Hindi children short story 2020

मुसीबत में कभी भी हिम्मत न हारना

सोहन और मोहन के बीच गहरी दोस्ती थी दोनों एक साथ पढ़ते थे और दोनों का घर भी एक ही गाव में आसपास था तो दोनों एक दुसरे के साथ खूब खेलते और मस्ती करते थे

सोहन जो की काफी शांत स्वाभाव का जबकि मोहन थोडा शरारती था लेकीन सोहन मोहन को हमेशा समझता रहता था की वह शैतानी नही किया करे नही तो कभी खुद को मुसीबत में डाल सकता है लेकिन मोहन को शैतानी करने में खूब मजा आता था इसलिए वह Sohan की बातो को अनसुना कर दिया करता था

बरसात के दिन थे और अब स्कूल भी चालू हो गया था उनका स्कूल नदी के रास्ते से होकर थोडा दूर जाना पड़ता था तो सोहन और मोहन हमेसा साथ ही School जाते थे

एक दिन की बात है जब शाम को स्कूल की छुट्टी हुई तो सभी बच्चे घर जाने लगे तो मोहन जब नदी के पास पंहुचा तो उसे शरारत सूझी और वह नदी के एकदम पास चला गया
उस समय बरसात की वजह से नदी की पानी पूरा भरा हुआ था तो फिसलन की वजह से मोहन अचानक नदी में फिसल गया और वह नदी के बहाव में बहने लगा

यह सब देखकर सभी बच्चे डर गये और जोर जोर बचाओ बचाओ चिल्लाने लगे लेकिन वहां बच्चो के अलावा कोई नही था जो मोहन को नदी में डूबने से बचा पाता

लेकिन उसका दोस्त सोहन ने अपने दिमाग से काम लेते हुए तुरंत पास पड़े हुए सूखे बासों को नदी में फेकने लगा जिससे एक साथ कई बास नदी में तैरने लगे तो उसने एक बास को मजबूती से पकड कर मोहन की तरफ किया तो मोहन नदी की बहाव में किसी तरह बास को पकड़ लिया फिर क्या था सोहन ने अपनी पूरी ताकत लगाकर खीचने लगा और धीरे धीरे मोहन उस बास के सहारे नदी से बाहर की तरफ आ गया और इस तरह सोहन ने मोहन की जान बचा लिया

इतने और बच्चो ने गाव वालो को भी बुला लिया था सबने सोहन की बहादुरी का खूब तारीफ किये और फिर मोहन को आगे ऐसा न करने को समझाकर घर भेज दिया इसके बाद से मोहन ने अब शरारत करना छोड़ दिया और फिर सोहन सोहन एक हसी खुशी रहने लगे

दोस्तों इस छोटी सी कहानी से हमे यही पता चलता है की हमारे जिन्दगी में अनेको ऐसे पल आते है जिसमे हम सभी कोई न कोई ऐसा शरारत कर देते है जिससे या तो हम खुद Musibat में फस जाते है या और लोगो की इससे चलते परेशानी उठानी पड़ती है इसलिए हमे अपने चलते कभी भी किसी को परेशानी में नही डालना चाहिए और न ही ऐसे शरारते करनी चाहिए जिससे की हमे खुद कोई Problem में फस जाए

और हर किसी के अपनी जिन्दगी में ऐसे अनेको मोड़ आते है जब उसके Himmat की परीक्षा होती है और अक्सर इन स्थितियों में हम सभी अपनी हिम्मत हार जाते है और फिर उस स्थिति में हम कोई भी ठोश Decision भी नही ले पाते है क्यू की अचानक आये इस मुसीबत में हमारा दिमाग काम करना बंद कर देता है
लेकीन जो इन्सान हिम्मती होते है उनके उपर चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत क्यू न आ जाये लेकीन वे अपना हिम्मत नही हारते है और इन स्थितियों का सामना बड़े धैर्य और बहादुरी के साथ करते है

तो इसलिए हमें भी चाहे कितनी बड़ी मुसीबत में क्यू न हो हमे अपना धैर्य नही खोना चाहिए और अपने दिमाग से काम लेना और फिर क्यू अगर हम धैर्य से काम ले तो बिगड़े काम भी बन सकते है हिम्मत और मेहनत के बल पर बिगड़े हुए काम भी बन सकते है

शिक्षा – मुसीबत में कभी भी हिम्मत नही हारना चाहिए और परिस्थितियों का डटकर सामना करना चाहिए

लोमड़ी और खट्टे अंगूर

एक जंगल में एक लोमड़ी जा रही थी की रास्ते में उसे अंगूर का पेड़ दिखा जिसपर बहुत सारे अंगूर के फल लगे हुए थे जिसको देखकर लोमड़ी के मुह में पानी आ गया और फिर लोमड़ी अंगूर के फल खाने की इच्छा से अंगूर के गुच्छे की तरफ छलांग लगायी लेकिन अंगूर का पेड़ काफी उचा था जो की लोमड़ी की पहुच से दूर था जिसके कारण लोमड़ी ने कई बार कोशिश लेकिन वह अंगूर के फल को न पा सकी और अंत में थक हारकर खुद को सांत्वना देते हुए चली गयी और जाते हुए मन में यही कह रही थी अंगूर खट्टे है

कहानी से शिक्षा / Moral Teach
जब हम प्रयास करते हुए थक जाते है और अंत में हमे निराशा मिलती है तो हम परिस्तिथी के अनुरूप खुद को ढाल लेते है और सफलता मिलना हमारे भाग्य में नही है ऐसा कहकर खुद को सांत्वना देते है

भालू और दो दोस्त

दो दोस्त जंगल के रास्ते से जा रहे थे की अचानक उन्हें दूर से एक भालू अपने पास आता हुआ दिखा तो दोनों दोस्त डर गये पहला दोस्त जो की दुबला पतला था वह तुरंत पास के पेड़ पर चढ़ गया जबकि दूसरा दोस्त जो मोटा था वह पेड़ पर चढ़ नही सकता था तो उसने अपनी बुद्धि से काम लेते हुए वह तुरंत अपनी सांस को रोकते हुए जमीन पर लेट गया और फिर कुछ देर बाद भालू वहा से गुजरा तो उस मोटे दोस्त को सुंघा फिर कुछ समय बाद आगे चला गया इस प्रकार उस मोटे दोस्त की जान बच गयी तो इसके बाद उसका दोस्त उसके पास आकर पूछता है की वह भालू तुम्हारे कान में क्या कह रहा था तो उस दोस्त ने बोला की सच्चा दोस्त वही होता है जो मुसीबत के समय अपनी समय के काम आये

कहानी से शिक्षा / Moral Teach
सच्चा दोस्त वही होता है जो दोस्त अपने दोस्त का साथ मुसीबत के वक्त भी न छोड़े

दयालु शेर

एक जंगल में एक शेर सो रहा था की अचानक एक चूहा शेर को सोता देखकर उसके उपर आकर खेलने लगा जिसके कारण उछलकूद से शेर की नीद खुल गयी और उसने उस चूहे को पकड़ लिया तो चूहा डर के कापने लगा औ शेर से बोला हे राजन हमे माफ़ कर दो जब कभी आपके ऊपर कोई दुःख आएगा तो मै आपकी सहायता कर दूंगा तो शेर हसते हुए बोला मै सबसे अधिक शक्तिशाली हु मुझे किसी की सहायता की क्या जरूरत, यह कहते हुए उसने चूहे को छोड़ दिया

बच्चो को मोबाइल फोन से कैसे दूर रखे MOBILE SIDE EFFECT

कुछ दिनों बाद वही शेर शिकारी द्वारा फैलाये गये जाल में फास गया और फिर खूब जोर लगाया लेकिन वह जाल से छुटने की अपेक्षा और अधिक फसता चला गया यह सब देखकर पास में ही उस चूहे की नजर शेर पर पड़ी तो उसने शेर की सहायता वाली बात याद दिलाकर अपने नुकीले दातो से जाल काट दिया और फिर शेर जाल से आजाद हो गया इस प्रकार चूहे ने अपने जान की कीमत शेर की जान को बचाकर पूरा किया
कहानी से शिक्षा / Moral Teach
कभी किसी को छोटा समझकर उसकी शक्ति नही आकनी चाहिए क्यूकी मुसीबत में किसी की भी सहायता की जरूरत पड़ सकती है
रंगीन सियार

एक बार एक सियार जंगल में पास के गाव में चला गया और और वहां के लोगो द्वारा भगाने से हडबडी में सियार धोबी के रखे नाद में गिर गया जिसके पानी में रंग होने के कारण सियार रंगीन हो गया फिर वापस सियार जंगल में आया तो सब सियार उससे डर के मारे इक्कठा होने लगे और सब एक साथ एक उसके सामने आये तो सियार को अपने बदले हुए रंग का पता चला तो उसने तुरंत सभी सियार से कहा की मुझे देवदूतो ने आप सब का राजा बनाकर भेजा है इसलिए आज से मै आप सबका राजा हु आप लोग मेरी मेरा सेवा करेगे तो सबने निश्चय किया की अगर ये सियार का रंग अलग है तो इसकी आवाज़ भी अलग होगी और सभी सियार एक साथ चिल्लाने लगे तो भला सभी सियार के चिल्लाने से अपनी आदत से मजबूर वह सियार भी उनके सुर में चिल्लाने लगा तो सबके सामने उस सियार की पोल खुल गयी और सब सियार ने मिलकर उसको मार डाला

कहानी से शिक्षा / Moral Teach
किसी भी साप को कितना भी दूध पिला लो वह काटना नही छोड़ता ठीक उसी प्रकार दुष्ट लोग भी चाहे कितने सज्जन बन जाए लेकिन वे अपनी आदत को छोड़ नही सकते

नकलची बन्दर 

एक बार एक टोपी बेचने वाला अपनी ढेर सारी टोपियो को लेकर बेचने जा रहा था रास्ते में एक पेड़ के नीचे बैठ गया और थकान की वजह से उसे नीद आ गयी और सो गया इतने में उस पेड़ पर रहने वाले बन्दर उसकी ढेर सारी टोपिया उठा ले गये और सबने पेड़ पर चारो तरफ टोपिया फैला दी इतने में उस टोपीवाले की नीद खल गयी तो उसने देखा की सब बंदरो ने उसके टोपिया लेकर चले गये है तो वह उनसे टोपिया मागने के लिए डराने लगा लेकिन इससे बन्दर और चिड जाते और सभी बन्दर वैसा ही करते जैसा की टोपीवाला करता तो उसने गुस्से में अपने सर की टोपी निकाल कर फेक दी तो ऐसा देखकर उन बंदरो ने नकल करके सारे टोपी नीचे फेक दिए जिससे टोपीवाला अपने सारी टोपिया फिर से पा लिया.

कहानी से शिक्षा / Moral Teach
कभी कभी नकल करना भी अक्ल पर पर्दा डाल देता है इसलिए हम जो भी करे उसे सोच विचारकर करे

सारस और लोमड़ी

एक बार एक लोमड़ी ने अपने दोस्त सारस को खाने की न्यौता दिया और खाने में खीर बनाया और उसे बड़े थाली में परोस दिया फिर सारस और लोमड़ी थाली में परोसे खीर को खाने लगे थाली काफी चौड़ी थी जिससे सारस के चोच में खीर की थोड़ी ही मात्रा आ पाती थी जबकि लोमड़ी अपने जीभ से जल्दी जल्दी सारा खीर खा लिया जबकि सारस का पेट भी नही भरा था जिससे लोमड़ी अपनी चतुराई से मन ही मन खुश हुई तो फिर सारस ने भी लोमड़ी को खाने का न्योता दिया फिर अगले दिन सारस ने भी खीर बनाया और और लम्बे सुराही में भर दिया जिसके बाद दोनों खीर खाने लगे सारस अपने लम्बे चोच की सहायता से सुराही में खूब खीर खाया जबकि लोमड़ी सुराही लम्बा और उसका मुह छोटा होने के कारण वहा तक पहुच ही नही पाता जिसके कारण वह सुराही पर गिरे हुए खीर को चाटकर संतोष किया फिर इस प्रकार सारस ने अपने अपमान का बदला ले लिया और लोमड़ी को अपने द्वारा किये हुए इस व्यव्हार पर बहुत पछतावा हुआ

कहानी से शिक्षा / Moral Teach
जैसे को तैसा की सोच आधारित यह कहानी हमे यही सिखाती है की हमे कभी भी किसी का अपमान नही करना चाहिए क्यू ऐसा अपमान अपने साथ भी सो सकता है

एकता की शक्ति

एक बहेलिया जंगल में पक्षियों को पकड़ने के लिए गया और पक्षियों को पकड़ने के लिए अपने जाल फैलाकर उसपर चावल के दाने बिखेर कर जंगल की झाड़ियो में छुप गया इतने में झुण्ड में जाते हुए कबूतरों को जंगल में चावल के दाने दिखे तो उन सभी के मुह में पानी भर आया और चावल के दाने चुगने के लिए सभी नीचे उतरे तो उनमे मौजूद एक बुद्धिमान कबूतर को कुछ शक हुआ की भला जंगल में असे चावल के दाने कहा से आ गये हो न हो इसमें कोई धोखा हो सकता है उसके मना करने के बावजूद सभी कबूतर दाना चुगने लगे और इस तरह सभी कबूतर शिकारी द्वारा फैलाये जाल में फस गये और सभी उड़ने की कोशिश करने लगे लेकिन वे सभी असफल रहे तो बुद्धिमान कबूतर बोला दोस्तों अगर हम सभी एक साथ पूरे शक्ति लगाकर उड़े तो निश्चित ही हम सभी इस जाल को लेकर उड़ सकते है इसके बाद उन कबूतरों ने एक साथ पूरे ताकत से उड़ने लगे जिससे वे फसे हुए जाल को लेकर उड़ने लगे लेकिन पास में छिपा बहेलिया भी उनके पीछे दौड़ा लेकिन कबूतरों की एकता की शक्ति के पीछे वह असफल रहा और उन कबूतरों को पकड़ नही पाया फिर उन कबूतरों ने अपने मित्र मूषकराज के पास पहुच जाल काटने के बाद एक बार फिर से आजाद हो गये इस प्रकार उनके एकता की ताकत उन्हें बहेलिया के कैद में होने से बचा लिया

कहानी से शिक्षा / Moral Teach
अगर हम सब एक साथ मिलकर रहे तो हमारी एकता की ताकत के आगे बड़े से बड़े मुसीबत का सामना आसानी से कर सकते है

मूर्ख पंडित की कहानी

बहुत पहले की बात है, रामपुर नाम के गांव में एक मूर्ख ब्राह्मण रहा करता था | ब्राह्मण का परिवार काफी गरीब था |

इसलिए ब्राह्मण की पत्नी उसे बार-बार कुछ पढ़ाई करने और कुछ सीखने के लिए कहा करती थी | लेकिन ब्राह्मण बड़ा ही कामचोर था | इसलिए वह कहीं जाना नहीं चाहता था |
एक दिन जब उसकी पत्नी ने बहुत अधिक जोर दिया और कहा कि आज तुम्हें स्कूल जाकर कुछ पढ़ाई करना ही होगा तो अपने पत्नी के गुस्सा को देख़ते हुए वह ब्राह्मण तैयार हो गया |

वह अपने घर से निकला और पीछे के रास्ते से जाकर घर के पीछे छुप के बैठ गया | थोड़ी देर बाद उसके घर में कुछ लोग आए और उन लोगों ने क्या बातें कहीं यह सब बस पीछे बैठे चुपचाप सुन रहा था |
जब शाम हो गई तो ब्राह्मण वापस अपने घर के पीछे से निकल कर आया और आकर उसने अपने पत्नी से कहा कि आज मैंने इतनी पढ़ाई कर ली कि अब मैं भविष्य देखने लगा हूं |

यह सुनकर उसके पत्नी को बड़ा आश्चर्य हुआ और यकीन भी नहीं हुआ तो उसने कहा कि अच्छा ऐसा है तो बताओ आज जब तुम स्कूल गए थे तो घर में क्या हुआ |

अपनी पत्नी का सबाल सुनकर ब्राह्मण ने उत्तर दिया की आज हमारे घर में कौन आया था उसने क्या बातें कहीं | यह सब तो वह पीछे बैठकर सुन ही रहा था

जबाब सुनकर ब्राह्मण की पत्नी को यकीन हो गया कि सच में उसका पति भविष्य देखने लगा है | इसके बाद वह पूरे गांव में घूम-घूम कर सबको यह बात बताने लगी कि उसका पति भविष्य देखने लगा है, वह भविष्य देख सकता है |

अगले दिन एक धोबी का गधा खो गया था और वह उसे मिल नहीं रहा था | इसलिए वह उस पंडित के पास आया और आकर उससे कहा कि मेरा गधा खो गया है क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं  |
पंडित को कुछ समझ में नहीं आया की वह क्या करें इसलिए उसने कहा कि अभी मैं स्नान करने जा रहा हूं जब मैं स्नान करके लौटूंगा उसके बाद मैं भविष्यवाणी करूंगा |

इतना कहकर पंडित वहां से निकल भागा | जब वह रास्ते में जा रहा था तब उसने देखा कि एक गधा खेत में घास खा रहा है | यह देख कर पंडित ने अपने आधे धोती को फाड़ और उससे उस गधे को वही बांध दिया और दौड़ा-दौड़ा घर वापस आया और बैठकर भविष्यवाणी करने लगा कि  चने के खेत में तुम्हारा गधा बंधा हुआ है जाकर उसे पकड़ लो  |

पंडित की बात सुनकर धोबी चने के खेत में गया और उसने देखा कि हां सच में चने के खेत में उसका गधा बंधा हुआ खड़ा था | अपने गधे को वापस पाकर धोबी बहुत खुश हुआ और उसने पंडित को काफी दान दिया | धीरे धीरे पंडित काफी प्रसिद्ध हो गया और बहुत लोग उसे जानने लग गए |

एक दिन राज्य के महारानी का एक नौलखा हार चोरी हो जाता है | राजा को कुछ समझ में नहीं आता कि अब वह क्या करें | राजा के मंत्री राजा को सलाह देते हैं कि उसे उस भविष्यवक्ता पंडित के पास जाना चाहिए |

राजा उस भविष्यवक्ता पंडित को अपने राजमहल में बुलाता है | पंडित कहता है कि ठीक है मैं अगले दिन राजमहल में आऊंगा  | पंडित के आने की खबर से चोर काफी डर जाता है | चोर को लगता है कि जब पंडित भविष्यवाणी कर देगा और राजा को पता चल जाएगा कि यह हार मैंने चुराया है तो मेरा मरना तय है |

इसलिए वह चोर पंडित के पास रात को जाकर पंडित से कहता है कि  वह नौलखा हार मैंने चुराया है | आप यह बात कृपया करके राजा को ना बताएं  |
इसके जवाब में पंडित कहता है कि ठीक है मैं यह बात राजा को नहीं बताऊंगा लेकिन तुम वह नौलखा हार मुझे दे दो  |

चोर ने हार पंडित को दे दिया | पंडित हार को ले जाकर राजमहल के बगीचे में एक चिड़िया के घोसले में ले जा कर रख देता है |
सुबह भविष्यवाणी करते वक्त पंडित कहता है की  महारानी का हार एक चिड़िया के घोसले में रखा हुआ है |
राजा ने अपने सैनिकों को उस चिड़िया के घोसले में जाकर देखने को कहा |
राजा के सैनिक चिड़िया के घोसले में देखने गए | वहां उन्होंने महारानी का हार देखा |

अपने महारानी का हार मिल जाने से राजा बहुत खुश हुए उन्होंने उन्होंने ब्राह्मण को काफी दान दिया जिससे ब्राह्मण का घर खुशी-खुशी चलने लगा और उनकी गरीबी भी दूर हो गई |

गधा और धोबी

बहुत पुरानी बात है एक गांव में एक धोबी रहता था वह बहुत ही भोला और मंदबुद्धि था | उसका कोई संतान नहीं था |

एक दिन जब वह बाजार से घर आ रहा था तो उसने एक अध्यापक को अपने छात्र से कहते हुए सुना कि मैंने बड़े-बड़े गधों को आदमी बनाया है  |

यह सुनकर धोबी बहुत खुश हुआ वह दौड़ा-दौड़ा अपने पत्नी के पास गया और बोला हमारी कोई संतान नहीं है | मैंने एक आदमी को यह कहते हुए सुना है कि उसने बड़े-बड़े गधों को आदमी बनाया है | अगर उससे कह कर मैं अपने किसी गधे को आदमी बना दूं तो कितना अच्छा होगा फिर हमें बारिश में कोई चिंता नहीं करना पड़ेगा |

पत्नी को यह बात बहुत पसंद आई उसने तुरंत से हां कह दिया और यह भी कहा कि  हमारे सभी गधों में मोती सबसे अच्छा है आप उसे ही इंसान बनाइए  |

धोबी अपने गधे मोती को लेकर अध्यापक के पास गया और बोला  मैंने सुना है कि आप किसी भी गधे को इंसान बना सकते हैं मैं अपने गधे को इंसान बनाना चाहता हूं कृपया मेरी मदद करें  |

अध्यापक समझ गए कि धोबी मंदबुद्धि है | अध्यापक ने सोचा क्यों ना इस बेवकूफ से कुछ पैसे कमाए जाए अध्यापक ने कहा कि  ठीक है मैं इस गधे को आदमी बना दूंगा लेकिन इसके लिए तुम्हें मुझे ₹10000 देने होंगे  |

धोबी ने कहा  आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करुंगा मैं आपको ₹10000 लाकर दूंगा  |
अध्यापक ने कहा  ठीक है ₹10000 लेकर आना और 3 दिन बाद इस गधे को ले जाना  |
इस पर धोबी तैयार हो गया |

3 दिन बाद जब धोबी अध्यापक के पास अपने गधे को लेने आया तो अध्यापक ने धोबी से कहा कि  तुम्हारा गधा तो बहुत बुद्धिमान निकला वह इंसान बनते ही एक न्यायालय का जज बना दिया गया है  |

यह सुनकर धोबी के खुशी का ठिकाना ना रहा वह तुरंत गधे से मिलने न्यायालय के पास गया है | परंतु सच तो यह है कि वह गधा अध्यापक के घर में ही बंधा हुआ था | उधर जब धोबी न्यायालय पहुंचा तो वहां कार्यवाही चल रही थी | एक सुंदर सा जज कारवाही को सुन रहा था |

उसे देखकर धोबी को बहुत गर्व हो रहा था | वह निरंतर जज को देख कर हंस रहा था | पहले तो जज को लगा कि या कोई पागल है परंतु जब जज के पास जाकर बोला मोती तुम तो बड़े चालाक हो गए चलो घर मैं तुम्हें देख कर तुम्हारी माँ बहुत खुश होगी |

पहले तो जज ने उसे समझाया कि उसका नाम मोती नहीं है|
लेकिन धोबी नहीं माना वह उसे ले जाने की जिद करने लगा | इस से गुस्सा होकर न्यायालय के जज ने अपने आदमियों से कहा कि इस आदमी को बाहर निकाल दो |

इस अपमान के बाद धोबी तमतमाया हुआ अध्यापक के पास गया और जाकर बोला कि मोती बड़ा घमंडी हो गया है | उसे फिर से गधा बना दो |
इस पर अध्यापक ने कहा कि ठीक है 3 दिन बाद आना मैं उसे फिर से गधा बना दूंगा |
3 दिन बाद जब धोबी दुबारा अध्यापक के पास गया तो उसने मोती को धोबी के हवाले कर दिया |

मोती को दोबारा पाकर धोबी बहुत खुश हुआ | पहले तो उसने मोती की जमकर धुलाई की और उसके बाद उसे अपने साथ अपने घर ले गए

हाथी और चिड़िया

एक जंगल में एक पेड़ पर एक चिड़िया का घोंसला था | उस घोसलें में उस चिड़िया के 3 अंडे थे |

एक दिन एक हाथी उस जंगल में आ गया और हाथी उस पेड़ की एक शाखा को तोड़ के खाने लगा जिस पेड़ पर उस चिड़िया का घोंसला था |

चिड़िया ने रोते हुए हाथी से विनती किया और कहा की  वह इस शाखा को ना खाए क्योंकि इस पेड़ पर उसका घोंसला है और घोसलें में उसके ३ अंडे है  |

लेकिन हाथी नहीं माना और उसने कहा कि  अगर इस शाखा पर तुम्हारे अंडे हैं तो मैं कुछ नहीं कर सकता मैं इसी शाखा को खाऊंगा  इतना कह कर हाथी ने उस शाखा को तोड़ दिया जिससे चिड़िया का घोंसला और उसके तीनों अंडे नीचे गिर गए और फूट गए |

चिड़िया बहुत दुखी हुई और रोने लगी लेकिन फिर उसने यह प्रतिज्ञा किया कि वह हाथी से इस अन्याय का बदला लेगी |

चिड़िया वहां से उड़कर एक गांव में चले गई चली गई | उस गांव में एक मंदिर था | चिड़िया ने उस मंदिर में रखे भगवान के प्रतिमा के सामने जो मिठाई का भोग लगाया हुआ था चिड़िया ने उस मिठाई को अपने पंजो में उठा लिया और उससे लाकर चीटियों के एक बिल के पास फेंक दिया |

थोड़ी देर बाद बहुत सारी चींटियां उस मिठाई को खाने लगे चिड़िया इसी ताक में थी कि कब चीटियां उस मिठाई को खाए जैसे ही बहुत सारे चिट्टियां इस मिठाई को खाने लगी चिड़िया ने उस मिठाई को चींटी के साथ ही अपने पंजे में उठाया और ले जाकर हाथी के कान में फेंक दिया |

फिर क्या था थोड़ी देर में जब चीटियों ने हाथी के कान में काटना शुरु किया हाथी इधर-उधर पागलों की तरह कूदने लगा और एक गड्ढे में जा गिरा हाथी को बहुत चोट आई और हाथी समझ गया कि आज के बाद वह कभी किसी को कमजोर समझ कर उसके साथ अन्याय नहीं करेगा |

सोने का सिक्का देने बाला शंख

बहुत पहले की बात है एक बार पहलवान पुर नाम के गांव में एक गरीब परिवार रहता था | इस परिवार में सिर्फ तीन लोग थे सुरेश , सुरेश की पत्नी बिमला और सुरेश का बेटा राजू  | सुरेश बड़ा ही भोला भाला आदमी था और आसानी से बेवकूफ बन जाता था लेकिन उसकी पत्नी बड़ी ही चतुर औरत थी |

एक बार पहलवान पुर गांव में महाज्ञानी बाबा के कुछ शिष्य आए जिन्होंने अपनी शक्ति से गांव वालों के कई सारी समस्याओं को हल कर दिया और उन्होंने बताया कि वह सभी महाज्ञानी बाबा के शिष्य हैं और महाज्ञानी बाबा हिमालय के पहाड़ों पर रहते हैं |

सुरेश और उसकी पत्नी विमला गरीबी से बहुत दुखी थी इसलिए विमला  ने सुरेश को हिमालय के पर्वत पर जाकर महाज्ञानी बाबा से अपनी गरीबी को दूर करने के लिए कुछ उपाय बताने को कहा |

अपनी पत्नी विमला की बात मानकर सुरेश हिमालय पर्वत की ओर चला गया कई दिनों तक काफी मुश्किल यात्रा करने के बाद सुरेश हिमालय पर्वत पर पहुंचा और महाज्ञानी बाबा के पास जाकर अपना हाल और दुख महाज्ञानी को बताया |

महाज्ञानी बाबा को उस पर दया आ गई इसलिए महाज्ञानी बाबा ने उन्हें एक शंख दिया और कहा कि रोज सुबह को पूजा करने के बाद इस शंख से तुम्हें एक सोने का सिक्का मिल जाएगा जिससे तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी |

शंख को लेकर सुरेश बहुत खुशी हुआ खुश हुआ और महाज्ञानी बाबा को धन्यवाद कहकर सुरेश वहां से चला आया

वापस पहलवान पुर लौटने का रास्ता काफी मुश्किल था और सुरेश काफी थक चुका था इसलिए आराम करने के लिए सुरेश को कोई जगह चहिये था |

तभी सुरेश को एक घर से कुछ रौशनी आती हुए दिखाई देता है इसी कारण सुरेश थोड़ा आराम करने के उद्देश्य से मदद मांगता है उस घर के लोग तैयार हो जाते हैं और सुरेश को रहने के लिए एक कमरा दे देते हैं और रात को सुरेश को खाने के लिए थोड़े फल भी देते हैं | रात को खाना खाते समय उस घर के लोग  सुरेश से पूछते हैं कि उस सुरेश यहां क्यों आया था तब सुरेश उसे बताता है कि वह यहां महाज्ञानी बाबा से मिलने आया था और महाज्ञानी बाबा ने किस प्रकार एक शंख देकर उनकी गरीबी को दूर किया है |

सुरेश से शंख की बात जानकर उन लोगों के मन में लालच उत्पन्न हो गया और उन्होंने रात के अंधेरे में जब सुरेश सो रहा था तो सुरेश का शंख चुरा लिया और उस शंख के बदले एक साधारण सा शंख सुरेश के पास रखती है सुबह उठकर सुरेश उन लोगों का शुक्रिया करके अपने घर जाने को तैयार हूं अपने घर की ओर निकल पड़ा जब वह अपने घर पहुंचा तो अपने पत्नी से बात बताइए कि किस प्रकार ज्ञानी बाबा ने उसे  शंख  दिया है जिससे उनकी गरीबी मिट जाएगी |

अगले दिन दूसरे दिन सुबह को सुरेश पूजा पाठ करके शंख को हिलाता है लेकिन उससे कोई सोने का सिक्का नहीं निकलता है |
सुरेश को कुछ समझ में नहीं आता कि यह शंख काम क्यों नहीं कर रहा है और वह काफी दुखी हो जाता है |
सुरेश की पत्नी बड़ी समझदार थी इसलिए उसने सुरेश से पूछा कि जब महाज्ञानी बाबा ने तुम्हें शंख दे दिया था उसके बाद से तुम कहां कहां गए थे |

तो सुरेश ने पूरी बात बताई पूरी बात को ध्यान से सुन कर विमला समझ गई थी रात को जब सुरेश उस घर में सोने गया था तभी किसी ने उसका शंख चुरा लिया  था |
यह सब जानकर विमला सुरेश को कहती है कि तुम दोबारा उस घर में जाओ और उन लोगों से कहना कि अगली बार जब मैं ज्ञानी बाबा के पास गया था तब उन्होंने मुझे एक शंख दिया था जो कि ठीक से काम नहीं करता था |  इसलिए मैं फिर से उनके पास गया इस पर उन्होंने मुझे एक ऐसा शंख दिया है जो एक बार में दो सोने का सिक्का देता है |

सुरेश ने ऐसा ही किया वह उस घर में दोबारा गया और वहां के लोगों को जाकर उसने बताया कि वह दोबारा फिर से वह महाज्ञानी बाबा के पास गया था और उनसे एक दूसरा शंख लेकर आया है जो कि एक बार में दो सोने के सिक्के देता है |

यह बात सुनते ही उन लोगों को उन लोगों की लालच फिर से जाग गई और उन लोगों ने रात को जब सुरेश सो रहा था तब पुराने वाले शंख से नए वाले शंख को बदल दिया इस तरह सरेश को उसका शंख वापस मिल गया |
दोस्तों इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की बुद्धि का उपयोग करके हम हर समस्या का समाधान निकाल सकते है

हाथी और 6 अंधा आदमी की कहानी —

एक ज़माने में, एक गांव में , छह अंधा पुरुष रहते थे |
एक दिन गांववाले बहुत उत्साहित थे, गांववालों को उत्साहित जानकर जब उन अंधा पुरुषों ने गांववालों से पूछा कि क्या हो रहा है, तो उन्होंने उन्हें बताया, अरे, गांव में आज एक हाथी आया है !

उन्हें पता नहीं था कि हाथी क्या था, और इसलिए उन्होंने फैसला किया, हालांकि हम इसे देख नहीं पाएंगे, पर हम इसे महसूस कर सकते हैं। चलो चलते हैं। तो, वे सभी वहां गए जहां पर हाथी था, और उनमें से प्रत्येक ने हाथी  को छुआ |

पहला आदमी हाथी  के पैर को छूकर कहता है की  अरे, हाथी एक स्तंभ है, |
दूसरे व्यक्ति ने हाथी  के पूंछ को छूकर कहा की   ओह, नहीं! यह एक रस्सी की तरह है,  |

तीसरे आदमी  जो हाथी   के दाँत को छू रहा था उसने कहा की  , यह एक पेड़ की शाखा की तरह है, |
चौथे आदमी जो हाथी   के कान को छू रहा था उसने कहा  की  यह एक बड़ा हाथ पंखे की तरह  है।

पांचवां व्यक्ति ने हाथी के किनारे को छुआ और कहा की यह एक बड़ी दीवार की तरह है, |

हाथी की सूंड को छूने वाले छठे व्यक्ति ने कहा, अरे भाई यह तो एक पाइप की तरह है|
हाथी कैसा था ? इस बात पर वे सभी एक दूसरे से तर्क करने लगे  और उनमें से प्रत्येक ने ज़ोर देकर कहा कि वह सही है।

वे लंबे समय से बहस कर रहे थे और अब उन्हें क्रोध आ रहा था | उनका वाद-विवाद एक लड़ाई में बदलने ही बाला था की तभी एक  बुद्धिमान व्यक्ति, जो हाथी को देखने आया था, उसने पूछा कि क्या मामला है जो तुम लोग आपस में झगड़ा कर रहे हो |

उन्होंने उत्तर दिया, की यह हाथी कैसा दिखता है इस बात पर हम आपस में सहमत नहीं है , और उनमें से प्रत्येक ने बुद्धिमान व्यक्ति को बताया  कि उनके अनुसार  हाथी कैसा दिखता है |

बुद्धिमान व्यक्ति उन सभी को सुनने के बाद मुस्कुराया और शांति से उनसे समझाया, आप सभी सही हैं लेकिन आप के बात में अंतर होने का कारण यह है कि आप में से प्रत्येक ने हाथी के अलग हिस्से को छुआ हैं इसलिए आप सबका अनुभव अलग हैं। वास्तव में हाथी में ये सभी विशेषताएं हैं: इसके पैर खंभे की तरह है, इसकी पूंछ एक रस्सी की तरह है, उसके दाँत वृक्ष की शाखाओं की तरह हैं, उसके कान एक हाथ पंखा की तरह हैं, और इसकी सूंड  एक  पाइप की तरह है।

बुद्धिमान व्यक्ति के बात को ठीक से समझने के बाद उन सभी अंधे पुरुष को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन सभी ने बुद्धिमान व्यक्ति  को उनकी मदद करने के लिए धन्यवाद दिया | अब उन सभी अंधे पुरुष को यह पता था की वास्तव में वे सभी सही थे |

इस कहानी से हमे एक बहुत जरूरी संदेश मिलता है  जिसका हम सभी के जिंदगी में बहुत अधिक जरूरत है हम सभी रोज ही किसी न किसी से असहमत होते है और बहस करने लगते है |
यदि आप किसी के साथ सहमत नहीं हैं,  क्योंकि आप को लगता है की वो गलत है तब भी  वे क्या कहते है इसमें कुछ सच्चाई हो सकती है। क्योंकि  कभी-कभी हम सच्चाई को  एक अलग दृष्टिकोण से देखते है और दूसरे लोग उसे अलग दृष्टिकोण से देखते है इस कारण हम एक दूसरे को समझ नहीं सकते है और अंधा पुरुषों की तरह बहस करने लगते है |

हमें यह समझना चाहिए कि उनके पास अपने स्वयं के अनुभव हैं इसलिए  वे इस तरह से सोचते हैं। दो अलग लोगों के विचार में अंतर होना एक साधारण बात है अगर हम इसे स्वीकार कर सकते हैं, तो हमारा हिंसक तर्कों में पड़ने की संभावना  बहुत कम है।

बुराई पर अच्छाई की जीत 

एक जंगल में एक भेड़िया रहता था वह बहुत ही धूर्त और चालाक स्वाभाव का था जंगल के सारे जानवर उसके व्यवहार को जानते थे कोई भी जानवर उससे दोस्ती नही करना चाहता था लेकिन जब जंगल में कोई भी नया जानवर रहने आता था तो तो वह दुष्ट भेड़िया अपनी मीठी मीठी बातो से बहका कर दोस्ती कर लेता था बाद में उन जानवरों के बच्चो को अपना भोजन बनाता था,

जिसके कारण सभी जानवर उसके दुष्ट व्यवहार को जान गये थे और कोई भी जब नया जानवर जंगल में आता था तो सभी पहले ही उसके बारे में बता देते थे जिसके कारण अब सभी जानवर उस दुष्ट भेड़िये के चगुल से बच जाते थे

समय बीतता गया अब अब उस भेडियो को भोजन मिलना बंद हो गया जिसके कारण वह दिन प्रतिदिन दुबला होता जा रहा था इसी बीच एक दिन एक हिरन का परिवार अपने छोटे छोटे चार बच्चो के साथ उस जंगल में रहने को आये तो उस चालाक भेड़िये की नजर उस हिरन के बच्चो पर पड़ी तो उसकी आखे चमक गयी और उसे हिरन के बच्चो के रूप में अपना भोजन दिखाई देने लगा

अब उस भेड़िये के एक पेड़ के नीचे अपने आखे बंद कर ध्यान लगा कर बैठ गया और उस हिरन के परिवार का इन्तजार करने लगा जब हिरन अपने बच्चो के साथ उसके पास आते दिखाई दिया तो वह भगवान का नाम जोर जोर से लेने लगा जिसकी आवाज़ सुनकर उस हिरन के सारे बच्चे वही रुक कर देखने लगे तो हिरन ने उस भेड़िये से मदद लेनी चाही,

लेकिन हिरन भेडियो के व्यव्हार को भली बहती जानते थे भेड़िया चाहे कितनी ही भक्ति क्यू न कर ले लेकिन वह जानवरों का शिकार करना नही भूल सकते फिर भी हिरन भी काफी अक्लमंद थे और उन्हें जंगल के जानवर उस भेड़िये के बारे में हिरन को पहले ही बता चुके थे जिसके चलते हिरन का परिवार उस भेड़िये को सबक सिखाना चाहते थे

इसलिए हिरन ने उस धूर्त भेडियो को पुकारा, बार बार पुकारने पर भेड़िये ने अपना ध्यान तोड़कर अपनी आखे खोली तो उसे हिरन का पूरा परिवार अपने आखो के सामने दिखाई दिया तो वह मन ही मन बहुत खुश हुआ क्यूकी उसे तो अब विश्वास हो गया था की उसके भोजन खुद चलकर उसके पास आये है

तब हिरन ने उस भेड़िये से कहा की आप बहुत धार्मिक लगते हो तो भेड़िये ने कहा की अब मेरी उमर हो गयी है इसलिए मै अब भगवान में अपना ध्यान लगाता हु जिससे की जिन्दगी में किये सारे पाप धुल जाए लेकिन आप लोग कौन हो लगता है इस जंगल में नए हो तो तब हिरन ने अपने बारे में बता दिया और बोला की हम यह रहने आये है

और इसके बाद हिरन ने भेड़िये से रहने के लिए अच्छे जगह के बारे में पूछा तो भेड़िये ने तुरंत अपने गुफा के पास ले गया और बोला की आप लोग चाहो तो यह रह सकते हो तो हिरन का परिवार उस गुफा में रहने को राजी हो गये है

इसके बाद तो भेड़िया मौके की तलाश में रहने लगा की कब हिरन अपने बच्चो से दूर हो और फिर वह हिरन के बच्चो को अपना भोजन बनाये, लेकिन हिरन अपने बच्चो को पहले से ही सचेत कर रखा था

एक दिन की बात है दोपहर में हिरन घास चरते चरते बहुत दूर निकल गया तो मौके का फायदा उठाते हुए भेड़िये ने हिरन के बच्चो के उपर हमला कर दिया तो हिरन के बच्चे बड़ी चालाकी से उसके चंगुल से भाग निकले और वे जंगल में भागने लगे तो भेड़िया ने उनका पीछा किया तो वे भागते भागते एक गहरे खायी की तरफ भागे वे इतने तेजी से छलांग मार रहे थे की भेडिये को भागते हुए वह गहरी खायी नही दिखाई दिया और उसी खायी में बहुत तेजी से गिरा

खाई इतनी गहरी थी थी की कोई भी अंदर नही जा सकता था इसके बाद जंगल के सारे जानवर वहा इक्कट्ठा हो गये और सब भेड़िये की हालत पर हस रहे थे इतने में हिरन का परिवार भी वहा आ पंहुचा और सारी बातो का पता चला,

लेकिन भेडियो को अब अपनी गलती का अहसास हो रहा था उसने सबसे विनती की की उसे बचा ले लेकिन कोई भी जानवर उन्हें बचाने को राजी नही हुआ तो हिरन ने उस भेड़िये से कहा की लोग तुम्हे सिर्फ एक ही शर्त पर बचा सकते है जब तुम अपनी दुष्टता छोड़ दोंगे और यहाँ से निकलने के बाद इस जंगल से चले जाओगे तो भेड़िया उनकी बातो को मानने को तैयार हो गया तो हिरन के कहने पर हाथियों ने अपनी सूड की सहायता से पेड़ की टहनी तोड़कर खाई में डालने लगे जिससे टहनी के सहारे भेड़िया ऊपर आ गया

और फिर सबसे माफ़ी मांगकर तुरन्त जंगल छोड़कर वह हमेशा के लिए लिए चला गया अब पूरे जंगल में शांति का माहौल था सभी हसी ख़ुशी एक एक साथ फिर से रहने लगे

बच्चों की कहानिया

एक छोटे से गांव में, एक छोटा लड़का अपने पिता और मां के साथ रहता था वह अपने मां बाप का एकलौता बेटा था |

लेकिन इस छोटे लड़के में कई सारी बुरी आदतें थी जिसके कारण उसके माता पिता बहुत चिंतित रहते थे यह छोटा लड़का बहुत जल्दी गुस्सा करता था और गुस्से में आकर किसी के साथ भी झगड़ा कर लेता था और उन्हें  अपशब्द कह देता था |

यह छोटा लड़का अपने पड़ोस के बच्चों के साथ और अपने स्कूल के बच्चों के साथ कई बार मारपीट कर चुका था कई बार लोग इस बच्चे की शिकायत लेकर उनके माता पिता के पास आते थे जिससे उनके माता-पिता को बहुत दुख होता था उनके  पड़ोसी भी इस बच्चे से परेशान हो चुके थे |

अपने गुस्से के कारण इस बच्चे ने दूसरों को अपशब्द कहकर जो दुख पहुंचाया था उसके बारे में इस छोटे बच्चे  को जरा सा भी अंदाजा नहीं था लेकिन दूसरे बच्चे अब इस छोटे बच्चे से न तो बात करना चाहते थे और ना ही इसके साथ खेलना या रहना चाहते थे |

छोटे बच्चे के माता पिता ने कई बार अपने बच्चे को समझाने का प्रयास किया और इस बच्चे के अंदर दयालुता को विकसित करने की चेष्टा की लेकिन वह इस काम में असफल रहे |

छोटे बच्चे के माता पिता ने कई बार अपने बच्चे को समझाने का प्रयास किया और इस बच्चे के अंदर दयालुता को विकसित करने की चेष्टा की लेकिन वह इस काम में असफल रहे वह इस काम में असफल रहे

एक दिन उस छोटे बच्चे के चाचा उनके घर आए उन्होंने बच्चे की समस्या को समझकर उस बच्चे को एक सीख देने का विचार किया |  वह बाजार से एक थैले में कील खरीद कर ले आए और छोटे बच्चे को यह थैला देकर कहा कि कि आज के बाद जब तुम्हें बहुत ज्यादा गुस्सा आए तब तुम इस थैले से एक कील  को निकालकर दीवार पर हथौड़े से ठोक देना |

छोटे बच्चे को यह काम काफी मनोरंजक लगा इसीलिए वह इस काम के लिए तैयार हो गया अगली बार से जब भी उस छोटे बच्चे को किसी बात पर गुस्सा आता तो वह दौड़ कर एक कील  निकालकर दीवाल पर उसे ठोक देता पहले दिन में उसने 15 किल ठोक दिए और इसी तरह कई दिनों तक यह सब चलता रहा लेकिन धीरे-धीरे उसका इस काम से मन भर गया इसलिए दीवाल पर वह पहले से कम कील ठोकने लगा |

उसे अब दीवाल पर कील ठोकने में बिल्कुल मजा नहीं आ रहा था इसलिए उसने यह बात अपने चाचा को बताया तो उसके चाचा ने उसे सलाह दिया कि अगर अब तुम्हें गुस्सा आए तो तुम दीवार  से एक कील  को  खींच कर बाहर निकाल देना कई दिनों तक वह दीवाल से कुछ किले खींच-खींच कर निकालता रहा लेकिन अंत में कई सारे किलों को वापस नहीं निकाल पाया |

अब उस छोटे लड़के ने अपने चाचा से यह बात बताया कि वह दीवार से कुछ किलों को वापस नहीं निकाल पा रहा है तब उसके चाचा उसे दीवार के पास ले गए और जिन किलों  को वह वापस निकाल चुका था उनकी किलों  के कारण बने हुए निशान की ओर इशारा करके उसके चाचा ने उससे पूछा  की दीवार पर क्या है तो छोटे लड़के ने उत्तर दिया की दीवार पर एक छेद है |

तब उस छोटे बच्चे के चाचा ने उसे बड़े प्यार से समझाया कि तुम्हारा गुस्सा इस कील  की तरह है  जिसे तुमने दूसरे लोगों के ऊपर हथौड़े से ठोक दिया है अब तुम उनसे जाकर माफ़ी तो मांग सकते हो मतलब कि तुम कील को बाहर निकालने का प्रयास तो कर सकते हो लेकिन अगर कील वापस निकल भी जाए तो दीवार फिर से पहले जैसा नहीं हो सकता उसी तरह अगर तुम किसी से माफी मांग भी लेते हो तो भी तुम्हारा रिश्ता उनसे फिर पहले जैसा नहीं हो सकता है |

इसके साथ ही तुम चाह कर भी सभी किलों  को दोबारा वापस नहीं निकाल पाए इसका मतलब यह है कि तुम सभी रिश्तो को वापस पहले जैसा ठीक नहीं कर पाओगे और सबसे माफी मांग कर भी तुम्हें सबसे माफी मिल जाए इसकी संभावना बहुत कम है इसलिए यह बहुत जरूरी है कि तुम अपने गुस्से पर नियंत्रण रखो और दूसरों से बात करते समय सोच विचारकर शब्दों का प्रयोग करो छोटे लड़के को यह बात बहुत अच्छी तरह से समझ में आ गया और उसने इस प्रेरणा को अपने पूरे जीवन याद रखने का वचन दिया |

मुल्ला नसरुद्दीन

सभी गांव वाले मुल्ला नसरुद्दीन   के पास जाकर कहते हैं कि आप बड़े ज्ञानी हैं आप अपने ज्ञान हमारे साथ बांटिए |
मुल्ला नसरुद्दीन  गांव वालों  की चालाकी समझ जाते है |     |    मुल्ला नसरुद्दीन   सोचते है की गांव बालों को एक सीख देना चाहिए ताकी ये मुझे बार – बार परेशान न करे   |

मुल्ला नसरुद्दीन  गांव वालों  से कहते है की ठीक है मै समय समय पर पहुंच जाऊंगा अगले दिन मुलाकात समय पर सही जगह पहुंच जाता है और जाकर गांव वालों से पूछता है कि आज हम किस बारे में बात करने वाले हैं इस सवाल के जवाब में गांव वाले कहते हैं कि हमें नहीं पता इस पर मुल्ला नसरुद्दीन  गांव वालों पर  काफी भड़क जाता है और गांव वालों से कहता है कि जब तुम्हें पता ही नहीं कि आज किस बारे में बात करना है तो मैं फिर क्या बोलूंगा यह बोलकर मुल्ला नसरुद्दीन  वहां से चला जाता है

अगले दिन गांव वाले दोबारा  मुल्ला नसरुद्दीन के पास जाते हैं और उनसे दुबारा आने की प्रार्थना करते हैं  मुल्ला तैयार हो जाता है

अगले दिन सुबह मुल्ला दुबारा सही जगह पर पहुँच जाते  हैं और गांव वालों से पूछते हैं कि बताओ क्या तुम सबको पता है क्या आज हम किस बारे में बात करने वाले हैं इस पर सब गांव वाले कहते हैं हां हमें पता है तो मुला कहते हैं कि जब पता ही है तो फिर मैं क्या बोलूंगा यह बोलकर मुल्ला  वहां से वापस चला जाता है

गांव वाले फिर भी मुल्ला  को नहीं छोड़ते वह फिर मुल्ला  के पास जाते हैं और उनसे एक आखरी बार आने को कहते हैं

मुल्ला फिर से गांब बालों  के पास जाते हैं और इस बार मुल्ला जब गांव वाले से पूछते हैं कि आज हम किस बारे में बात करने वाले हैं ? क्या तुम्हें पता है ?

तो आधी गांव वाले कहते हैं कि हां हमें पता है और आधे कहते हैं कि नहीं हमें पता नहीं है
इस पर मुल्ला  कहते हैं कि जिन्हें पता है वह उन्हें बता दे जिसे पता है वह जिन्हें नहीं पता
यह कहकर मुल्ला  नसरुद्दीन वहां से चला जाता है |

जीवन में पैसे का महत्व एक प्रेरक कहानी 

जीवन में पैसा रुपया धन ही सबकुछ नही होता है और पैसे के बिना भी कुछ नही होता है इसी सोच पर आज आप सबको मै एक Moral Kahani  बताने जा रहा हु जो की कही न कही हम सबकी सोच पर ही आधारित है इसलिए आप सभी इसे पढ़े और आप सबको यह प्रेरित करने वाली हिन्दी कहानी कैसा लगा अपने विचार प्रस्तुत करे

एक लड़का था जो अपने माता पिता के साथ एक गाव में रहता था वह लड़का पढने लिखने में तेज था लेकिन उसके दोस्तों की सोच थी की यदि वे पढ़लिखकर कोई नौकरी प्राप्त कर ले तो उनका जीवन सुखमय हो जाएगा और इस दुनिया की कोई भी वे सुख अपने धन दौलत से खरीद सकते है लेकिन वह लड़का अक्सर उनके बातो से सहमत नही होता था और जिसके कारण उसके मन में अनेक विचार आते रहते थे

एक दिन की बात है वह इसी बात का जिक्र उसने अपने पिताजी से किया और कहा की पिताजी क्या अगर हमारे पास ढेर सारा धन हो जाए तो क्या हम दुनिया के सबसे ख़ुशी इन्सान हो सकते है तो यह बात सुनकार उस लड़के के पिताजी ने कहा की ठीक है शाम को जब मै अपने काम से वापस लौटकर आऊंगा तो इसके बारे में हम बात करते है

और फिर शाम को उस लड़के के पिताजी ने अपने बगीचे के लिए आम का एक नन्हा सा पौधा लाये और फिर अपने बेटे के साथ अपने बगीचे में उसे लगाने जाते है फिर अपने बेटे के साथ मिलकर उस आम के पौधे को जमीन में लगा देते है

तो इसके बाद उस लड़के के पिताजी कहते है की देखो बेटा तुमने आज सुबह पूछा था की क्या धन से ही सारे सुख प्राप्त किया जा सकता है तो इस आम के पेड़ को देखो और सोचो की  क्या हमने इसे बेकार में ही लगा दिया है क्यूकी इस पौधे को पेड़ बनने में काफी समय लगेगा और फिर इसपर फल आने में भी वक्त लगेगा और हो सकता है की इसके फल हमे खाने को मिले या ना मिले इससे हम सभी यही सोचते है की यह समय की बर्बादी है

तो ठीक है तुम जरा सोचो अगर सब लोग यही सोचने लगे की भला हम क्यू पेड़ लगाये अगर हमे फल खाना ही है तो हम अपने पैसो से बाजार से फल खरीदकर कहा सकते है जो की बिना समय गवाए तुंरत मिल जाता है

तो सोचो जब सबका यही सोच होगा की धन से सबकुछ ख़रीदा जा सकता है ऐसे में कोई भी इन पेड़ो को नही लगाएगा तो एक दिन ऐसा भी आएगा की इस धरती पर सबके पास तो खूब धन दौलत तो सकता है लेकिन जब फल देने वाले पेड़ पौधे नही होंगे तो सोचो भला इन पैसो का क्या मोल जब इनसे खाने के लिए भोजन और फल आदि न मिले तो सबसे पहले हम सभी को अपनी सोच बदलनी चाहिए तभी इन पैसो का कीमत हो सकता है

अपने पिता से यह सब बाते सुनकर उस लड़के को समझ में आ गया था की हम सब तो यही सोचते है की चलो अगर सब ढेर सारा धन कमा भी ले तो धन का कोई मोल नही होता जब तक इस धन की कोई कीमत ही न हो

शिक्षा –
दोस्तों इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है की इस संसार में प्रकृति का एक संतुलन है हर चीज में प्रकृति अपना संतुलन बना कर चलती है जैसे रात के बाद दिन, गर्मी के बाद ठंडी, धुप छाव, पेड़ पौधे, नदिया तालाब, जीव जन्तु, नदिया पहाड़ हर चीज में एक संतुलन है लेकिन इन्सान आज के समय में सिर्फ पैसे के मोल पर वो हर चीज पाना चाहता है चाहे वो मनमाने तरीके से ही क्यू न हो, दोस्तों सोचो इस धरती के इन्सान यही सोचने लगे तो कोई भी किसान खेतो में अन्न नही पैदा करना चाहेगा, सब बस पैसो कमाने के पीछे ही लग जाए तो ये दुनिया पूरी तरह नोटों से भर जायेगी लेकिन अन्न के अभाव में इन नोट रद्दी कागज के समान ही होंगे

इसलिए इन्सान की जरूरत ये कागज के नोट या धन नही इन्सान की जरूरत तो सिर्फ रोटी कपड़ा और मकान है और जो इन्सान अपनी इन मुलभुत जरुरतो को पूरा कर लेता है वही इन्सान आज के समय में सबसे ज्यादा खुश होता है क्यूकी अक्सर यह कहा जाता भी है हम पैसो से सुखसुविधा तो खरीद सकते है लेकिन इन पैसो से मन की शांति कभी नही खरीद सकते है सोचिये जब प्राचीनकाल में धन नही थे तो क्या लोग सुखी नहीं थे














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