। इसके पश्चात इन्फोर्मेशन साइंसेस आइएनसी। लेकसाइड के चार छात्रों को जिनमें बिल गेट्स भी शामिल थे, कंप्यूटर समय एवं रॉयल्टी उपलब्ध कराकर कोबोल (COBOL), पर एक पेरोल प्रोग्राम लिखने के लिए किराए पर रख लिया।इसके पश्चात उन्हें रोकना नामुमकिन था। मात्र 17 वर्ष कि उम्र में उन्होंने अपने मित्र एलन के साथ मिलकर ट्राफ़- ओ- डाटा नामक एक उपक्रम बनाया जो इंटेल 8008 प्रोसेसर (Intel 8008 Processor) पर आधारित यातायात काउनटर (Traffic Counter) बनाने के लिए प्रयोग में लाया गया। 1973 में वह लेकसाइड स्कूल से पास हुए तथा उसके पश्चात बहु- प्रचलित हारवर्ड कॉलेज में उनका दाखिला हुआ।
परन्तु उन्होंने 1975 में ही बिना स्नातक किए वहाँ से विदा ले ली जिसका कारण था उस समय उनके जीवन में दिशा का अभाव। उसके पश्चात उन्होंने Intel 8080 चिप बनाया तथा यह उस समय का व्यक्तिगत कंप्यूटर के अन्दर चलने वाला सबसे वहनयोग्य चिप था, जिसके पश्चात बिल गेट्स को यह एहसास हुआ कि समय द्वारा दिया गया यह सबसे उत्तम अवसर है जब उन्हें अपनी स्वयं कि कंपनी का आरम्भ करना चाहिए।best stories in the world
माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का उत्थान -
MITS (Micro Instrumentation and Telemetry Systems) जिन्होंने एक माइक्रो कंप्यूटर का निर्माण किया था, उन्होंने गेट्स को एक प्रदर्शनी में उपस्थित होने कि सहमती दी तथा गेट्स ने उनके लिए अलटेयर एमुलेटर (Emulator) निर्मित किया जो Mini Computer और बाद में इंटरप्रेटर में सक्रिय रूप से कार्य करने लगा। इसके बाद बिल गेट्स व् उनके साथी को MITS के अल्बुकर्क स्थित कार्यालय में काम करने कि अनुमति दी गयी। उन्होंने अपनी जोड़ी का नाम Micro-Soft रखा तथा अपने पहले कार्यालय कि स्थापना अल्बुकर्क में ही की।26 नवम्बर, 1976 को उन्होंने Microsoft का नाम एक व्यापारिक कंपनी के तौर पर पंजीकृत किया। Microsoft Basic कंप्यूटर के चाहने वालों में सबसे अधिक लोकप्रिय हो गया था। 1976 में ही Microsoft MITS से पूर्णत: स्वतंत्र हो गया तथा Gates और Allen ने मिलकर कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा Software का कार्य जारी रखा।
इनसे बाद Microsoft ने अल्बुकर्क में अपना कार्यालय बंद कर बेलेवुए, वाशिंगटन में अपना नया कार्यालय खोला। Microsoft ने उन्नति की ओर बढ़ते हुए प्रारंभिक वर्षों में बहुत मेहनत व् लगन से कार्य किया। गेट्स भी व्यावसायिक विवरण पर भी ध्यान देते थे, कोड लिखने का कार्य भी करते थे तथा अन्य कर्मचारियों द्वारा लिखे गए व् जारी किये गए कोड कि प्रत्येक पंक्ति कि समीक्षा भी वह स्वयं ही करते थे।
इसके बाद जानी मानी कंपनी IBM ने Microsoft के साथ काम करने में रूचि दिखाई, उन्होंने Microsoft से अपने पर्सनल कंप्यूटर के लिए बेसिक इंटरप्रेटर बनाने का अनुरोध किया। कई कठिनाइयों से निकलने के बाद गेट्स ने Seattle कंप्यूटर प्रोडक्ट्स के साथ एक समझौता किया जिसके बाद एकीकृत लाइसेंसिंग एजेंट और बाद में 86-DOS के वह पूर्ण आधिकारिक बन गए और बाद में उन्होंने इसे आईबीएम को $80,000 के शुल्क पर PC-DOS के नाम से उपलब्ध कराया। इसके पश्चात Microsoft का उद्योग जगत में बहुत नाम हुआ।
1981 में Microsoft को पुनर्गठित कर बिल गेट्स को इसका चेयरमैन व् निदेशक मंडल का अध्यक्ष बनाया गया। जिसके बाद Microsoft ने अपना Microsoft Windows का पहला संस्करण पेश किया। 1975 से लेकर 2006 तक उन्होंने Microsoft के पद पर बहुत ही अदभुत कार्य किया, उन्होंने इस दौरान Microsoft कंपनी के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
बिल गेट्स का विवाह व् आगे का जीवन -
1994 में बिल गेट्स का विवाह फ्रांस में रहने वाली Melinda से हुआ तथा 1996 में इन्होंने जेनिफर कैथेराइन गेट्स को जन्म दिया। इसके बाद मेलिंडा तथा बिल गेट्स के दो और बच्चे हुए जिनके नाम रोरी जॉन गेट्स तथा फोएबे अदेले गेट्स हैं। वर्तमान में बिल गेट्स अपने परिवार के साथ वाशिंगटन स्थित मेडिना में उपस्थित अपने सुन्दर घर में रहते हैं, जिसकी कीमत 1250 लाख डॉलर है।
बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन का उदय -
वर्ष 2000 में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशनकी नींव रखी जो कि पारदर्शिता से संचालित होने वाला विश्व का सबसे बड़ा Charitable फाउंडेशन था। उनका यह फाउंडेशन ऐसी समस्याओं के लिए कोष दान में देता था जो सरकार द्वारा नज़रअंदाज़ कर दी जाती थीं जैसे कि कृषि, कम प्रतिनिधित्व वाले अल्पसंख्यक समुदायों के लिये कॉलेज छात्रवृत्तियां, एड्स जैसी बीमारियों के निवारण हेतु, इत्यादि।
परोपकारी कार्य -
सन 2000 में इस फाउंडेशन ने Cambridge University को 210 मिलियन डॉलर गेट्स कैम्ब्रिज छात्रवृत्तियों हेतु दान किये। वर्ष 2000 तक बिल गेट्स ने 29 बिलियन डॉलर केवल परोपकारी कार्यों हेतु दान में दे दिए। लोगों की उनसे बढती हुई उम्मीदों को देखते हुए वर्ष 2006 में उन्होंने यह घोषणा की कि वह अब Microsoft में अंशकालिक रूप से कार्य करेंगे और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में पूर्णकालिक रूप से कार्य करेंगे। वर्ष 2008 में गेट्स ने Microsoft के दैनिक परिचालन प्रबंधन कार्य से पूर्णतया विदा ले ली परन्तु अध्यक्ष और सलाहकार के रूप में वह Microsoft में विद्यमान रहे।![]() |
| 6. अल्बर्ट आइंस्टीन |
अल्बर्ट आइंस्टीन दुनिया के महान वज्ञानिक और थ्योरिटिकल भौतिकवादी थे। आइंस्टीन पूरे विश्व में द्रव्मान और ऊर्जा के समीकरण E= mc2 और सपेक्षता के सिध्दांत के लिये प्रसिद्ध थे। ये समीकरण अल्बर्ट आइंस्टीन के सबसे प्रसिद्ध समीकरणों में से एक था। इन्होने अपने जीवन में बहुत से खोज किये। उनके कुछ अविष्कार पुरे दुनिया में बहुत फेमस हुआ जिनके वजह से अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हो गया। आइंस्टीन एक बुद्धिमान और सफल वज्ञानिक रहे है।best stories in the world
धुनिक समय के भौतिक विज्ञान को सरल बनाने में इनका बहुत बड़ा हाथ रहा है। अल्बर्ट आइंस्टीन को 1921 में प्रकाश विधुत उत्सर्जन की खोज के लिए इनका नोबेल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। आइंस्टीन ने बहुत से खोज में अपना योगदान दिया है जैसे – सापेक्ष ब्राम्हण, क्वांटम सिद्धांत, अणुओ की ब्राउनियन गति, विकिरण का सिद्धांत और अन्य बहुत से खोज में अपना योगदान दिया है।
इन्होने 50 से अधिक शोध पत्र और विज्ञानं की अलग अलग किताबे भी लिखी है जिसकी वजह से 1999 में टाइम्स पत्रिका में इनको शताब्दी पुरुष घोषित किया गया और एक सर्वे के अनुसार ये सार्वकालिक महानतम वज्ञानिक मने गए है। इनकी बौद्धिक उपयोगितो को देखते हुए आइंस्टीन शब्द को बुद्धिमान का पर्याय बना दिया गया है।
- नाम – अल्बर्ट हेर्मन्न आइंस्टीन
- जन्म – 14 मार्च 1879
- स्थान – उल्मा (जर्मनी)
- पिता – हेर्मन्न आइंस्टीन
- माता – पौलिन कोच
- पुरस्कार – भौतिक का नोबेल पुरस्कार, मैक्स प्लैंक पदक, कोल्पे पदक
- मृत्यु – 18 अप्रैल 1955
प्रारंभिक जीवन Earlier Life
विश्वप्रसिद्ध अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के एक यहूदी परिवार में वुटेमबर्ग नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता का नाम हेर्मन्न आइंस्टीन जोकि पेशे से एक इंजीनियर और सेल्समैन थे। इनकी माता का नाम पौलिन कोच था। आइंस्टीन बचपन से पढाई में अव्वल थे लेकिन बचपन में आइंस्टीन को बोलने में थोड़ी दिक्कत होती थी।इनकी मात्रभाषा जर्मन थी लेकिन बाद में इन्होने अंगेजी और इतालवी भी सीखी। इनका जन्म तो जर्मनी के उल्म शहर में हुआ लेकिन इनका परिवार 1880 में म्यूनिख शहर चला गया। वहीँ पर इन्होने अपनी पढाई शुरू की। आइंस्टीन पिता और उनके चाचा ने म्यूनिख शहर में एक कंपनी खोली जिसका नाम “इलेक्ट्राटेक्निक फ्रैबिक जे आइंस्टीन एंड सी” (Elektrotechnische Fabrik J.Einstein & Cie) था, जोकि बिजली के उपकरण बनती थी।
शिक्षा Education
अल्बर्ट आइंस्टीन का परिवार यहूदी धर्म को मानते थे और जिसकी वजह से आइंस्टीन को पढने के लिए कैथोलिक विद्यालय में जाना पड़ा। आइंस्टीन की माँ को सारंगी बजाना आता था। इन्होने अपनी माँ से सारंगी बजाना सिखा लेकिन बाद में इन्होने इसे बजन छोड़ दिया। बाद में 8 साल की उम्र में आइंस्टीन वहां से स्थान्तरित होकर लुइटपोल्ड जिम्रेजियम चले गए। best stories in the world जहाँ से आइंस्टीन ने अपनी माध्यमिक शिक्षा और उच्च माध्यमिक शिक्षा भी प्राप्त की। सन 1895 में आइंस्टीन ने स्विस फ़ेडरल पोलिटेक्निक की परिक्षा दी, जो बाद में Edigenossische Technische Hochschule (ETH) के नाम से जाना जाने लगा। उस वक़्त इनकी उम्र 16 साल थी। लेकिन गणित और भौतिक के विषय को छोड़ कर बाकि सभी विषयों में फेल हो गये थे। और अंत में वहां से प्रधानाचार्य के सलाह पर वो स्विट्जर्लैंड के आरू में आर्गोवियन कैंटोनल स्कूल में चले गये। यहाँ से आइंस्टीन ने डिप्लोमा किया और उसके बाद इन्होने 1896 में इन्होने फेडरल इंस्टिटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी में दाखिला लिया।
सन 1900 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने फेडरल इंस्टिटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी से ग्रेजुएशन किया। सन 1902 में इन्होने मरिअक से शादी कर ली। मरिअक उनकी साथ में ही पढ़ती थी और प्यार के कारण इन्होने उनसे शादी कर ली। शादी के बाद इनके 2 बेटे हुए। आइंस्टीन ने वहां से ही डाक्टरेट की उपाधि भी ली और अपना पहला विज्ञानं दस्तावेज लिखा।
अल्बर्ट आइंस्टीन का करियर और उनकी खोज (Invention and Career)
अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी डाक्टरेट लेने के बाद इन्होने बहुत से विज्ञानं दस्तावेज लिखा जिसकी वजह से ये बहुत ही प्रसिद्ध हुए। यूनिवर्सिटी में जॉब करने के लिए इन्होने बहुत मेहनत किया। और सन 1909 में ये बर्न यूनिवर्सिटी के लेक्चरर बन गये। कुछ दिन के इन्होने 2 और यूनिवर्सिटी में प्राचार्य के रूप में काम किया और कुछ ही दिनों में फेडरल इंस्टिटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी में प्राचार्य बनाये गए। सन 1913 में मैक्स प्लांक और वाल्थेर नेंस्र्ट के द्वारा दिए गए अवसर पर आइंस्टीन बर्लिन चले गए। जिसकी वजह से इनका तलाक हो गया। बर्लिन जाने के बाद इन्होने एलसा नाम के लड़की से शादी कर ली।
अल्बर्ट आइंस्टीन के अविष्कार Inventions of Albert Einstein
अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने जीवन में बहुत से अविष्कार किये है जिनकी वजह से वो पूरे विश्व में प्रसिद्ध हुए। उनके कुछ खोज इस प्रकार है-- E= mc2
- स्पेशल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी
- प्रकाश की क्वांटम थ्योरी
- रेफिजरेटर की खोज
- आकाश नीला क्यों होता है?
इनके द्वारा और भी बहुत से खोज की गई है जिनकी वजह से ये पुरे विश्व में प्रसिद्ध हो गये।
पुरस्कार Awards
अल्बर्ट आइंस्टीन ने बहुत से खोज किये और जिसकी वजह से उनको कई सरे पुरस्कार से नवाजा भी गया है सबसे पहला 1921 भौतिकी का नोबेल पुरस्कार, मत्तयूक्की मेडल, 1925 में कोपले मैडल, सन 1929 में मैक्स प्लांक मेडल मिला और 1999 में शताब्दी के टाइम पर्सन का पुरस्कार भी मिला।
मृत्यु Death
हिटलर के समय में अल्बर्ट आइंस्टीन को जर्मनी छोड़ कर जाना पड़ा क्योकि ये यहूदी थे। कुछ सालो तक अमेरिका में प्रिस्टन कालेज में कार्य करते हुए 18 अप्रैल सन 1955 में इनकी मृत्यु हो गई। दुनिया के महान वैज्ञानिक जिन्होंने अपने ज्ञान से दुनिया को बहुत कुछ दिया, और उनकी खोज को कभी भी भुलाया नही जा सकता है।![]() |
| 7. स्टीफन हॉकिंग |
प्रारंभिक जीवन Early Life
स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुआ था। उनका परिवार लंदन से ऑक्सफोर्ड चले गए थे। एक बच्चे के रूप में, उन्होंने असाधारण प्रतिभा और अपरंपरागत अध्ययन विधियों को दिखाया।
शिक्षा Education
स्कूल छोड़ने पर, उन्हें यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में जगह मिली जहां उन्होंने भौतिकी का अध्ययन किया। ऑक्सफोर्ड, रॉबर्ट बर्मन में उनके भौतिकी के शिक्षक ने बाद में कहा कि स्टीफन हॉकिंग एक असाधारण छात्र थे।great inspiration
भौतिकी में एक बीए होनोर्स प्राप्त करने पर, उन्होंने संक्षेप में खगोल विज्ञान का अध्ययन करने के लिए रुके थे, लेकिन वे ट्रीनिटी कॉलेज, कैंब्रिज में चले गए, जहां वे सैद्धांतिक खगोल विज्ञान और ब्रह्माण्ड विज्ञान के लिए अपने जुनून को आगे बढ़ाने में सक्षम थे ।great inspiration
उनकी बीमारी His illness
यह कैम्ब्रिज में था कि स्टीफन हॉकिंग के शरीरी में न्यूरो-पेशी समस्याओं के लक्षण विकसित शुरू हुए। मोटर न्यूरॉन रोग एक प्रकार का रोग होता है जिसमे जल्दी से शारीरिक गतिविधियों बंद होने लगती है। उनका बोलना-चलना बंद हो गया, और वह खुद को हिलाने में असमर्थ हो गये। एक स्तर पर, डॉक्टरों ने उन्हें तीन साल का जीवन काल दे दिया था।
हालांकि, रोग की प्रगति धीमा हो गई है, और उन्होंने अपने अनुसंधान और सक्रिय सार्वजनिक कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए अपनी गंभीर विकलांगता को दूर करने में कामयाबी हासिल की है। कैम्ब्रिज में, एक साथी वैज्ञानिक ने एक कृत्रिम भाषण उपकरण विकसित किया जिसने उसे एक टचपैड का उपयोग करके बोलने दिया।
यह प्रारंभिक सिंथेटिक भाषण ध्वनि स्टीफन हॉकिंग की ‘आवाज’ बन गई है, और परिणामस्वरूप, उन्होंने इस शुरुआती मॉडल की मूल ध्वनि को रखा है – तकनीकी प्रगति के बावजूद। फिर भी, नवीनतम तकनीक के बावजूद, यह अभी भी उसके लिए संचार करने के लिए एक समय लेने वाली प्रक्रिया हो सकती है। स्टीफन हॉकिंग ने अपनी विकलांगता के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण लिया है। उन्होंने कभी भी अपने रोग को अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया।सैद्धांतिक ब्रह्माण्ड विज्ञान और क्वांटम ग्रेविटी में स्टीफन हॉकिंग के प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।great inspiration
मुख्य कार्य Major Works
कई अन्य उपलब्धियों में, उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत के लिए गणितीय मॉडल विकसित किया। उन्होंने ब्रह्माण्ड, बिग बैंग और ब्लैक होल की प्रकृति पर बहुत काम किया। 1974 में, उन्होंने अपने सिद्धांत को रेखांकित किया कि ब्लैक होल ऊर्जा रिसाव करते हैं और कुछ भी नहीं दर हो जाती हैं यह 1974 में “हॉकिंग विकिरण” के रूप में जाना जाता है। गणितज्ञों रोजर पेनरोस के साथ उन्होंने दिखाया कि आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का अर्थ है अंतरिक्ष और समय बिग बैंग में शुरू होगा और काला छेद(ब्लैक होल) में अंत होगा।
अपनी पीढ़ी के सबसे अच्छे भौतिकविदों में से एक होने के बावजूद, वह सामान्य भौतिकी मॉडल को आम जनता के लिए एक सामान्य समझ में अनुवाद करने में सक्षम हो गए। उनकी पुस्तकों – समय का एक संक्षिप्त इतिहास और एक संक्षिप्त में ब्रह्मांड दोनों बहुत मशहूर बन गए हैं – 230 दिनों से अधिक समय के लिए अधिग्रहण सूची में रहने वाले एक संक्षिप्त इतिहास के साथ-साथ 10 मिलियन से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। अपनी पुस्तकों में, हॉकिंग हर रोज़ भाषा में वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने की कोशिश करता थे और ब्रह्मांड के पीछे कार्य करने के लिए एक सिंहावलोकन देते थे।
स्टीफन हॉकिंग अपनी पीढ़ी के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में से एक बन गए । वह बार-बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में काम करते थे और अपने कार्यक्रमों से लोकप्रिय मीडिया संस्कृति में खुद को चित्रित करते थे, जैसे कि ‘द सिम्पसन्स टू स्टार ट्रेक’। 1990 के दशक के अंत में, उन्हें कथित रूप से एक नाइटहुड की पेशकश की गई थी, लेकिन 10 साल बाद उन्होंने यह साबित कर दिया कि उन्होंने विज्ञान के लिए सरकार के वित्त पोषण के साथ मुद्दों पर इसे बदल दिया था।
उन्होंने 1965 में एक भाषा के छात्र जेन वाइल्ड से शादी की। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक वास्तविक मोड़ था जब वे अपनी बीमारी के कारण मौत के साथ थे। बाद में उन्होंने तलाक दे दिया लेकिन उनके तीन बच्चे थे।
मृत्यु Death
स्टीफन हॉकिंग का कैम्ब्रिज में अपने घर पर 14 मार्च 2018 को निधन हो गया।
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| 8. जैक मा |
जैक मा का प्रारंभिक जीवन
जैक मा जन्म 10 सितम्बर, 1964 को चीन के एक छोटे से गाँव हन्ग्ज़्हौ में हुआ था। जैक मा के माता पिता पारंपरिक गाने गा और बजा कर काम किया करते था। जैक मा को बचपन से ही अंग्रेजी सिखने की बहुत इच्छा थी इसलिए वो Hangzhou International Hotel एक साइकिल से जाते थे जहाँ बड़े-बड़े विदेशी नागरिक आते थे।जैक मा अंग्रेजी सिखने के लिए उन लोगों से पहले अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी में बात किया करते थे। चीन में अंग्रेजी भाषा को उतना ज़रूरी नहीं माना जाता था। परन्तु जब जैक मा ने कुछ अच्छी अंग्रेजी बोलना सिख लिया तो उन्होने दुसरे देशों से आपने वाले विदेशी लोगों के लिए एक टूरिस्ट गाइड के रूप में काम किया। ऐसा करते-करते उनका अंग्रेजी बहुत अच्छा हो गया। उन्होंने यह काम लगभग 9 वर्ष तक किया। जैक मा ने Hangzhou Institute of Electronic Engineering में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में भी काम किया था।
टूरिस्ट गाइड का काम करते-करते उनका एक अच्छा विदेशी मित्र बना। जैक मा का असली नाम मा यूँ था पर चीनी भाषा में इसे बोलना बहुत ही मुश्किल था इसलिए उस विदेशी मित्र ने उनका नाम जैक मा रख दिया तब से उनको जैक के नाम से जाना आने लगा। उसके बाद जैक माँ ने नौकरी ढूँढना शुरू किया।great inspiration
जैक मा का संगर्ष
जैक मा 30 से भी ज्यादा नौकरियों के लिए कोशिश किया पर उन्हें हर जगह से बस नाकामी ही मिली। उन्होंने एक बार पुलिस की नौकरी के लिए कोशिश किया पर उन्हें देखते ही मना कर दिया गया। जब पहली बार KFC का Restaurant उनके शहर में पहली बार खुला तो उन्होंने KFC में भी नौकरी के लिए Try किया पर वहां जिन 24 लोग नौकरी के लिए गए थे उनमें से 23 लोगों को नौकरी मिल गयी लेकिन एक मात्र उन्हें नहीं मिली। इससे यह पता चलता है की उनका जीवन कितना संगर्ष पूर्ण था।जैक मा गए अमरीका Jack Ma’s goes first time to USA in 1995great inspiration
जैक मा ने 1994 में पहली बार इन्टरनेट के विषय में सुना। जैक मा 1995 में अपने दोस्तों की मदद से इन्टरनेट के विषय में जानकारी लेने के लिए अमरीका गए। अमरीका में उन्होंने पहली बार इन्टरनेट देखा और चलाया। उन्होंने इन्टरनेट पर सबसे पहले Bear शब्द को Search किया, वहां उन्हें Bear शब्द के बारे में अन्य-अन्य websites से कई प्रकार की जानकारी मिली। उन्होंने जब अच्छे से ध्यान दिया तो देखा की इन्टरनेट पर चीनी भाषा में इसके विषय में कोई जानकरी नहीं है और इस प्रकार उनके दिमागे में एक आईडिया सुझा।
यहाँ तक की उन्होंने चीन देश के विषय में भी इन्टरनेट पर search किया जिसके विषय में भी internet पर उनको search करने पर ज्यादा कुछ नहीं मिला। अपने देश की जानकारी इन्टरनेट पर न पा कर जैक बहुत दुखी हुए क्योंकि उन्हें लगा की अन्य देशों के मुकाबले टेक्नोलॉजी क्षेत्र में चीन बहुत पीछे है। great inspiration
जैक मा ने चीन की जानकारी की पहली वेबसाइट बने Jack Ma created first about China Website on Internet
जैक मा और उनके अमरीकी मित्र ने मिलकर चीन की जानकारी से भरा हुआ अपना एक पहला वेबसाइट बनाया वेबसाइट। बनाने के कुछ ही घंटों के अन्दर जैक मा को कुछ चीनी लोगों के ईमेल आने लगे। यह देख कर जैक मा को इन्टरनेट की ताकत का पता चला। best person
उसी वर्ष 1995 में जैक मा उनकी पत्नी और क्कुह दोस्तों ने मिलकर कुछ पैसे जमा किये और एक वेबसाइट बनाने की कंपनी शुरू की थी जिसका नाम उन्होंने रखा China Yellow Pages. इस कंपनी को शुरू करने के लिए सभी दोस्तों ने मिल कर लगभग 20000$ जमा किये थे। इस कंपनी का मुख्य काम था दूसरी कंपनियों के लिए वेबसाइट बनाना। 3 साल के अन्दर उसी कंपनी को 3 लाख $ का मुनाफा हुआ और जैक और उनकी टीम ने उसके बाद चीन की कंपनियों के लिए भी वेबसाइट बनाना शुरू किया।
जैक मा का कहना था की जब वे अपने दोस्तों के साथ वेबसाइट का काम करते थे तो उन्हें टीवी और ताश खेलना पड़ता था। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय का इन्टरनेट स्पीड इतना स्लो हुआ करता था की अधा पेज बनाने में 3.5 घंटे लग जाते थे। जैक मा ने अपने 33 वर्ष की आयु में अपना पहला कंप्यूटर ख़रीदा था। 1998-1999 में China International Electronic Commerce Center द्वारा स्थापित एक IT कंपनी में भी काम किया पर उसके बाद वे वहां से काम छोड़ कर अपने 17 दोस्तों की टीम के साथ दोबारा अपने जन्म स्थान Hangzhou लौट आये।
जैक मा ने अलीबाबा ग्रुप की शुरुवात की Jack Ma Started Alibaba Groups
उसके बाद जैक मा अपने घर बैठे अपने 17 दोस्तों के साथ मिलकर अपना पहला B to B eCommerce वेबसाइट की शुरुवात की थी। जैक मा कहते हैं वो San Fransisco के एक कॉफ़ी शॉप में बैठे थे। वैसे तो अपनी वेबसाइट का नाम वो Alibaba रखने का उनका मन पहले से ही था पर उन्होंने शॉप के एक Waitress से पुछा – क्या तुम अलीबाबा के विषय में जानते हो? तो जवाब आया खुल जा सिम-सिम। उसके बाद उन्होंने कई भारतीय, अमरीकी और अन्य देशों के लोगों से भी वही सवाल पुछा तो उन्होंने अपया कि सभी लोगों को Alibaba के विषय में पता था। बस उसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी को Alibaba Groups के नाम से शुरू किया। best personउसके बाद से Alibaba Groups ने पुरे विश्व में अपना नाम बना लिया और 240 देशों से भी ज्यादा देशों में इसका कारोबार शुरू हो गया। सितम्बर 2014 के आंकड़ों के अनुसार Alibaba कंपनी ने New York Stock Exchange के अनुसार 25 Billion $ की कंपनी खड़ी कर दी जो की एक बहुत बड़ी सफलता थी। 10 सितम्बर 2017 Forbes के Report के अनुसार जैक मा 17वें की कुल कमाई 37.6 Billion USD है।2017 के report के अनुसार आज इस कंपनी में 50000+ लोगकाम कर रहे हैं। Alibaba Groups के सभी सहायक कंपनियां – Alibaba.com, Guangzhou Evergrande Taobao F.C., Taobao, Tmall, UCWeb, AliExpress, Juhuasuan.com, 1688.com, Alimama.com, Ant Financial, Cainiao, Lazada, Youku Tudou, Alibaba Cloud
आज वो हम सब को एक प्रेरणा देते हैं और सिखाते हैं की चाहें जीवन में आपके जितनी भी मुश्कलें या असफलताएं आ जाएँ कभी भी हार नहीं मनना चाहिए क्योंकि बार-बार असफलता झेलने वाले व्यक्ति को ही सफकता मिलती।
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| 9. ब्रूस ली |
| ब्रूस ली का प्रारंभिक जीवन और कैरियर |
ब्रूस ली का जन्म 27 नवम्बर, 1940 को, सन फ्रांसिस्को, कैलिफ़ोर्निया में पिता ली होई छुएँ(Lee Hoi Chuen) और माता ग्रेस हो(Grace Ho) के घर हुआ। ब्रूस ली के पिता Lee Hoi Chuen होंग कोंग में ओपेरा सिंगर(Opera Singer) थे और ब्रूस ली को मिलाकर उनके कुल 4 संतान थे। Bruce Lee बचपन से ही होंग कांग में रहते थे और एक काबिल अभिनेता थे जो बाद में अमेरिका चले गए जहाँ उन्होंने मर्सिअल आर्ट्स सिखाया। best person
उन्होंने टेलीविज़न में भी अभिनय किया, उनकी कुछ जबरदस्त फ़िल्में और टीवी सीरियल के नाम हैं The Green Hornet (1966-67) ,Chinese Connection और Fists of Fury. उनकी फिल्म Enter the Dragon के बाद ही 20 जुलाई, 1973 को उनका निधन हो गया 32 वर्ष कि आयु में। उनका नाम ब्रूस(Bruce) उस हॉस्पिटल के नर्स नें रखा था जहाँ उनका जन्म हुआ हलाकि उनके शुरुवाती स्कूल में उनके इस नाम का उपयोग उनके माता पिता ने नहीं किया। Bruce ने अपने जीवन में 3 महीने की उम्र में पहली फिल्म में 1941 में काम किया जिसका नाम था Golden Gate Girl.
साल 1946 के शुरुवात तक ब्रूस ली कुल 20 फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में दिखे। उन्होंने अपने जीवन में नृत्य भी सिखा और Hong Kong के Cha-Cha कम्पटीशन को भी जीता साथ ही उनको उनकी कविताओं के लिए भी जाना जाता है।inspirational reL life story
जब ब्रूस ली किशोर थे तो उनके चीनी होने के कारण उन्हें ब्रिटिश लड़के ताना मारा करते थे। बाद में उन्होंने साल 1953 में कुंगफू मास्टर यिप मैन के संरक्षण में कुंफू की पूर्ण शिक्षा ली और बाद में वे अमरीका अपने परिवार के पास Seattle, Wasington चले गए। वहां उन्होंने नृत्य प्रशिक्षक के रूप में कार्य किया।
ब्रूस ली ने अपनी हाई स्कूल कि शिक्षा एडिसन, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन से पूरा किया। उनको एक नौकरी भी मिली थी जिसमे वे होंग कांग में सीखे हुए मार्शल आर्ट के विंग चुन स्टाइल का ट्रेनिंग दिया करते थे। इसी बिच उनकी मुलाकात लिंडा एमरी (Linda Emery) से हुई, जिससे 1964 में ली नें विवाह किया और उसके बाद उन्होंने सीएटल में स्वयं का मार्शल आर्ट स्कूल खोला।inspirational reL life story
बाद में वे Linda के साथ ओकलैंड और लोस एंजेलेस (Oakland and Los Angeles) गए जहाँ उन्होंने और 2 मर्तिअल आर्ट्स स्कूल खोले। उन्होंने अपना सबसे जबरदस्त स्टाइल जो खासकर सिखया उसका नाम है जीत कुने दो (Jeet Kune Do) या मुट्ठी को भेदने के तरीका (The Way of the Intercepting Fist). बाद में उनके 2 बच्चे भी हुए जिनके नाम हैं ब्रैंडन (Brandon) जिसका जन्म 1965 में हुआ, और शन्नों (Shannon), जिसका जन्म 1969 में हुआ।
अभिनेता के रूप में ब्रूस ली Bruce Lee as an Actor in Hindi
टीवी सीरियल The Green Hornet में कुल 26 एपिसोड में काम किया जिसमे वे अपने एक्रोबेटिक और फाइटिंग स्टाइल का प्रदर्शन किया। उन्होंने Ironside और Longsteet जैसे टीवी शो में गेस्ट अप्पीरिअंस भी दिया। वे कुंफू (Kung Fu) नमक एक टीवी शो में भी अपना आईडिया दिया परन्तु उसमे कार्य डेविड कार्रडाइन (David Carradine) ने किया था। 1971 में ब्रूस ली लोस एंजेलेस को छोड़ होंग कंग चले गए।
उनकी कुछ बॉक्स ऑफिस तोड़ देने वाली फिल्मे हैं – Fists of Fury जो 1971 के आखरी समय में रिलीज़ हुई थी। The Green Hornet जिसमे उन्होंने अपने जीत कुने दो कि काबिलियत को भी बखूबी दर्शाया है। वर्ष 1972 में The Chinese Connection फिल्म नें उनके पिछले फिल्मो को पीछे कर दिया बॉक्स ऑफिस में धमाल मचाते हुए लेकिन Critic लोगों कि वजह से अमेरिका में इसका बोल बाला थोडा ठंडा रहा। उनका सबसे बड़ा Hollywood प्रोजेक्ट रहा, Enter the Dragon फिल्म।
ब्रूस ली की रहस्यमय मौत
ब्रूस ली कि मौत ने लोगों को बड़ी ही अचम्भे में डाला था। इतने मशहूर मार्शल आर्ट ट्रेनी और सुपरस्टार की अचानक मौत नें सबको चिंता में दल दिया। 20 जुलाई 1973 को उनकी फिल्म Enter the Dragon के लांच से पहले ही 32 वर्ष कि उम्र में उनका निधन हो गया।
Officialy उनकी मौत का कारण दिमाग में सुजन बताया गया, जो पैन किलर दवाई के रिएक्शन के कारण हुआ था। कुछ लोगों का तो यह भी कहना था की उनका खून किया गया था।
- ब्रूस ली के विषय में 20 दिलचस्प तथ्य जो आप नहीं जानते
- ब्रूस ली ने अपनी अधिकतम फिल्मो में स्वयं अंग्रजी भाषा खुद कहा है।
- ब्रूस ली आधे तौर पर जर्मन थे क्योंकि उनके दादाजी 100% जर्मनी के थे।
- वे बहुत ही खतरनाक और जबरदस्त ड्राईवर थे।
- ब्रूस ली कि नज़र कमजोर थी।
- ब्रूस ली के परिवार वाले उन्हें लिटिल फ़ीनिक्स(Little Phoenix) के नाम से बुलाते थे।
- वे होंग कोंग के चा-चा नृत्य के चैंपियन रह चुके थे।
- ब्रूस ली एक दिन में 5000 पंच मार कर प्रैक्टिस करते थे।
- वे अपनी ऊँगली कि ताकत से टिन कैन में छेद कर देते थे।
- हलाकि ब्रूस ली नें पढाई के माध्यम से कराटे नहीं सिखा परन्तु तब भी वह कराटे सही तरीके से जानते थे।
- ब्रूस ली नें एक फिल्म के लिए कहानी भी लिखा था जिसका नाम थे “The Silent Flute” हलाकि यह फिल्म कभी शूट नहीं हो पाई।
- ब्रूस ली नें अपने जीवन में कई प्रसिद्ध लोगों को और हीरो-हीरोइने को भी मार्शल आर्ट सिखाया।
- कहा जाता है जब ब्रूस ली छोटे थे तो उन्हें मिरगी की प्रॉब्लम थी।
- ब्रूस ली नें अपने शारीर से पसीने निकलने वाली ग्रंथि को निकलवा दिया था।
- ब्रूस ली बहुत ही अच्छे स्केच आर्टिस्ट थे।
- ब्रूस ली नें बहुत सारी कवितायेँ भी लिखी थी।
- ब्रूस ली को The Times Magazine वालों नें टॉप 100, 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में रखा था।
- ब्रूस ली नें कहा था कि उनके पिता उनके सबसे पहले मार्शल आर्ट्स के गुरु थे।
- ब्रूस ली के घर में 2000 किताबों की लाइब्रेरी थी।
- ब्रूस ली को तैरना नहीं आता था ऐसा उनके भाई रोबर्ट का कहना था।
ब्रूस ली का सबसे मशहूर उद्धरण जो उन्होंने कहा था : If I should die tomorrow, I will have no regrets. I did what I wanted to do. You can’t expect more from life. अगर में कल मर जाता हूँ, मुझे कोई दुख नहीं होगा। मैं जो जीवन में करना चाहता था वह कर चूका हूँ, आप जिंदगी से ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते।
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| 10. मुकेश अंबानी |
मुकेश अंबानी को भारत में सबसे धनी व्यक्तियों में से एक माना जाता है – 2014 में उन्हें फोर्ब्स द्वारा भारत के सबसे अमीर व्यक्ति और 2015 तक दुनिया के 39 वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में गिना जाने लगा। 2014 में, वह 40 वें स्थान पर थे। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक के सबसे बड़े शेयर होल्डर भी है जो कि भारत की एक निजी फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनी है। best inspiration
अनुमान है कि कंपनी में उनके 44.7% शेयर हैं। बाजार मूल्य के मामले में रिलायंस अग्रणी भारतीय कंपनियों में से एक है। वह मुंबई इंडियंस के मालिक भी हैं, जो इंडियन प्रीमियर लीग की एक टीम हैं। फोर्ब्स के अनुसार उनकी संपत्ति का मूल्य 22.2 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिससे वे हमारे भारत के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं, हालाँकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी हिस्सेदारी 48 % है।
प्रारंभिक जीवन और उनकी शिक्षा
मुकेश अंबानी की शुरूआती शिक्षा मुंबई के अबाय मोरिस्चा स्कूल में हुयी तथा उन्होंने कैमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री यूडीसीटी से प्राप्त की। बाद में मुकेश अंबानी एम बी ए करने के लिये स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय भी गए किन्तु पहले वर्ष के बाद ही उन्होंने अपनी पढ़ाई को छोड़ दिया। मुकेश अम्बानी का जन्म 19 अप्रैल, 1957 में यमन में स्थित अदेन शहर में हुआ था।inspirational reL life story
उनकी माँ का नाम कोकिलाबेन अंबानी था और पिता का नाम धीरुभाई अंबानी था, जो कि एक प्रसिद्ध उद्योगपति थे। इसके अलावा उनकी दो बहने भी है जिनका नाम दीप्ती सल्गओंकर और नीना कोठारी है। मुकेश अंबानी के एक छोटे भाई है, जिनका नाम अनिल अंबानी हैं। उनके पिता धीरुभाई अंबानी अदेन में ही काम करते थे। 1970 के दशक तक मुकेश अंबानी का परिवार मुंबई के भुलेश्वर में दो कमरों के एक मकान में गुजारा किया करता था पर कुछ सालों बाद धीरुभाई ने मुंबई के कोलाबा में एक 14 मंजिल ईमारत जिसका नाम (सी विंड) था उसको खरीद लिया जहाँ मुकेश अम्बानी परिवार के सभी अन्य सदस्य कई सालों तक वहां रहे।
व्यक्तिगत जीवन
मुकेश अंबानी ने नीता अंबानी से शादी किया हैं। उनकी एक बेटी है – ईशा अंबानी और दो बेटे है – आकाश अंबानी और अनंत अंबानी। वे वर्तमान में एंटीलिया (भवन) में रह रहे हैं, जो कि 27 मंजिला ईमारत हैं। घर की कीमत एक अरब डॉलर है और इसीलिये इसे दुनिया का सबसे महंगा घर कहा जाता है। एंटीलिया दक्षिण मुंबई, भारत में एक निजी घर है। इसका स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के पास है और दिन में 24 घंटे इस निवास की देखरेख के लिए 600 कर्मचारी हैं।मुकेश अंबानी 90 किलो के स्वस्थ शरीर के साथ 5 फीट 6.5 इंच लंबे है। उनके बालों का रंग कला है। वह मेष राशि के है और उनका धर्म हिंदू है। व्यवसाय के अलावा, उनके शौक है- फिल्में देखना, पुराने हिंदी गाने सुनना और तैराकी करना। उनके पास कई लक्जरी कारें जैसे बेंटले फ्लाइंग स्पूर, रोल्स रॉयस प्रेत और बी एम डब्ल्यू 760li है । उनका निजी पसंदीदा वाहन लगभग 25 करोड़ रुपये की एक अनुकूलित वैनिटी वैन है। इसके अलावा, वह बोइंग बिजनेस जेट 2 और फाल्कन 900EX के मालिक भी है।inspirational reL life story
एक अरबपति होने के बावजूद, वह एक सादा जीवन जीना पसंद करते है। आम तौर पर, वह एक साधारण शर्ट और एक काला पैंट पहनते है और किसी भी ब्रांड का पालन नहीं करते है। वह एक गुजराती व्यक्ति हैं।उन्हें गुजराती व्यंजन खाने का शौक है। उनके पसंदीदा व्यंजन पानकी, डोसा, चाट और भुनी हुयी मूंगफली हैं।
व्यवसाय
अंबानी ने केमिकल टेक्नोलॉजी संस्थान के गवर्नर्स बोर्ड पर कार्य किया है। वह पहले भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के उपाध्यक्ष भी रहे हैं और वर्तमान में रिलायंस पेट्रोलियम में बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वह रिलायंस रिटेल लिमिटेड की लेखा परीक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम करते है। वह रिलायंस एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन डीएमसीसी के अध्यक्ष हैं। वह गांधीनगर गुजरात में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य करते हैं। inspirational reL life story1981 में मुकेश अंबानी परिवार के कारोबार में शामिल हो गए थे। यह धीरूभाई अंबानी ही थे जिन्होंने रिलायंस शुरू किया था। मुकेश अंबानी ने केवल कपड़ा से लेकर क्षेत्रों तक पॉलिएस्टर फाइबर, पेट्रोलियम परिष्करण और पेट्रोकेमिकल्स के रूप में विविधता से कंपनी की गतिविधियों का विस्तार शुरू किया पर बहुत जल्द, वह तेल और उत्पादन और प्राकृतिक गैस की खोज में भी आगे बढ़ गए। real life
सन 1980 के समय जब इंदिरा गाँधी सरकार ने पी एफ वाई (पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न ) का निर्माण निजी क्षेत्रों के लिए खोला तब रिलायंस ने भी लाइसेंस को पाने के लिये इसमें भाग लिया और टाटा, बिरला तथा 43 और भी बड़ी बड़ी कंपनीयों के मध्य लाइसेंस पाने में उन्होंने कामयाबी भी प्राप्त कर ली। पीएफवाई (पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न) कारखाने का जब निर्माण होने लगा तो धीरुभाई अंबानी ने मुकेश अंबानी को एमबीए की पढ़ाई के बीच में ही बुला लिया और इस तरह मुकेश अंबानी ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और वह भारत वापस आ गए और कारखाने के निर्माण के कार्य में मेहनत से कार्य करने लगे।
मुकेश अम्बानी के मेहनत पूर्ण कार्य से ही रिलायंस ने भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में से एक जो कि ‘रिलायंस इन्फोकॉम लिमिटेड’ ( रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड) की स्थापना की। मुकेश अंबानी ने गुजरात के जामनगर में एक बुनियादी स्तर की विश्व की सबसे बड़ी पेट्रोलियम रिफायनरी की स्थापना करने में महत्त्वपूर्ण योगदान भी दिया। सन 2010 में इस रिफायनरी की क्षमता 660,000 बैरल प्रति दिन हुआ करती थी यानी 3 करोड़ 30 लाख टन प्रति वर्ष थी। लगभग 100000 करोड़ रुपयों के निवेश से बनी इस रिफायनरी में पेट्रोकेमिकल, पावर जेनरेशन, पोर्ट तथा सम्बंधित आधारभूत ढांचा है।Real life inspirational story
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर से ‘रिलायंस जिओ’ के माध्यम से दूरसंचार के क्षेत्र में एक नया कदम रखा। मुकेश अंबानी ने आज 4G सेवाएं प्रारंभ कर दी है। जो कि आज की दुनिया में लोगों को आकर्षित कर रही है। इन्ही जिओ 4G के बेहतरीन ऑफर के कारण ही आज गाँव से लेकर शेहर तक लोग तेज़ इन्टरनेट का उपयोग कम दामों में कर पा रहे हैं।
पुरस्कार Awards
- 2007 में मुकेश अंबानी एन डी टीवी के द्वारा “बिज़नसमैंन ऑफ़ द ईयर” से पुरुस्कृत किये गये।
- यू एस आई वी सी ने बाशिंगटन में “ग्लोवल विजन” के पुरुस्कार से सराहा गया।Real life inspirational story
- 2007 में उन्हें “चित्रलेखा पर्सन ऑफ़ द ईयर” के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- 2004 मई में एशिया सोसाइटी, वॉशिंगटन डी सी द्वारा मुकेश अंबानी को “एशिया सोसाइटी लीडरशिप” अवार्ड प्रदान किया गया था।
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| 11. रजनीकांत |
रजनीकांत आम लोगों के लिए उम्मीद का प्रतीक। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि रजनीकांत ऐसे इंसान हैं जिन्होंने फर्श से अर्श तक आने की कहावत को सत्य साबित करके बताया हो। दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने बड़ी-बड़ी सफलताएं अर्जित की पर जिस तरह रजनीकांत ने अभावों और संघर्षों में इतिहास रचा है वैसा पूरी दुनिया में कम ही लोग कर पाएं होंगे।
एक कारपेंटर से कुली बनने, कुली से बी.टी.एस. कंडक्टर और फिर एक कंडक्टर से विश्व के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सुपरस्टार बनने तक का सफ़र कितना परिश्रम भरा होगा ये हम सोच सकते हैं। रजनीकांत का जीवन ही नहीं बल्कि फिल्मी सफ़र भी कई उतार चढ़ावों से भरा रहा है। जिस मुकाम पर आज रजनीकांत काबिज हैं उसके लिए जितना परिश्रम और त्याग चाहिए होता है शायद रजनीकांत ने उससे ज्यादा ही किया है।
संघर्षपूर्ण बचपन
रजनीकांत का जन्म 12 दिसम्बर 1950 को कर्नाटक के बैंगलोर में एक बेहद मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ था। वे अपने चार भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनका जीवन शुरुआत से ही मुश्किलों भरा रहा, मात्र पांच वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया था। पिता पुलिस में एक हवलदार थे और घर की माली स्थिति ठीक नहीं थी। रजनीकांत ने युवावस्था में कुली के तौर पर अपने काम की शुरुआत की फिर वे बी.टी.एस में बस कंडक्टर (bus conductor) की नौकरी करने लगे। real life
रजनीकांत का अंदाज़
एक कंडक्टर के तौर पर भी उनका अंदाज़ किसी स्टार से कम नहीं था। वो अपनी अलग तरह से टिकट काटने और सीटी मारने की शैली को लेकर यात्रियों और दुसरे बस कंडक्टरों के बीच विख्यात थे। कई मंचों पर नाटक करने के कारण फिल्मों और एक्टिंग के लिए शौक तो हमेशा से ही था और वही शौक धीरे धीरे जुनून में तब्दील हो गया। लिहाज़ा उन्होंने अपना काम छोड़ कर चेन्नई के अद्यार फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला ले लिया।
वहां इंस्टिट्यूट में एक नाटक के दौरान उस समय के मशहूर फिल्म निर्देशक के. बालचंद्र की नज़र रजनीकांत पर पड़ी और वो रजनीकांत से इतना प्रभावित हुए कि वहीँ उन्हें अपनी फिल्म में एक चरित्र निभाने का प्रस्ताव दे डाला। फिल्म का नाम था अपूर्व रागांगल। रजनीकांत की ये पहली फिल्म थी पर किरदार बेहद छोटा होने के कारण उन्हें वो पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे योग्य थे। लेकिन उनकी एक्टिंग की तारीफ़ हर उस इंसान ने की जिसकी नज़र उन पर पड़ी।
विलेन से हीरो बने
रजनीकांत का फिल्मी सफ़र भी किसी फिल्म से कम नहीं। उन्होंने परदे पर पहले नकारात्मक चरित्र और विलेन के किरदार से शुरुआत की, फिर साइड रोल किये और आखिरकार एक हीरो के तौर पर अपनी पहचान बनाई। हालांकि रजनीकान्त, निर्देशक के. बालचंद्र को अपना गुरु मानते हैं पर उन्हें पहचान मिली निर्देशक एस.पी मुथुरामन की फिल्म चिलकम्मा चेप्पिंडी से।Real life inspirational story
इसके बाद एस.पी. की ही अगली फिल्म ओरु केल्विकुर्री में वे पहली बार हीरो के तौर पर अवतरित हुए। इसके बाद रजनीकांत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दर्जनों हिट फिल्मों की लाइन लगा दी। बाशा, मुथू, अन्नामलाई, अरुणाचलम, थालाप्ति उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों में से एक हैं।
उम्र कोई मायने नहीं रखती
रजनीकांत ने यह साबित कर दिया की उम्र केवल एक संख्या है और अगर व्यक्ति में कुछ करने की ठान ले तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। 65 वर्ष के उम्र के पड़ाव पर वे आज भी वे शिवाजी- द बॉस, रोबोट, कबाली जैसी हिट फिल्में देने का माद्दा रखते हैं। 65 वर्षीय रजनीकांत के लोग इतने दीवाने है कि कबाली फिल्म ने रिलीज़ होने से पहले ही 200 करोड़ रूपये कमा लिए। Real life inspirational story
एक समय ऐसा भी था जब एक बेहतरीन अभिनेता होने के बावजूद उन्हें कई वर्षों तक नज़रंदाज़ किया जाता रहा पर उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी। ये बात रजनीकांत के आत्मविश्वास को और विपरीत परिस्तिथियों में भी हार न मानने वाले जज्बे का परिचय देती है।
जमीन से जुड़े हुए
रजनीकांत आज इतने बड़े सुपर सितारे होने के बावजूद ज़मीन से जुड़े हुए हैं। वे फिल्मों के बाहर असल जिंदगी में एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही दिखते है। वे दूसरे सफल लोगों से विपरीत असल जिंदगी में धोती-कुर्ता पहनते है। शायद इसीलिए उनके प्रशंसक उन्हें प्यार ही नहीं करते बल्कि उनको पूजते हैं। रजनीकांत के बारे में ये बात जगजाहिर है कि उनके पास कोई भी व्यक्ति मदद मांगने आता है वे उसे खाली हाथ नहीं भेजते। Real life inspirational story
रजनीकांत कितने प्रिय सितारे हैं, इस बात का पता इसी से लगाया जा सकता है कि दक्षिण में उनके नाम से उनके प्रशंसकों ने एक मंदिर बनाया है। इस तरह का प्यार और सत्कार शायद ही दुनिया के किसी सितारे को मिला हो। चुटुकलों की दुनिया में रजनीकांत को ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जिसके लिए नामुनकिन कुछ भी नहीं और रजनीकांत लगातार इस बात को सच साबित करते रहते है। आज वे 65 वर्ष की उम्र में रोबोट-2 फिल्म पर काम कर रहे है, उनका यही अंदाज लोगों के दिलों पर राज करता है।
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| 12. संदीप महेश्वरी |
संदीप सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि देश विदेश में काफी नाम कमा चुके हैं. संदीप युवाओं को आगे लाने के लिए, उनके भविष्य को लेकर उन्हें निराशा से बाहर निकालने के लिए कई जगह सेमिनार भी आयोजित कराते हैं. उनका ‘फ्री मोटिवेशनल लाइफ चेजिंग सेमिनार्स’ काफी प्रसिद्ध है. 34 वर्षीय संदीप अपने जीवन में कई संकटों का सामना करते हुए इस मुकाम पर पहुँचें है.Real life inspirational story
संदीप माहेश्वरी के बारे में आवश्यक जानकारी
- नाम (Name) संदीप माहेश्वरी
- व्यवसाय (Business) फोटो ग्राफर, उद्यमी, पब्लिक स्पीकर
- कुल संपत्ति (Net worth) NA
- जन्म तारीख़ (Date of Birth) 28 सितम्बर 1980
- उम्र (Age) 36 साल
- जन्म स्थान (Birth Place) दिल्ली
- स्थान (Home Town) नई दिल्ली
- नागरिकता (Nationality) भारतीय
- स्कूल (School) NA
- कॉलेज (College) किरोरिमल कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ़ दिल्ली, दिल्ली
- शिक्षा (Education) बीकॉम
संदीप माहेश्वरी का आरंभिक जीवन
28 सितम्बर 1980 को सन्दीप महेश्वरी का जन्म दिल्ली में हुआ था. संदीप बचपन से ही बहुत कुछ कर करने के बारे में सोचते थे. वे अपने बचपन के बारे में खुलकर कभी ज्यादा बात नहीं करते हैं. उनके पिता कारोबारी थे. संदीप के पिता का एल्युमीनियम का कारोबार था. लगभग दस साल चलने के बाद ये व्यापार ठप्प हो गया. परिवार की सहायता के लिए उन्होंने मां के साथ मिलकर मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी को ज्वाइन किया, जिसमें घर में ही चीजों को बनाना और बेचना होता था. Real life inspirational story
एमएलएम का काम भी ज्यादा दिन नहीं चला. पिता का कारोबार थम जाने के कारण संदीप का पूरा परिवार आर्थिक संकट से जूझने लगा. सन्दीप के पिता काफी परेशान रहते थे. इस संकट की घड़ी में संदीप के परिवार ने टूटने की अपेक्षा खुद को और ज्यादा संगठित किया. उसी समय से संदीप अपने परिवार के लिए कुछ करना चाहते थे. इस छोटे व्यवसाय के बाद उन्होंने और भी कई काम शुरु किये, जो ज्यादा दिनों तक नहीं चले. अंत में उन्होंने परिवार चलाने के लिए पीसीओ का काम आरंभ किया. चुंकि उस समय मोबाइल उतना नहीं था, तो ये काम कुछ दिनों के लिए अच्छा चला. उनकी मां ये काम संभालती थी.inspirational story
संदीप माहेश्वरी की शिक्षा
संदीप को परिवारिक और आर्थिक संकट के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी. दिल्ली के करोड़ीमल कॉलेज से वे कामर्स में स्नातक कर रहे थे, और 2000 में उन्होंने फोटोग्राफी करना आरंभ किया था, और आरंभ में कई तरह से उसे पेशे के रूप में अपनाने की कोशिश की. इसी सिलसिले में कुछ मित्रों के साथ एक छोटा सा व्यवसाय भी आरंभ किया, किन्तु वे सभी असफल हो गये. किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही चुना था.
संदीप माहेश्वरी के जीवन में बदलाव
संदीप माहेश्वरी निराशा के साथ जीने लगे थे, लेकिन उसी समय एक बार उन्होंने एक मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी के सेमिनार परिचर्चा में दोस्तों के साथ हिस्सा लिया. 18 साल के संदीप की परिपक्वता उतनी नहीं थी, उन्हें सेमिनार में कुछ समझ नही आया था, उन्होंने जो कुछ भी सुना सब उनके लिए अन्जानी सी बात थी. उस 21 साल के लड़के ने संदीप को एक बार फिर से अपनी निराशा से संघर्ष करने का हौसला दिया. इस हौसले के साथ ही संदीप को नये तरह की उद्यम आरंभ करने की प्रेरणा मिली, और यह भी कि वो अपनी तरह कई युवाओं को जीवन संघर्ष में प्रेरित कर सकते हैं.अब सन्दीप ने ठान लिया कि वह 21 साल के लड़के की तरह ही नया उद्यम आरंभ करेंगे, ये आवाज उसके अंर्तमन से आ रही थी. ये विचार आते ही वो अपने कुछ मित्रों को संग लेकर उस लडके की कम्पनी में गये पर वहाँ कुछ हाथ नहीं लगा. किसी को कंपनी ने नहीं रखा, मित्र भी उनकी खिल्ली उड़ाने लगे थे. इस असफलता ने उन्हें थोड़ी सा पीछे कर दिया पर हरा नहीं पाई. संदीप असफलताओं का मूल्यांकन करने लगे. उन्होंने अपनी गलतियों को सुधारने का उपाय सोचा और उन्हें लगा कि शायद साझेदारी पर विश्वास न करके भूल की है. संदीप को लगने लगा कि जब तक आप संघर्ष के कटुत्कित अनुभव से नहीं गुजरते हैं, सफलता आपको नहीं मिलेगी. इसके बाद उन्होने कई और असफल प्रयास किये.
संदीप माहेश्वरी की फोटोग्राफी
मॉडलिंग के दौरान एक मित्र कुछ तस्वीर लेकर उनके पास आया. उन तस्वीरों को देखकर उन्हें लगा कि उनके अंतरत्मा की आवाजा इसी व्यवसाय के लिए आ रही है. उन्होंने कुछ जानकारी हासिल कर 2 सप्ताह के फोटोग्राफी के प्रशिक्षण कोर्स में दाखिला ले लिया . कोर्स ज्वाइन करने के बाद उन्होंने एक मंहगा कैमरा भी खरीदा और तस्वीर खींचना आरंभ कर दिया. फोटोग्राफी कोर्स पूरा करने के बाद भी उनके लिए रास्ता कठिन ही था. उन्होंने देखा कि देश में लाखों लोग फोटोग्राफर के पेशा के लिए धक्का खा रहे हैं. उन्हें लगने लगा कि ऐसा क्या करना चाहिए जो फोटोग्राफी को दूसरे लेवल पर ले जाकर नया व्यवसाय का रूप दे. उन्होंने हिम्मत जुटाकर एक अखबार में फ्री पोर्ट फोलियो का विज्ञापन दिया, और उस विज्ञापन को पढ़कर कई लोग आये. उन लोगों से ही जिंदगी की पहली कमाई का सिलसिला आरंभ हुआ. फोटोग्राफी का व्यापार आरंभ हो गया. और धीरे धीरे इसका विस्तार करते हुए उन्होंने एक विश्व रेकार्ड 12 घंटे में 100 मॉडल्स के 10000 फोटो खींच कर लिम्का बुक्स में अपना नाम दर्ज कर लिया. इस रेकार्ड के बाद उनके पास काम की तादाद और ज्यादा बढ़ने लगी.inspirational story
संदीप माहेश्वरी की इमेजबाजार कंपनी
लिमका बुक में नाम दर्ज करने के बाद उनको काफी व्यवसाय मिलने लगा. इसी रेकार्ड के कारण उनके पास कई मॉडल्स और विज्ञापन कंपनियां आने लगी, और देखते ही देखते कुछ ही अवधि में उनकी कम्पनी भारत की बड़ी फोटोग्राफी एजेंसी बन गयी. पैसों की कोई कमी नहीं रही. 2006 में संदीप के दिमाग में एक नया ख्याल आया और उसी ख्याल से उपजा ऑनलाइन इमेज बाजार शेयरिंग साईट. ये देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन फोटोग्राफी की कम्पनी है. अभी उनके पास 45 देशों से लगभग 7000 से ज्यादा क्लाईंट है. अब संदीप भी शेयरिंग पर सेमिनार देते हैं और लाखों युवाओं को प्रेरित करते हैं.
संदीप के जीवन की महत्वपूर्ण वर्ष
- 2000 बिना किसी स्टूडियो के फोटोग्राफी का कार्य आरंभ.
- 2001 अपना कैमरा बेच दिया और जापानी कंपनी में काम करने लगे.inspirational story
- 2002 कुछ मित्रों के साथ नयी कंपनी बनाई, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद ये कंपनी बंद हो गई.
- 2003 मार्केटिंग को लेकर एक किताब लिखी, कंसलटेन्सी फार्म की स्थापना की, फिर असफल हो गये. फोटोग्राफी में लिमका बुक में रेकार्ड दर्ज किया.
- 2004 छोटा स्टूडियो लेकर एक फर्म की स्थापना की.
- 2005 फोटोग्राफी वेबसाईट का नया आइडिया आया और उस पर काम करने लगे.
- 2006 imagesbazaar.com को लांच किया, सिर्फ 8,000 तस्वीरें थी और कुछ फोटोग्राफर शामिल थे. इसके बाद संदीप ने पीछे मुड़कर नही देखा.
संदीप महेश्वरी की सफलता और पुरस्कार
- उन्हें क्रिएटिव एंतोप्रेन्टोरिय़र ऑफ द ईयर 2013 का पुरस्कार “Entrepreneur India Summit” के द्वारा 2014 में प्रदान किया गया.inspirational story
- “Business World” पत्रिका ने उन्हें शीर्ष उद्ममी के रूप में चुना गया.
- ग्लोबल मार्केटिंग फोरम के द्वारा स्टार यूथ एचिहिवर के रूप में चुना गया.
- ब्रिटिश हाई कमीशन की तरफ से इन्हे युवा उद्यमी का पुरस्कार मिला
- ईटी नाउ चैनल के द्वारा शीर्ष उद्यमी का पुरस्कार मिला.
- इसके साथ साथ कई चैनलों ने इन्हें वर्ष का उद्यमी घोषित किया.inspirational story
संदीप माहेश्वरी के अनमोल वचन
संदीप का मानना है कि हर किसी के अंदर उसका गुरू रहता है. सही समय पर आप उस गुरू की अनुभूति कीजिए. संदीप अब युवाओं के लिए गुरू की तरह है. लोग उनके द्वारा कहे गये शब्दों को ध्यान से सुनते है और अपने जीवन में लाने की कोशिश भी करते हैं. संदीप के जीवन का सबसे बड़ा शब्द है ‘आसान’. उनका मानना है जीवन में कुछ भी कठिन नहीं है, सभी कुछ आसान है. सिर्फ पूरी शिद्दत से आप खुद के लक्ष्य के पीछे लगे रहिए.
वे कहते हैं –
‘यदि आपके पास चीजों का आधिक्य है तो आप उसे सिर्फ अपने लिए ही संरक्षित ना रखें,उसे जरूरतमंदों के साथ शेयर करें.’inspirational story
सभी से सीखो पर सबका अनुसरण मत करो.
मनुष्य की सबसे संरचनात्मक और विनाशात्मक चीज है उसकी लालसा.
ना भागना है, ना रूकना है, बस चलते जाना है. पैसे की उतनी ही जरूरत है जितना गाड़ी में पेट्रोल
जब भी कठिनाइयों से डरो तो अपने से नीचे के लोगों को देखो.












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