Best Short story for children 1 in Hindi मनोरंजक कहानियाँ

मनोरंजक कहानियाँ

हलो दोस्तो , कैसे हो सबी ई होप सब बडिया होंगे तो आज मै आप सबी को कुश entertainment stories मजेदार कहानिया show कर रहा हू only for kids इन hindi तो please आखिर तक जरूर पडेगा इन stories को।

Best entertainment stories मनोरंजक कहानियाँ for kids in Hindi

सुगंध और खनखनाहट

                 एक गरीब मजदूर था। वह खेतो में काम करता था एक दिन शााम को वह अपना काम खत्म करके। घर लौट रहा था रास्ते के किनारे मिठाई की एक दुकान थी। मिठाईयो की मीठी मीठी सुगंध रास्ते भर आ रही थी। इससे मजदूर के मुह में पानी आ गया। वह दुकान के पास गया। कुछ देर वहाँ खड़ा रहा उसके पास थोड़े पैसे थे। पर वे मिठाई खरीदने के लिये काफी नही थे। वह खाली हाथ लौटने लगा तभी उसे दुकनदार की कर्कश आवाज सुनाई दी। "रूको! पैसे तो देते जाओ।"मनोरंजक कहानियाँ
पैसे ? काहे के पैसे? मजदूर ने पूछा?
मिठाई के और काहे के! दुकनदार ने कहा,
"पर मैने तो मिठाई खाई नही! उसने जवाब दिया।
"लेकिन तुमने मिठाई की सुगंध तो ली है न!" दुकनदार ने कहा, "सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है।"
                  बेचारा मजदूर घबरा गया। वहाँ खड़ा एक होशियार आदमी यह सुन रहा था। उसने मजदूर को अपने पास बुलाया उसके कान में फुसफुसाकर कुछ कहा। उस आदमी की बात सुनकर मजदूर का चेहरा खिल उठा वह दुकनदार के पास गया और अपनी जेब के पैसे खनखनाने लगा पैसो की खनखनाहट सुनकर दुकनदार खुश हो गया। चलो निकालो पैसे। मजदूर ने कहा, "पैसे तो मैने चुकता कर दिए"
दुकनदार ने कहा, "अरे तुमने पैसे कब दिए?"
                 मजदूर ने कहा, "तुमने पैसो की खनखनाहट नही सुनी अगर मिठाई की सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है। तो पैसो की खनखनाहट सुनना पैसे लेने के बराबर है।" हा हा हा वह गर्व से सर ऊँचा किए कुछ देर वहाँ खड़ा रहा। फिर मुस्कराता हुआ चल गया।
शिक्षा -जैसे को तैसा

डब्बू और नाई

              डब्बू नाम का एक छोटा लड़का था। वह हमेशा होशियारी दिखाता था।
एक दिन उसे नाई से मजाक करने की सूझी वह सुबह सुबह नाई best story
की दुकान में पहुँचा। शाीशे के सामने कुर्सी पर बैठ गया नाई ने पूछा, "क्या बात है डब्बू?" डब्बू ने शान से कहा, "जरा मेरी दाढ़ी बना दो।"
               नाई को डब्बू की शैतानी समझ में आ गई। उसने कहा, "हाँ जरूर बनाऊँगा। सरकार इसके बाद नाई ने डब्बू के कंधो पर तौलिया लपेट दिया। उसने ब्रश से उसके चेहरे पर झागदार साबुन लगाया फिर वह अपने अन्य काम में लग गया।
                डब्बू ने कुछ देर तक इतंजार किया चेहरे पर साबुन पोते ज्यादा देर तक बैठे रहना। उसके लिए मुश्किल हो गया उसने नाई पर नाराज होते हुए कहा आखिर तुमने मुझे इस तरह क्यों बिठा रखा है।
                यह सुनकर नाई हँस पड़ा। उसने शांति से जवाब दिया इसलिए कि अभी में तुम्हारी दाढ़ी उगने का इंतजार कर रहा हूँ।
शिक्षा -दूसरे का मजाक उडानेवाला खुद मजाक का पात्र हो जाता है।

गधे की परछाई

                     गर्मियो के दिन थे। तेज धूप में एक यात्री को एक गाँव से दूसरे गाँव जाना था। दोनो गाँव के बीच एक निर्जन मैदान था यात्री ने किराए पर एक गधा ले लिया। गधा आलसी था। वह चलते चलते बार बार रूक जाता था। इसलिए गधे का मालिक उसके पीछे पीछे चल रहा था। जब गधा रूकता तो वह उसे डंडा मारता गधा फिर आगे चलने लगता था। best story
                    चलते चलते दोपहर हो गई। आराम करने के लिए वे रास्ते में रूक गए वहाँ आस पास कोई छाया नही थी।
इसलिए यात्री गधे की परछाई मे बैठ गया।
                    गर्मी के कारण गधे का मालिक भी बहुत थक गया था। वह भी गधे की परछाई में बैठना चाहता था। इसलिए उसने यात्री से कहा, "देखो भाई यह गधा मेरा है। इसलिए गधे की परछाई मेरी है। तुमने केवल गधे को किराए पर लिया है उसकी परछाई से हमारा कोई सौदा नही हुआ है। इसलिए मुझे गधे की परछाई में बैठने दो।"
                     यात्री ने कहा, "मैंने पूरे दिन के लिए गधे को किराए पर लिया है।
                   इसलिए पूरे दिन गधे की परछाई का उपयोग करने का भी मेरा ही अधिकार है। तुम गधे से उसकी परछाई को अलग नही कर सकते"
दोनो आदमी आपस में झगड़ने लगे फिर उनमे मारपीट शुरू हो गई।
इतने में गधा भााग खड़ा हुआ। वह अपने साथ अपनी परछाई भी ले गया।
शिक्षा -छोटी छोटी बातो पर लड़ना अच्छा नही।

बादाम किसे मिला

                     एक दिन दो लड़के सड़क के किनारे किनारे जा रहे थे। तभी उन्हे जमीन पर गिरा हुआ एक बादाम दिखाई दिया। दोनो उस बादाम को लेने के लिए दौड़ पड़े। बादाम उनमे से एक लड़के के हाथ लगा। दूसरे लड़के ने कहा, "यह बादाम मेरा है। क्योंकि सबसे पहले मैने इसे देखा था।"
                     यह मेरा है। बादाम लेनेवाले लड़के ने कहा, "क्योंकी मैंने इसे उठाया था।" इतने मे वहाँ एक चलाक लंबा सा लड़का आ पहुँचा। best story
                      उसने दोनो लड़को से कहा, "बादाम मुझे दो। मैं तुम दोनो का झगड़ा निपटा देता हूँ।" लंबे लड़के ने बादाम ले लिया उसने बदाम को फोड़ डाला। उसके कठोर छिलके के दो टुकड़े कर दिये। छिलके का आधा हिस्सा एक लड़के को देकर उसने कहा, "लो यह आधा भाग तुम्हारा दूसरा भाग दूसरे लड़के के हाथ मे थमाकर बोला और यह भाग तुम्हारा। फिर लंबे लड़के ने बादाम की गिरी मुहँ मे डालते हुए कहा, "यह बाकी बचा हिस्सा मैं खा लेता हूँ। क्योंकी तुम्हारा झगड़ा निपटाने मे मैंने मदद की है।
शिक्षा -दो के झगड़े मे तीसरे का फायदा।

मूर्खता का फल

                     एक बढ़ई था। एक बार वह लकड़ी के लंबे लट्ठे को आरे से चीर रहा था। उसे इस लट्ठे के दो टुकडे़ करने थे। सामनेवाले पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था। वह काफी देर से बढ़ई के काम को बडे़, ध्यान से देख रहा था। बढ़ई ने दोपहर का भोजन करने के लिये काम बंद कर दिया। अब तक लट्ठे का केवल आधा ही भाग चीरा जा चुका था। इसलिए उसने लट्ठे के चिरे हुए हिस्से में एक मोटी सी गुल्ली फँसा दी। इसके बाद वह खाना खाने चला गया।
                      बढ़ई के जाने के बाद बंदर पेड़ से कूदकर नीचे आया। वह कुछ देर तक इधर-उधर देखता रहा। उसकी नजर लकड़ी की गुल्ली पर गड़ी हुई थी। वह गुल्ली के पास गया और उसे बड़ी उत्सुकता से देखने लगा। वह अपने दोनों पाँव लट्ठे के दोनों ओर लटकाकर उस पर बैठ गया। इस तरह बैठने से उसकी लंबी पूँछ लकडी के चिरे हुए हिस्से में लटक रही थी। उसने बड़ी उत्सुकता से गुल्ली को हिलाडुला कर देखा फिर वह उसे जोर-जोर से हिलाने लगा। अंत में जोर लगा कर उसने गुल्ली खींच निकाली। ज्योंही गुल्ली निकली की लट्ठे के दोनो चिरे हुए हिस्से आपस में चिपक गये। बंदर की पूँछ उसमे बुरी तरह से फंस गयी। दर्द के मारे बंदर जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसे बढ़ई का डर भी सता रहा था। वह पूँछ निकालने के लिए छटपटाने लगा। उसने जोर लगाकर उछलने की कोशिश की, तो उसकी पूँछ टूट गयी। अब वह बिना पूँछ का हो गया। best for kids 
शिक्षा -अनजानी चीजो से छेड़छाड़ करना खतरनाक होता है।

कुत्ते की आदत छूटी

                 एक बार दो गायें चारा खाने के लिए गौशाला गईं। वहाँ पहुँचने पर अपनी नाँद में उन्हें एक कुत्ता बैठा हुआ दिखाई दिया। गायों को देखकर कुत्ता जोर-जोर से भौंकने लगा। उसे लगा कि भौंकने से गायें डरकर भाग जाएँगी।
                उनमें से एक गाय ने कुत्ते से कहा, "देखो भाई, हमें भूख लगी है। हमें घास खा लेने दो। यह हमारा भोजन है। गाय की बातें सुनकर कुत्ता चिढ़ गया। वह और जोर-जोर से भौंकने लगा। बेचारी गायें वापस लौट आईं।
                बाद में एक गाय जाकर एक बैल को बुला लाई। बैल ने कुत्ते से कहा, "अरे भाई, तू तो घास खाता नहीं! यह गायों का चारा है। तू यहाँ से चला जा।"best for kids
पर बैल की बात का कुत्ते पर कोई असर नहीं पड़ा। वह जमकर वहीं डटा रहा। यह देखकर बैल को गुस्सा आ गया। वह जोर-जोर डकारने लगा। अपने सींग तानकर वह कुत्ते पर वार करने के लिये तैयार हो गया। कुत्ते ने देखा कि बैल गुस्से में है। इसलिए वह तुरंत दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ।
शिक्षा -दूसरे की चीज पर अधिकार जताना अच्छा नही।

बाघ की बन आई

                   एक जंगल मे चार गायें रहती थी। उनमें गाढ़ी मित्रता थी। वे चारों हमेशा साथ-साथ रहती थीं। एक साथ घूमने जाती साथ-साथ चरने जातीं। वे बड़े सुख से रहती थीं। कभी कोई जंगली जानवर उन पर हमला करता, तो वे चारों मिलकर उसका सामना करतीं। और उसे मारकर भगा देतीं।
                   उसी जंगल में एक बाघ भी रहता था। उसकी नजर इन गायों पर थी वह गायों को मार कर खा जाना चाहता था। लेकिन उनकी एकता देखकर उन पर हमला करने की उसकी हिम्मत नही होती थी।
                    एक दिन गायों में आपस में झगड़ा हो गया। वे एक-दूसरे से नाराज हो गईं। उस दिन हर गाय अलग-अलग रास्ते से जंगल में चरनें गई। बाघ तो बहुत दिनों से इसी ताक में बैठा था। उसने एक-एक कर सभी गायों को मार डाला और उन्हे खा गया।best for kids
शिक्षा -एकता में ही शक्ति है, फूट से ही विनाश होता है।

नकलची कौआ

                     एक पहाड़ की ऊँची चोटी पर गरूड़ रहता था। पहाड़ की तलहटी में एक बड़ा पेड़ था। पेड़ पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। एक दिन तलहटी में कुछ भेंडे़ घास चर रही थीं। गरूड़ की नजर एक मेमने पर पड़ी। वह पहाड़ की चोटी से उड़ा। तलहटी में आकर मेमने पर झपट्टा मारा। उसे चंगुल में लेकर उड़ते हुए वह फिर घोंसले में लौट गया।
गरूड़ का यह पराक्रम देखकर कौए को भी जोश आ गया। उसने सोचा, "यदि गरूड़ ऐसा पराक्रम कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता?"
                    दूसरे दिन कौए ने भी एक मेमने को तलहटी में चरते हुए देखा। उसने भी उड़ान भरी और आसमान में जितना ऊपर तक जा सकता था, उड़ता चला गया। फिर उसने मेमने को पकड़ने के लिए गरूड़ की तरह जोर से झपट्टा मारा। मगर मेमने तक पहुँचने की बजाय वह एक चट्टान से जा टकराया। उसका सिर फूट गया, चोंच टूट गई और उसके प्राण-पखेरू उड़ गए।
शिक्षा -बिना सोचे-समझे किसी की नकल करने से बुरा हाल होता है।

बेवकूफ शेर

                      एक जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन उसे बहुत भूख लगी। वह गुफा से बाहर आया और किसी जानवर की तलाश करने लगा। उसे दूर एक पेड़ के नीचे खरगोश दिखाई दिया। वह पेड़ की छाया में मजे से खेल रहा था। शेर खरगोश को पकडने के लिये आगे बढ़ा। खरगोश ने शेर को अपनी ओर आते हुए देखा, तो वह जान बचाने के लिये भागने लगा।best for children 
                      शेर ने उसका पीछा किया और लपककर उसे धर दबोचा। शेर ने ज्योंही खरगोश को मारने के लिए पंजा उठाया कि उसकी निगाह हिरन पर पड़ी। उसने सोचा कि इस नन्हे खरगोश से मेरा पेट भर नही सकता। इससे तो हिरन ही अच्छा रहेगा। शेर ने खरगोश को छोड़ दिया। वह हिरन का पीछा करने लगा। हिरन ने शेर को देखा, तो जोर-जोर से छलाँग लगाता हुआ भाग खड़ा हुआ। शेर हिरन को नही पकड़ सका। उसके पीछे भागते-भागते शेर थक कर चूर हो गया। अंत में उसने हिरन का पीछा करना छोड़ दिया। खरगोश भी हाथ से गया और हिरन भी उसे नहीं मिला। अब शेर खरगोश को छोड़ देने के लिये पछताने लगा।
शिक्षा -आधी छोड़ सारी को धाए, आधी रहे न सारी पाए।

स्वार्थी चमगादड़

                     बहुत पुरानी बात है। एक बार पशुओं और पक्षियों में झगड़ा हो गया। चमगादड़ों ने इस लड़ाई में किसी का पक्ष नहीं लिया। उन्होंने सोचा, हम पक्षियों की भाँति उड़ते हैं, इसलिए पक्षियों में शामिल हो सकते हैं। मगर पक्षियों की तरह हमारे पंख नही होते हम अंडे़ भी नही देते। इसलिए हम पशु दल में भी शामिल हो सकते हैं। हम पक्षी भी हैं और पशु भी हैं। इसलिए दोनों में से जो पक्ष जीतेगा, उसी में हम मिल जाँएगे। अभी तो हम इस बात का इंतजार करें कि इनमे से कौन जीतता है।best for children
                     पशुओं और पक्षियों में युद्ध शुरू हुआ। एक बार तो ऐसा लगा कि पशु जीत जाएँगे चमगादड़ों ने सोचा, अब शामिल होने का सही वक्त आ गया है। वे पशुओं के दल में शामिल हो गए। कुछ समय बाद पक्षी-दल जीतने लगा। चमगादड़ों को इससे बड़ा दुःख हुआ। अब वे पशुओं को छोड़कर पक्षी-दल में शामिल हो गए।
                    अंत में युद्ध खत्म हुआ। पशुओं और पक्षियों ने आपस में संधि कर ली। वे एक-दूसरे के दोस्त बन गए। दोनों ने चमगादड़ों का बहिष्कार कर दिया। स्वार्थी चमगादड़ अकेले पड़ गए।
तब चमगादड़ वहाँ से दूर चले गए और अंधेरे कोटरों में छुप गए। तब से वे अंधेरे कोटरो में ही रहते हैं। केवल शाम के धुँधले में ही वे बाहर निकलते हैं। इस समय पक्षी अपने घोंसलों में लौट आते हैं और जंगली जानवर रात में ही अपनी गुफा से बाहर निकलते हैं।best for children
शिक्षा -स्वार्थी मित्र किसी को अच्छा नहीं लगता।

मूर्ख गधा

                     एक कुम्हार था। उसने एक कुत्ता और एक गधा पाल रखा था। कुम्हार के मकान के चारों ओर पत्थर की चहारदीवारी थी। कुत्ता रोज चहारदीवारी के अंदर उसके घर और मिट्टी के बर्तनों की रखवाली करता था। गधा अपने मालिक का वजनदार बोझ ढ़ोने का काम करता।
                     गधा कुत्ते से ईष्र्या करता था। वह मन-ही-मन सोचता, "कुत्ते का जीवन कितने आराम का है! केवल चहारदीवारी के भीतर इघर-उधर घूमना और किसी अजनबी को देखकर भौंकना।" ऊपर से मालिक उसे प्यार से थपथपाता है। उसे अच्छा खाना खिलाता है। मैं दिन भर भारी बोझ ढ़ोता फिरता हूँ। बदले में कुम्हार मुझे क्या देता है? वह मेरी पीठ पर डंडे लगाता है और खाने के लिये बचा-खुचा घटिया खाना देता है। यह तो वास्तव में घोर अन्याय है।"
                     कुछ दिन बाद गधे को विचार आया, "क्यों न मैं भी मालिक को कुत्ते की तरह खुश करने की कोशिश करूँ? मालिक घर लौटता है, तो कुत्ता उसे खुश करने के लिये कितने प्यार से भौंकता है। पूँछ हिलाते हुए उसके पास पहुँचता है। अपने अगले पैर उठाकर उसके शरीर पर रखता है। मुझे भी इसी तरह करना चाहिए। फिर मालिक मुझे भी प्यार करेगा।"
गधा मन-ही-मन सोच रहा था कि उसी समय उसने मालिक को आते हुए देखा। उसके स्वागत में गधा ढींचू-ढींचू करते रेंकने लगा, खुशी से अपनी पूँछ हिलाने लगा। आगे बढ़कर उसने अपने दोनो पैर कुम्हार की जाँघो पर रख दिए।
                   गधे की इस हरकत से कुम्हार हक्का बक्का रह गया। उसे लगा की गधा पागल हो गया है। उसने मोटा-सा डंडा उठाया और गधे की खूब पिटाई की।best for children
बेचारे गधे ने अपने मालिक को खुश करने की कोशिश की थी, पर बदले में उसे डंडे खाने पडे़।
शिक्षा -किसी से ईष्र्या नहीं करनी चाहिए।

भेडि़या और सारस

                  एक लालची भेडया था। एक दिन वह खूब जल्दी-जल्दी भोजन कर रहा था। भोजन करते-करते उसके गले में एक हड्डी अटक गई। भेडि़ए ने हड्डी बाहर निकालने की बहुत कोशिश की, पर वह हड्डी नही निकाल सका।
                  वह विचार करने लगा, "अगर हड्डी मेरे गले से बाहर न निकली, तो बहुत मुश्किल होगी। मैं खा पी नहीं सकूँगा और भूख-प्यास से मर जाऊँगा।"best for children
                  नदी के किनारे एक सारस रहता था। भेडि़या भागता-भागता सारस के पास पहुँचा। उसने सारस से कहा, "सारस भाई मेरे गले में एक हड्डी फँस गई है। आपकी गर्दन लंबी है। वह हड्डी तक पहुँच जाएगी। कृपा करके मेरे गले में फँसी हड्डी निकाल दो मैं तुम्हें अच्छा-सा इनाम दूँगा।"
                   सारस ने कहा, ठीक है! मैं अभी तुम्हारे गले की हड्डी निकाल देता हूँ। भेडि़ये ने अपना जबड़़ा फैलाया। सारस ने फौरन अपनी गर्दन भेडि़ये के गले में डालकर हड्डी बाहर निकाल दी।मनोरंजक कहानियाँ
अब मेरा ईनाम दो! सारस ने कहा।
                   "इनाम? कैसा इनाम?" भेडि़ये ने कहा, इनाम की बात भूल जाओ। भगवान का शुक्रिया अदा करो कि तुमने अपनी गर्दन मेरे गले में डाली और वह सही-सलामत बाहर चली आयी। इससे बड़़ा इनाम और क्या होगा?
शिक्षा -धूर्त की बातों में कभी नहीं आना चाहिए,
उन्हें एहसान भुलाते देर नहीं लगती।

नाग और चीटियाँ

                एक जंगल में एक नाग रहता था। वह रोज चिडि़यों के अंडो, छिपकलियों, चूहों, मेढकों, खरगोश, एवं छोटे-छोटे जानवरों को खाता रहता था। इस प्रकार छोटे-छोटे जीवों को खाकर दिन भर सुस्त पड़ा रहता। कुछ दिनों में ही वह काफी लंबा मोटा हो गया। उसका घमंड भी बहुत बढ़ गया।
               एक दिन नाग ने सोचा,"मैं जंगल में सबसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ। मैं जंगल का राजा हूँ। अब मुझे अपनी प्रतिष्ठा और आकार के अनुकूल किसी बडे़ स्थान पर रहना चाहिए।
यह सोचकर उसने अपने रहने के लिए विशाल पेड़ का चुनाव किया। पेड़ के पास चींटियों का एक बिल था। वहाँ ढेर सारे मिटटी के छोटे-छोटे कण जमा थे।
               नाग ने कहा, "यह बवाल मुझे पसंद नहीं। यह गंदगी यहाँ नहीं रहनी चाहिए।" वह गुस्से से बिल के पास गया और उसने चींटियों से कहा, "मैं नागराज हूँ, इस जंगल का राजा! मै आदेश देता हूँ कि जल्द-से-जल्द इस कूडे़ को यहाँ से हटाओ और चलती बनो।"मनोरंजक कहानियाँ
               नागराज को देखकर अन्य जानवर थर-थर काँपने लगे। पर नन्हीं चींटियों पर उसकी धौंस का कोई असर नही पड़ा। अब नाग का गुस्सा बहुत बढ़ गया। उसने अपनी पूँछ से बिल पर कोडे़ की तरह जोर से प्रहार किया।
               इससे चींटियों को बहुत क्रोध आया। क्षण भर में हजार चींटियाँ बिल से निकलकर बाहर आ गईं। वे नाग के शरीर पर चढ़कर उसे काटने लगीं नागराज को लगा जैसे उसके शरीर में एक साथ हजारों काँटे चुभ रहे हों। वह असह्य वेदना से विह्वल हो उठा। असंख्य चींटियों से वह घिर गया था। उनसे छुटकारा पाने के लिए वह छटपटाने लगा। मगर इससे कोई फायदा नहीं हुआ। कुुछ देर तक वह इसी तरह संघर्ष करता रहा, पर बाद मे अत्यधिक पीड़ा से उसकी जान निकल गयी।मनोरंजक कहानियाँ
शिक्षा -किसी को छोटा नही समझना चाहिए,

बारहसिंगे के सींग और पाँव

                   एक बारहसिंगा था। एक बार वह तालाब के किनारे पानी पी रहा था। इतने में उसे पानी में अपना प्रतिबिंब दिखाई दिया। उसने मन-ही-मन सोचा, मेरे सींग कितने सुंदर हैं। किसी अन्य जानवर के सींग इतने सुंदर नहीं हैं। इसके बाद उसकी नजर अपने पैरों पर पड़ी। उसे बहुत दुख हुआ।
                   मेरे पैर कितने दुबले-पतले और भद्दे हैं। तभी उसे थोड़ी दूर पर बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनाई दी।
                  बारहसिंगा डरकर तेजी से भागने लगा। उसने पीछे मुड़कर देखा। बाघ उसका पीछा कर रहा था। वह और तेज गति से भागने लगा। भागते-भागते वह बाघ से बहुत दूर निकल गया। आगे एक घनघोर जंगल था। वहाँ पहुँचकर उसे कुछ राहत मिली।मनोरंजक कहानियाँ
                 वह अपनी गति धीमी कर सावधानी पूर्वक आगे बढ़ने लगा। एकाएक उसके सींग एक पेड़ की डालियों में उलझ गए। बारहसिंगे ने अपने सींग छुड़ाने की बहुत कोशिश की, पर वे नहीं निकले।
उसने सोचा, ओह! मैं अपने दुबले-पतले और भद्दे पैरो को कोस रहा था। पर उन्हीं पैरों ने बाघ से बचने में मेरी मदद की मैंने अपने सुंदर सींगों की बहुत तारीफ की! पर ये ही सींग अब मेरी मृत्यु का कारण बनने वाले हैं। इतने में बाघ दौड़ता हुआ आ पहुँचा उसने बारहसिंगे को मार डाला।
शिक्षा -सुंदरता से उपयोगिता अधिक महत्त्वपूर्ण होती है।

मुर्गा और लोमड़ी

               एक जंगल में एक धूर्त लोमड़ी रहती थी। एक बार उसने एक मुर्गे को पेड़ की ऊँची डाल पर बैठे हुए देखा। लोमड़ी ने मन-ही-मन सोचा, "कितना बढि़या भोजन हो सकता है यह मेरे लिये?" पर मुश्किल यह थी कि वह पेड़ पर चढ़ नही सकती थी। वह चाहती थी कि किसी तरह मुर्गा नीचे उतर आए।मनोरंजक कहानियाँ
               इसलिए लोमड़ी पेड़ के नीचे गई। उसने मुर्गे से कहा, "मुर्गा भाई, आपके लिए एक खुशखबरी है। स्वर्ग से अभी-अभी आदेश आया है कि अब से सभी पशु-पक्षी मिल-जुलकर रहेंगे। अब वे कभी एक-दूसरे को नहीं मारेंगे। लोमडि़याँ भी अब मुर्गे मुर्गियों को नही खाएँगी। इसलिए तुम्हें मुझसे डरने की जरूरत नहीं है। नीचे आ जाओ! हम लोग बैठकर आपस में बातें करेंगे।"
               मुर्गे ने कहा," वाह-वाह! यह तो तुमने बड़ी अच्छी खबर सुनाई। वह देखो, तुम्हारे कुछ दोस्त भी तुमसे मिलने के लिए आ रहे है।"
मेरे दोस्त! लोमड़ी ने आश्चर्य से कहा, "मेरे कौन-से दोस्त आ रहे है? वही शिकारी कुत्ते! मुर्गे ने मुस्कराते हुए कहा।
शिकारी कुत्तों का नाम सुनते ही लोमड़ी भय से काँपने लगी। उसने भागने के लिए जोर की छलाँग लगायी।
मुर्गे ने कहा, "तुम उनसे क्यों घबरा रही हो? अब तो हम लोग आपस में दोस्त बन गये हैं न?"मनोरंजक कहानियाँ
हाँ, हाँ यह बात तो है! लोमड़ी ने कहा, "पर इन कुत्तों को अभी शायद इस बात का पता नहीं होगा।"
शिक्षा -यह कहकर लोमड़ी शिकारी कुत्तों के डर से सरपट भाग खड़ी हुई।
घूर्त की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए।

बिल्ली के गले मे घंटी

                  एक पंसारी था। उसकी दुकान में बहुत से चूहे रहते थे। वहाँ उनके खाने का भरपूर समान था। वे अनाज, सूखे मेवे, ब्रेड, बिस्कुट, जैम और चीज़ आदि छककर खाते थे।
चूहों के कारण पंसारी को काफी नुकसान होता था। एक दिन उसने सोचा, "इन चूहों से छुटकारा पाने के लिए मुझे कुछ उपाय करना चाहिए। वरना ये तो मुझे कहीं का नहीं छोडेगें।
                  एक दिन दुकनदार एक बड़ी और मोटी-सी बिल्ली ले आया। उसने उसे दुकान में छोड़ दिया। अब चूहे खुलेआम घूम-फिर नहीं सकते थे। बिल्ली रोज किसी न किसी चूहे को पकड़ती और उसे मारकर खा जाती।मनोरंजक कहानियाँ
                   धीरे-धीरे चूहों की संख्या कम होने लगी। इससे चूहों को बहुत चिंता हुई। उन्होंने इसका उपाय ढूँढने के लिये सभा की। सबने एक स्वर मे कहा, "हमें इस बिल्ली से छुटकारा पाना ही होगा"। पर छुटकारा पाने के लिए क्या करना चाहिए, यह उस सभा में किसी को नहीं सूझता था।
                  तभी एक होशियार चूहे ने खडे़ होकर कहा, "बिल्ली बहुत चालाक है, वह दबे पाँव बड़ी फूर्ती से आती है। इसलिए हमें उसके आने का पता ही नही चलता। हमें किसी तरह उसके गले में एक घंटी बाँध देनी चाहिए।"
दूसरे चूहे ने इसका समर्थन किया, "वाह क्या बात कही है! जब बिल्ली चलेगी, तो उसके गले की घंटी बजेगी। हम घंटी की आवाज सुनकर सावधान हो जाएँगे। हम इतने फासले पर रहेंगे कि वह हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेगी।"
                   सभी चूहों ने इस सुझाव का समर्थन किया। सारे चूहे खुशी से नाचने लगे। तभी एक बूढे़ चूहे ने कहा, "खुशियाँ मनाना बंद करो। मुझे सिर्फ इतना बताओ कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधेगा?" यह सुनते ही सारे चूहे चुप हो गये। वे एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। उन्हें इस सवाल का कोई जवाब नहीं सूझा।मनोरंजक कहानियाँ
शिक्षा -जिस सुझाव पर अमल न हो सके,
वह सुझाव किस काम का!

डरपोक खरगोश

                          एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह बहुत ही डरपोक था। कहीं जरा-सी भी आवाज सुनाई पड़ती तो वह डरकर भागने लगता। डर के मारे वह हर वक्त अपने कान खड़े रखता। इसलिए वह कभी सुख से सो नहीं पाता था।
                          एक दिन खरगोश एक आम के पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी पेड़ से एक आम उसके पास आकर गिरा। आम गिरने की अवाज सुनकर वह हड़बड़ा कर उठा और उछलकर दूर जा खडा हुआ। "भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।" चिल्लाता हुआ सरपट भागने लगा।
                     मनोरंजक कहानियाँ     रास्ते में उसे एक हिरन मिला। हिरन ने उससे पूछा, "अरे भाई तुम इस तरह भाग क्यों रहे हो? आखिर मामला क्या है? खरगोश ने कहा, अरे भाग, भाग! जल्दी भाग! आसमान गिर रहा है। हिरन भी डरपोक था। इसलिए वह भी भयभीत होकर उसके साथ भागने लगा। भागते-भागते दोनो जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, "भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।श"
उनकी देखादेखी डर के मारे जिराफ, भेडि़या, लोमडी, गीदड़, तथा अन्य जानवरों का झुंड भी उनके साथ भागने लगा। सभी भागते-भागते एक साथ चिल्लाते जा रहे थे, भागो! भागो! आसमान गिर रहा है। उस समय सिंह अपनी गुफा में सो रहा था। जानवरो का शोर सुनकर वह हडबड़ाकर जाग उठा। गुफा से बाहर आया, तो उसे बहुत क्रोध आया। उसने दहाड़ते हुए कहा, रूको! रूको! आखिर क्या बात है?
सिंह के डर से सभी जानवर रूक गए। सबने एक स्वर मे कहा, "आसमान नीचे गिर रहा है।"मनोरंजक कहानियाँ
                          यह सुनकर सिंह को बड़ी हँसी आई। हँसते-हँसते उसकी आँखो में आँसू आ गए। उसने अपनी हँसी रोककर कहा, "आसमान को गिरते हुए किसने देखा है?" सब एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। अंत में सभी की निगाह खरगोश की ओर मुड़ गई तभी उसके मुँह से निकला, "आसमान का एक टुकड़ा तो उस आम के पेड़ के नीचे ही गिरा है।"
"अच्छा चलो, हम वहाँ चलकर देखते हैं।" सिंह ने कहा।
सिंह के साथ जानवरों की पूरी पलटन आम के पेड़ के पास पहुँची सबने इधर-उधर तलाश की। किसी को आसमान का कोई टुकड़ा कहीं नजर नही आया। हाँ, एक आम जरूर उन्हे जमीन पर गिरा हुआ दिखाई दिया।
सिंह ने आम की ओर इशारा करते हुए खरगोश से पूछा, "यही है, आसमान का टुकड़ा, जिसके लिए तुमने सबको भयभीत कर दिया?"मनोरंजक कहानियाँ
अब खरगोश को अपनी भूल समझ में आई। उसका सिर शर्म से झुक गया। वह डर के मारे थर-थर काँपने लगा।
दूसरे जानवर भी इस घटना से बहुत शार्मिंदा हुए। वे अपनी गलती पर पछता रहे थे कि सुनी-सुनाई बात से डरकर वे बेकार ही भाग रहे थे।
शिक्षा -सुनी-सुनाई बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

असली माँ

                एक बार दो स्त्रियाँ एक बच्चे के लिए झगड़ रही थीं। प्रत्येक स्त्री यह दावा कर रही थी कि वही उस बच्चे की असली माँ है। जब किसी तरह झगड़ा नहीं सुलझा तो लोगों ने उन दोनों को न्यायधीश के सामने पेश किया।
न्यायधीश ने ध्यानपूर्वक दोनों की दलीलें सुनीं। न्यायधीश के लिए भी यह निर्णय करना मुश्किल हो गया कि बच्चे की असली माँ कौन थी। न्यायधीश ने बहुत सोच-विचार किया। अखिरकार उसे एक उपाय सूझा। उसने अपने कर्मचारी को आदेश दिया, ”इस बच्चे के दो टुकड़े कर दो और एक-एक टुकड़ा दोनों स्त्रियों को दे दो।“मनोरंजक कहानियाँ
                न्यायधीश का आदेश सुनकर उनमें से एक स्त्री ने धाड़ मारकर रोते हुए कहा,
”नहीं, नहीं! ऐसा जुल्म मत करो। दया करो सरकार। भले ही यह बच्चा इसी स्त्री को दे दो, लेकिन मेरे लाल को जिंदा रहने दो! मैं बच्चे पर अपना दावा छोड़ देती हूँ।“
पर दूसरी स्त्री कुछ नहीं बोली। वह चुपचाप यह सब देखती रही।मनोरंजक कहानियाँ
                अब चतुर न्यायधीश को मालूम हो गया था कि बच्चे की असली माँ कौन है। उसने बच्चा उस स्त्री को सौप दिया, जो उस पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार थी। उसने दूसरी स्त्री को जेल भेज दिया।
शिक्षा -सच्चाई की सदा विजय होती है।

भेड़ के वेष में भेडि़या

                    एक दिन एक भेडि़ए को कहीं से भेड़ की खाल मिल गई। खाल ओढ़कर वह मैदान मे चर रही भेड़ों के झुंड मे शामिल हो गया। भेडि़ए ने सोचा,"सूर्य अस्त हो जाने के बाद गड़रिया भेड़ों को बाड़े में बंद कर देगा। भेड़ों के साथ मैं भी बाडे़ मे घुस जाऊँगा। रात को किसी मोटी भेड़ को उठा कर भाग जाऊँगा और मजे से खाऊँगा।"
                    शाम हुई तो गड़रिया भेड़ों को बाड़े में बंद कर घर चला गया। भेडि़या चुपचाप अँधेरा होने का इंतजार करने लगा। धीरे-धीरे अँधेरा गहराने लगा। यहाँ तक तो सब कुछ भेडि़ए की योजना के अनुसार ही हुआ। फिर एक अनहोनी घटना घट गई।मनोरंजक कहानियाँ
                   एकाएक गड़रिए का नौकर बाडे़ मे आया। उसके मालिक ने रात के भोजन के लिए किसी मोटी भेड़ को लाने के लिए उसे भेजा था। संयोग से नौकर भेड़ की खाल ओढ़े भेडि़ए को ही उठाकर ले गया और उसे हलाल कर डाला।
भेडि़या भेड़ खाने के लिए आया था, परंतु उस रात वह गड़रिए और उसके मेहमानों का आहार बन गया।
शिक्षा -बुरा सोचने वाले का अंत बुरा ही होता है।

माँ का प्यार

             एक परी थी। एक बार उसने घोषणा की,”जिस प्राणी का बच्चा सबसे ज्यादा सुंदर होगा, उसे मैं इनाम दूँगी।“
             यह सुनकर सभी प्राणी अपने-अपने बच्चों के साथ एक स्थान पर जमा हो गए। परी ने एक-एक करके सभी बच्चों को ध्यान से देखा। जब उसने बंदरिया के चपटी नाकवाले बच्चे को देखा, तो वह बोल उठी,” छिः! कितना कुरूप है यह बच्चा! इसके माता-पिता को तो कभी पुरस्कार नही मिल सकता।“मनोरंजक कहानियाँ
             परी की यह बात सुनकर बच्चे के माँ के दिल को बहुत ठेस लगी। उसने अपने बच्चे को हदय से लगा लिया और उसके कान के समीप अपना मुँह ले जाकर कहा,”तू चिंता न कर मेरे लाल! मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ। मेरे लिए तो तू ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। मैं कोई दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना नहीं चाहती। भगवान तुझे लंबी उम्र दे।“

शिक्षा -दुनिया की कोई चीज़ माँ के प्यार की बराबरी नहीं !
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